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स्वच्छ को जांचने स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के तहत सर्वे टीम इंदौर की गलियों में घूम रही है

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स्वच्छता में देश के नंबर वन इंदौर की स्वच्छ को जांचने स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के तहत सर्वे टीम इंदौर की गलियों में घूम रही है। टीम यहां घूम कर 18 बिंदुआें पर सफाई को आंकेगी और फिर 4000 अंकों में से नंबर देगी। दल गलियों, बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों, शहर के शौचालयों, ड्रेनेज लाइन, ट्रेंचिंग ग्रांउड सहित शहरभर में घूमकर सफाई देखेगी। इस टीम को 1200 अंकों में से नंबर देने हैं। एेसे में ये अंक नंबर वन बनने के लिए काफी मायने रखते हैं। उधर महापौर मालिनी गौड़ बुधवार दोपहर खजराना क्षेत्र पहुंचीं और डोर टू डोर कचरे के बारे में जानकारी ली।

ये हैं सर्वे का मुख्य बिंदु
– कॉलोनियों, बस्तियों, पुराना शहर, अव्यवस्थित और व्यवस्थित बसा क्षेत्र साफ है या नहीं?
– महिला और पुलिस पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट। क्या इन्हें बच्चे भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
– टॉयलेट की सफाई के साथ रोशनदान, जलप्रदाय, लाइट के इंतजाम।
– टॉयलेट एरिया में ड्रेनेज सिस्टम।
– टॉयलेट में स्वच्छ भारत मिशन के संदेश वाले होर्डिंग, बैनर, वॉल पेंटिंग।
– मार्केट में सफाई व्यवस्था।
– सब्जी, फल, मीट या फिश मार्केट में साइट कंपोस्टिंग, वेस्ट ट्रांसफर स्टेशन और प्राइमरी वेस्ट कलेक्शन सेंटर की जानकारी।
– सफाई को लेकर लगे साइन बोर्ड।
– रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर सफाई व्यवस्था।
– मुख्य स्टेशन पर रेलवे ट्रैक या प्लेटफॉर्म के आसपास 500 मीटर क्षेत्र में कहीं खुले में शौच तो नहीं की जा रही?
– शहर में लगे डस्टबीन के बारे में जानकारी और उसके इस्तेमाल को लेकर जागरूकता।

ये सवाल पूछ रही टीम
– क्या आपको यह जानकारी है कि आपका शहर स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में हिस्सा ले रहा है?
– आपका क्षेत्र क्या पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा साफ है?
– क्या इस साल आपने व्यावसायिक क्षेत्रों में लगे लिटरबिन का उपयोग शुरू किया है?
– क्या आप इस साल पृथकीकृत (गीला-सूखा) घर-घर कचरा संग्रहण से संतुष्ट हैं?
– क्या पिछले साल की अपेक्षा मूत्रालय-शौचालय की व्यवस्था बढ़ी है जिसके कारण लोगों ने खुले में पेशाब और शौच करना बंद किया है?
– क्या सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालय पहले की अपेक्षा ज्यादा साफ हैं और उन तक पहुंचना आसान है?

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