शंकराचार्य नहीं दे पा रहे हैं डेढ़ करोड़ की बस पर आठ लाख का टैक्स

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शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती ने करीब डेढ़ करोड़ की बस खरीदी है। टैक्स माफ करने के प्रपोजल को लेकर मध्य प्रदेश सरकार में दो मत हो गए थे। होम मिनिस्टर बाबूलाल गौर शंकराचार्य की लग्जरी बस का टैक्स माफ करवाना चाहते थे, लेकिन राज्य के परिवहन विभाग ने इससे इनकार कर दिया था। डिपार्टमेंट ने टैक्स माफी का प्रपोजल कैबिनेट को भेज दिया था, जहां से बुधवार को इसे मंजूरी दे दी गई है। बता दें कि शंकराचार्य की लग्जरी बस करीब डेढ़ करोड़ की है।
– परिवहन विभाग इस बस के लिए शंकाराचार्य से साढ़े आठ लाख रुपए टैक्स मांग रहा है, लेकिन शंकराचार्य इसे देने से मना कर रहे हैं।
– उन्होंने गृह मंत्री बाबूलाल गौर से टैक्स माफ कराने काे कहा है।
– बाबूलाल गौर ने इसे लेकर एक लेटर परिवहन विभाग को भेजा।
– शंकराचार्य कह रहे हैं कि बस का चेचिस 15 लाख रुपए का था, इसलिए उस हिसाब से टैक्स वसूला जाए।
– वहीं, परिवहन विभाग बस के सड़क पर आने की लागत के हिसाब से टैक्स लेना चाह रहा है।
 परिवहन मंत्री ने क्या कहा?
– इस मामले में परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा,”टैक्स माफ करने का अधिकार कैबिनेट को है।”
– ”कैबिनेट जो भी फैसला लेगी, उसे हम स्वीकार कर लेंगे। टैक्स वसूलने को लेकर परिवहन विभाग का मत कैबिनेट के सामने ही रखेंगे।”

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का नाम एक बार फिर चर्चा में है। इस बार इसके पीछे वजह उनका बयान नहीं बल्कि एक डेढ़ करोड़ की लग्जरी बस है। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने 15 लाख रुपए की बस खरीदी थी और उसमें काम कराने के बाद इस बस की कीमत तकरीबन डेढ़ करोड़ हो गई।


ऐसी तीन बसें कराई है असेंबल, लग्जरी सुविधाओं से लैस
– शंकराचार्य के मठ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, डीसी कंपनी से तीन बसें असेंबल करवाई गई है।
– एक बस की कीमत डेढ़ करोड़ रुपए है। एक बस शंकराचार्य के गोटेगांव स्थित आश्रम में रहेगी। वहीं एक बस दिल्ली और एक उत्तराखंड में रहेगी।
– बस में शंकराचार्य की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा गया है।
– बस के पिछले हिस्से में एक ऑटोमेटिक लिफ्ट लगाई गई है। शंकराचार्य चल नहीं सकते, इसलिए यह सुविधा दी गई है। यह लिफ्ट जमीन से टिकी रहेगी और शंकराचार्य की व्हीलचेयर यहां आकर लग जाएगी। लिफ्ट अपने आप उन्हें बस में ले जाएगी।
– इसके अलावा बस में शंकराचार्य के लिए बिस्तर, टीवी और वॉश रूम की भी व्यवस्था की गई है।
– बस के आगे और पीछे की तरफ हाई क्वालिटी कैमरे लगाए गए हैं।
– बताया गया है कि इस कैमरे की मदद से शंकराचार्य 500 मीटर आगे और पीछे क्या चल रहा है, यह देख सकते हैं। इसके लिए एलईडी स्क्रीन बस में लगाया गया है।
क्रांतिकारी साधु कहलाते हैं शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती
– 2 सितम्बर, 1924 को मध्य प्रदेश में जबलपुर के पास जन्मे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती द्वारका पीठ के धर्मगुरु हैं।
– वे 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ हुए भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा ले चुके हैं। जेल भी जा चुके हैं। लिहाजा, क्रांतिकारी साधु के नाम से भी पहचाने जाते हैं।
– एमपी के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह जैसे नेता उनके शिष्य हैं।
– 1973 में उन्हें ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य बनाया गया।
– 1982 को वे द्वारका पीठ की गद्दी पर बैठे।
– वे रामजन्म भूमि आंदोलन को राजनीति से दूर रखने के लिए शंकराचार्यों के साथ मिलकर राम जन्मभूमि रामालय न्यास भी बना चुके हैं।
– साई बाबा पर बयानबाजी से पहले शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती नरेंद्र मोदी के सवाल पर एक पत्रकार को थप्पड़ जड़ चुके हैं।
– दरअसल, पत्रकार ने शंकराचार्य से मोदी के पीएम बनने को लेकर सवाल किया था। पत्रकार के इस सवाल पर शंकराचार्य बिफर गए थे।
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