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मुख्यमंत्री फसल ऋण माफी योजना के फार्म भरवाए जाने की शुरुआत हो गई

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प्रदेश में मंगलवार से मुख्यमंत्री फसल ऋण माफी योजना के फार्म भरवाए जाने की शुरुआत हो गई। राजधानी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि मैंने कर्ज माफी को ‘जय किसान ऋण मुक्ति योजना’ का नाम दिया है। कार्यक्रम में 15 किसानों से कर्जमाफी के फार्म भरवाए गए। मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं को चेताते हुए कहा कि हमारे घर की चिंता करने की बजाए खुद के घर की चिंता करें। उन्होंने कहा कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं ये भाजपा नेता समझ गए होंगे।

कमलनाथ ने कहा कि इस योजना से प्रदेश के 50 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा होगा। किसानों का 50 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ होगा। उन्होंने कहा कि ये ऋण मुक्ति किसानों के लिए कोई उपहार नहीं, बल्कि एक मील का पत्थर है। एक इन्वेस्टमेंट है भविष्य के लिए। उन्होंने कहा कि अगले महीने प्रदेश को एक सरप्राइज मिलेगा, जिसमें बताऊंगा कि प्रदेश में कितना इन्वेस्टमेंट आएगा।

भाजपा को चेताया: भाजपा द्वारा किसानों की कर्जमाफी पर उठाए जा रहे सवालों पर कमलनाथ ने कहा कि वे मुझे नहीं समझाएं की क्या करना है। भाजपा सरकार के बारे में कहती है कि जल्द ही गिर जाएगी। लेकिन मैदान में दम दिखाने से डरती है।

सुबह बदला नाम: इससे पहले आज सुबह प्रदेश सरकार की ओर से जो फार्म ट्वीट किया गया था उस पर मुख्यमंत्री कृषि ऋण माफी योजना का नाम लिखा था। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनकी जानकारी में ये आया तो उन्होंने नाम बदल दिया।

22 फरवरी से किसानों के खाते में आएंगे रुपए: सरकार ने कर्जमाफी के 80 लाख आवेदन छपवाए हैं। किसानों से आवेदन भरवाए जाने की जिम्मेदारी जनपद पंचायत सीईओ की होगी। इसे मद्देनजर रखते हुए 22 फरवरी से किसानों के खाते में कर्जमाफी की राशि डलवाने की रणनीति बनाई गई है। पंचायतों में  18 जनवरी तक हरी और सफेद सूचियां चस्पा की जाएंगी।

17 बैंकों की 7 हजार 500 शाखाओं से योजना का क्रियान्वयन : कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि प्रदेश में 17 बैंकों की 7 हजार 500 शाखाओं के माध्यम से योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। आवेदन ऑनलाइन भरे जाएंगे। हर रोज ग्रामवार तथा शाखावार प्राप्त होने वाले आवेदनों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी, उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदर्शित की जाने वाली सूचियों में कृषकों के नाम हिन्दी में ही दर्ज हों।

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