तीन तलाक की प्रथा को खारिज कर देने का फैसला सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पांच जज पांच अलग-अलग धर्मों के हैं

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1400 साल पुरानी तीन तलाक की प्रथा को खारिज कर देने का फैसला सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पांच जज पांच अलग-अलग धर्मों के हैं। 18 महीने पहले दायर हुई पिटीशन पर फैसला सुनाने वाली बेंच में चीफ जस्टिस जेएस खेहर (सिख), कुरियन जोसफ (इसाई), आरएफ नरीमन (पारसी), यूयू ललित (हिंदू) और अब्दुल नजीर (मुस्लिम) शामिल थे। बेंच ने फैसला 3:2 की मेजॉरिटी से सुनाया है। चीफ जस्टिस खेहर 27 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। वहीं, जस्टिस नरीमन ऐसे जज हैं जो सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी कर चुके हैं। उनके टैलेंट को देखते हुए नियमों में बदलाव कर उन्हें सीनियर काउंसिल अप्वाइंट किया गया था। वहीं, जस्टिस कुरियन जोसफ वही जज हैं जिन्होंने जजों के सम्मान में दिए गए प्रधानमंत्री के डिनर में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
1) चीफ जस्टिस
कौन जस्टिस जेएस खेहर?
जस्टिस खेहर का जन्म 28 अगस्त 1952 को चंडीगढ़ में हुआ। 1999 में वे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने। 2009 में उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। 2010 में उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। 2011 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया। जनवरी 2017 में वे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने।
 हिम्मतवाले जज
तीन तलाक पर 5 जजों की बेंच की अगुआई जस्टिस खेहर ही कर रहे थे। जस्टिस खेहर जजों की नियुक्ति के लिए नेशनल ज्युडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन बनाने के केंद्र के फैसले को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने ही सहारा प्रमुख को जेल भेजने और अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन को खत्म कर कांग्रेस की सरकार बहाल करने जैसे फैसले सुनाए हैं। सहारा मामले की सुनवाई कर रही बेंच में रहे जस्टिस केएस राधाकृष्णन ने अपने रिटायरमेंट पर कहा था कि जस्टिस खेहर जैसा हिम्मतवाला जज उन्होंने नहीं देखा।
तीन तलाक पर क्या कहा?
– जस्टिस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार देने के विरोध में फैसला दिया था।
– उन्होंने कहा- ‘‘तलाक-ए-बिद्दत संविधान के आर्टिकल 14, 15, 21 और 25 का वॉयलेशन नहीं करता। सरकार छह महीने में कानून बनाए। छह महीने तक मुस्लिम तीन तलाक का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।’’
– दोनों जजों ने कहा- भारत में सती, देवदासी और बहुविवाह जैसी प्रथाएं बंद करने के पर्सनल लॉ से जुड़े सुधार कानूनी दखल के जरिए ही हुए हैं। जब दुनियाभर के मुस्लिम देशों ने सुधार के कदम उठा लिए हैं तो आजाद भारत को क्यों पीछे रहना चाहिए?
 2) जस्टिस कुरियन जोसेफ
कौन हैं जस्टिस जोसेफ?

– 30 नवंबर 1953 में जन्मे जस्टिस कुरियन जोसेफ ने लॉ की पढ़ाई के बाद 1979 में केरल हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की थी।
– वे दो बार केरल हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस रहे। मार्च 2013 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने। वे नवंबर 2018 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहेंगे।
 इन्होंने मोदी के न्योते को नकारा था
– अप्रैल 2015 में सरकार ने जजों और चीफ मिनिस्टर्स की ज्वाइंट कॉन्फ्रेंस रखी। तीन दिन की यह कॉन्फ्रेंस उस वीकेंड पर रखी गई जब गुड फ्रायडे और ईस्टर आने वाला था। जस्टिस जोसेफ ने उस वक्त चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रहे एचएल दत्तू से इस बारे में नाराजगी जाहिर कर दी थी।
– इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लेटर लिखकर डिनर के न्योते पर शुक्रिया अदा किया लेकिन अपनी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिन तारीखों की धार्मिक अहमियत है, उन तारीखों पर ऐसे कार्यक्रम नहीं रखे जाने चाहिए।
 तीन तलाक पर क्या कहा?
– जस्टिस जोसेफ ने अपने 26 पेज के जजमेंट में कहा- मेरे लिए माननीय चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की इस बात पर राजी होना बहुत मुश्किल है कि तीन तलाक की प्रथा धर्म और पर्सनल लॉ से जुड़ी है। तीन तलाक में तो दरवाजा बंद हो जाता है। लिहाजा, यह कुरान-ए-पाक के बुनियादी फलसफों के खिलाफ है। यह शरीयत के खिलाफ है। तलाक किसी जायज वजह से होना चाहिए। इसके बाद पति-पत्नी के बीच सुलह की कोशिशें होनी चाहिए। अगर कोशिशें नाकाम हो जाएं तो तलाक होना चाहिए।
 3) जस्टिस रोहिंटन एफ. नरीमन
कौन हैं जस्टिस नरीमन?

– जाने माने ज्यूरिस्ट फली एस नरीमन के बेटे जस्टिस रोहिंटन नरीमन का जन्म 13 अगस्त 1956 को हुआ।
 इनके लिए बदले गए थे नियम
– लॉ से जुड़े मामलों में गजब की पकड़ और टैलेंट को देखते हुए उन्हें 37 की उम्र में ही सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट का दर्जा दे दिया गया था। उस वक्त इस ओहदे के लिए मिनिमम एज 45 थी। लेकिन तब चीफ जस्टिस रहे एमएन वेंकटचलैया ने नियमों में बदलाव कर उन्हें यह पहचान दी।
– जस्टिस नरीमन 2014 तक सुप्रीम कोर्ट के वकील थे। उन्होंने 35 साल लॉ की प्रैक्टिस की। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में वे ऐसे पांचवें वकील रहे जिन्हें सीधे बार से चुनकर जज बनाया गया।
– वे इस बेंच का हिस्सा रहे हैं, जिसने ऑनलाइन अपमानजनक टिप्पणियां पोस्ट करने के मामले में पुलिस को गिरफ्तारी का हक देते विवादास्पद साइबर लॉ को खारिज कर दिया था। जस्टिस नरीमन 2021 में रिटायर होंगे।
 तीन तलाक पर क्या कहा?
– जस्टिस नरीमन ने जस्टिस यूयू ललित के साथ अपने फैसले में कहा, ‘”तीन तलाक संविधान के आर्टिकल 14 (बराबरी के हक) का वॉयलेशन करता है। तीन तलाक शादी के रिश्ते को बचाने के लिए पति-पत्नी के बीच सुलह की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ता। इसी वजह से यह कुरान के मुताबिक नहीं है। यह साफ है कि इस तरह का तलाक मनमौजी तरीके से दिया जाता है।”
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