कलेक्टर निशांत वरवड़े ने सोमवार से प्रदेश में धारा 144 के लागू करने के आदेश जारी कर दिए

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सोमवार को स्कूल बस संचालकों की हड़ताल के कारण गर्मी में अभिभावकों और बच्चों को परेशान होना पड़ा। दोपहर 12 बजे तक चली लड़ताल को लेकर बस संचालकों का तर्क है कि प्रशासन उनसे चर्चा के लिए तैयार नहीं है। इसके चलते बीच का रास्ता नहीं निकल पा रहा है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को लेकर प्रशासन ने सख्त रूख अपना लिया है।
प्रशासन के आदेश के विरोध में थी हड़ताल
प्रशासन ने बसों में कैमरे व जीपीएस न लगाने के मामले में सोमवार से धारा 144 लागू कर दी है। प्रशासन की सख्ती से नाराज बस संचालकों ने सोमवार को हड़ताल कर दी थी। कॉलेज बस संचालकों ने भी हड़ताल का समर्थन किया था। इससे एक दिन के लिए शहर में 2 हजार स्कूल व कॉलेज बसों के पहिए थम गए। हालांकि, जिन स्कूलों में परीक्षा चल रही है उनकी बसों को हड़ताल से बाहर रखा गया था।
ऑपरेटर्स…हमने वक्त मांगा है
जिला प्रशासन से हमने जीपीएस और कैमरे लगाने के लिए कुछ वक्त मांगा था। वक्त नहीं मिला इसलिए एक दिन की टोकन स्ट्राइक की थी। हड़ताल में कॉलेज बसें भी शामिल थीं। –नसीम परवेज, अध्यक्ष स्कूल बस और कॉलेज बस ऑनर्स एसोसिएशन
 प्रशासन ने दिए धारा 144 के आदेश
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन कराने कलेक्टर निशांत वरवड़े ने सोमवार से प्रदेश में धारा 144 के लागू करने के आदेश जारी कर दिए है। गाइडलाइन का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। इसे लेकर लम्बे समय से रियायत दी जा रही थी।
दिशा नागवंशी, एडीएम
ऑपरेटर्स की मांग
स्कूल और कॉलेज बसों में जीपीएस एवं कैमरे की अनिवार्यता समाप्त की जाए। स्कूल बसों को पक्के परमिट एवं परमिट की वैधता तक लीज दर्ज की जाए और 5 वर्ष की लीज दर्ज की जाए। स्कूल बसों पर 600 रुपए प्रति सीट की पेनाल्टी समाप्त की जाए। स्कूलों बसों के रुके हुए फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए जाए। कॉलेज बसों से सर्विस टैक्स समाप्त हो। स्कूल बसों को ग्रीन कार्ड दिए जाए।
दूसरी हड़ताल है यह दो साल में
स्कूल बसों की दो साल में यह दूसरी हड़ताल है। इसके पहले अक्टूबर 2015 को स्कूल बस ऑनर्स अचानक हड़ताल पर चले गए थे। उनकी मांग टोल प्लाजा खत्म करने की थी।
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