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भोपाल सहित मप्र के कुछ हिस्सों में यह 23 से 25 जून के बीच दस्तक दे सकता

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मध्यप्रदेश में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। भोपाल सहित मप्र के कुछ हिस्सों में यह 23 से 25 जून के बीच दस्तक दे सकता है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला ने बताया कि मानसून महाराष्ट्र के विदर्भ, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के आसपास, ओडिशा के पुरी होते हुए पश्चिम बंगाल और सिक्किम तक पहुंच चुका था। इसके बाद यह कमजोर पड़ गया था।

भोपाल: दोपहर 2.30 बजे छाए घने बादल, करीब 15 मिमी बारिश हुई

– मंगलवार को राजधानी में एयरपोर्ट व उससे सटे इलाकों में दोपहर 2.30 बजे तेज हवा चली और 15 मिमी बारिश हुई। कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। मौसम बदलने से तापमान 15 डिग्री लुढ़क गया था। घने बादल छाने से विजिबिलिटी 6 किमी से घटकर 1 किमी रह गई थी। वहां 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा भी चली।

– वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला ने बताया कि बैरागढ़ आॅब्जरवेटरी में 15 मिमी बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई है। दोपहर 1.30 बजे तापमान 36 डिग्री पर था।

– बारिश की वजह से यह दोपहर 2.30 बजे लुढ़ककर 20.8 डिग्री सेल्सियस पर आ गया था। शुक्ला ने बताया कि मध्य महाराष्ट्र में हवा के ऊपरी हिस्से में चक्रवात बना था। अरब सागर से नमी आ रही है। तापमान ज्यादा है। दो- तीन से हो रही बारिश से नमी थी। इसकी वजह से मौसम में यह बदलाव आया।

शहर में नहीं हुआ कोई असर

शहर में इसका कोई असर नहीं हुआ। यहां बादल तो छाए थे, लेकिन बारिश नहीं हुई। कुछ इलाकों में हल्की बूंदें ही पड़ीं। तीन दिन पहले शहर में हुई थी बारिश, लालघाटी से एयरपोर्ट रोड, गांधी नगर तक धूप चटक रही थी। इधर मंगलवार को दिन का तापमान 37.3 डिग्री दर्ज किया गया। इसमें करीब एक डिग्री की कमी आई। देर रात ढाई बजे कोलार, कोटरा सुल्तानाबाद, एमपी नगर, सुभाष नगर समेत कई क्षेत्रों में बारिश हुई। रात का तापमान 24.0 डिग्री दर्ज किया गया।

आज थोड़ी राहत, बन सकते है गरज- चमक की स्थिति
बुधवार को थोड़ी राहत मिलने के आसार हैं। बादल कुछ हद तक छंट सकते हैं। गरज- चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी भी होने का अनुमान है।

हालात सामान्य होने में लग सकते हैं दो साल

पीएचई के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर सुनील श्रीवास्तव कहते हैं कि 2008 में सामान्य से 50 फीसदी बारिश भी नहीं हुई थी। इसके बाद 2009 में लेवल 1647 फीट तक पहुंच गया था। चार साल बाद 2012 में जाकर फुल टैंक की स्थिति आ सकी थी। यदि इस बार सौ फीसदी बारिश भी हुई तो भी इसके फुल टैंक लेवल होने की संभावना कम ही है।

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