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आसाराम को जोधपुर की स्पेशल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई

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नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आसाराम को जोधपुर की स्पेशल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। उसके साथ ही उसकी राजदार शिल्पी और शरतचंद्र को भी दोषी करार दिया गया है। जबकि आसाराम के प्रमुख सेवादार शिवा और आश्रम के रसोइए प्रकाश को कोर्ट ने बरी कर दिया है। बताया जा रहा है कि सजा मिलते ही आसाराम रो पड़ा। उसने बुढ़ापे का हवाला देते हुए रहम की भीख मांगी। कहा- जज साब बूढ़ा हो गया हूं, रहम करो। गौरतलब है कि साढ़े चार साल से जोधपुर जेल में बंद अासाराम के खिलाफ अपनी ही शिष्या से दुष्कर्म करने का अारोप था। पॉक्सो एक्ट के तहत ये पहला बड़ा फैसला है।

केस के फैक्ट से लगता है कि आसाराम को कम से कम 10 साल की सजा हो सकती है, प्रावधान उम्रकैद तक का है। फैसले को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्थान, गुजरात और हरियाणा को हिदायत दी है कि किसी भी सूरत में हिंसा नहीं होनी चाहिए। इन राज्यों में आसाराम के अनुयायी काफी संख्या में हैं।

ये थे आसाराम के 4 राजदार, कोर्ट ने दो को माना दोषी

1. प्रमुख सेवादार शिवा उर्फ सवाराम
क्या थी भूमिका:
छात्रा को शाहजहांपुरा से दिल्ली। फिर दिल्ली से जोधपुर बुलाया। यहां मणाई आश्रम में आसाराम से मिलाने की व्यवस्था की थी।

2. आश्रम का रसोइया प्रकाश द्विवेदी
क्या थी भूमिका:
शरद, शिल्पी, शिवा और आसाराम के बीच मीडिएटर बना। छात्रा के परिजनों को जाने का कहकर छात्रा के अकेली रहने की स्थिति पैदा की थी।

3. हॉस्टल वार्डन शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता
क्या थी भूमिका:
भूत-प्रेत का भय दिखाया। छात्रा को झांसे में लेकर आसाराम के पास भेजा था।

4. हॉस्टल संचालक शरदचंद्र उर्फ शरतचंद्र
क्या थी भूमिका:
बीमारी का पता चलने पर भी इलाज नहीं कराया। पूरी रात अनुष्ठान कराया. आसाराम को ही एकमात्र उपचारकर्ता मानने पर मजबूर किया।

5 साल केस के, 5 आरोपियों का फैसला इन 5-5 तथ्यों से समझें
दोषी तय होने की उम्मीद क्यों थी?

1) पीड़िता न डिगी न डरी, 27 दिन की लंबी जिरह में 94 पेज में दिए बयान।
2) जांच अधिकारी ने 60 दिन तक हर धारा पर दिए ठोस जवाब, 204 पेज के बयान।
3) पीड़िता को बालिग साबित करने की हर मुमकिन कोशिश, उम्र पर संदेह की वजह नहीं।
4) अभियोजन की कहानी को सपोर्ट करने वाले कृपालसिंह के बयान, जिसे मार दिया।
5) पूरी कहानी दुष्कर्म की नई परिभाषा पर टिकी, वह टूटी तो केस ही बिखर सकता था।

आरोप मुक्ति के आसार कम थे?
1)जहां लाखों लोगों की आस्था जुड़ी होती है, उसका अपराध ज्यादा गंभीर माना जाता है।
2) जिसके संरक्षण में नाबालिग रहता है, वही उसका शोषण करे तो और भी संगीन।
3) बचाव पक्ष का जोर बालिग साबित करने का था, उसमें कामयाबी नहीं मिल पाई।
4) पीड़िता के पिता पर 50 करोड़ मांगने का आरोप लगाया, 2008 से साबित नहीं हुआ।
5) केस के 3 अहम गवाह में से 2 की हत्या हो गई अौर एक की हत्या की कोशिश हुई।

 आसाराम पर ये आरोप लगाए थे पीड़िता ने?
आसाराम के गुरुकुल में पढ़ने वाली छात्रा ने अपने बयान में कहा, “मुझे दौरे पड़ते थे। गुरुकुल की एक शिक्षिका ने मेरे माता-पिता से कहा आसाराम से इलाज कराएं। आसाराम ने मुझे जोधपुर के पास मणाई गांव के फार्म हाउस में लाने को कहा। वहां पहुंचे तो मेरे माता-पिता को बाहर रोक दिया गया। उनसे कहा गया कि आसाराम विशेष तरीके से मेरा अकेले में इलाज करेंगे। इसके बाद मुझे एक कमरे में भेज दिया गया। वहां पर आसाराम पहले से मौजूद थे। उन्होंने मेरे साथ अश्लील हरकतें की। साथ ही धमकी दी कि यदि मैं चिल्लाई तो कमरे से बाहर बैठे उसके माता-पिता को मार दिया जाएगा। मुझे ओरल सेक्स करने को कहा था, लेकिन मैंने मना कर दिया।”
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