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आईपीएस अपर्णा गुप्ता ने 150 पुलिस वालों की टीम के साथ रेड लाइट एरिया में छापा मारा

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हां मंगलवार देर रात आईपीएस अपर्णा गुप्ता ने 150 पुलिस वालों की टीम के साथ रेड लाइट एरिया में छापा मारा। यह कार्रवाई दो दिन चली, जिसमें 26 महिलाएं बरामद की गईं। नेपाल, बंगाल समेत कई राज्यों के लड़के-लड़कियां मिले।
– आगरा के कश्मीरी बाजार स्थित रेडलाइट एरिया में एक एनजीओ का सदस्य ग्राहक बनकर गया। उससे पश्चिम बंगाल की एक नाबालिग ने अपने परिजनों को फोन करने की गुजारिश की, जिसके बाद उसने फैमली से पूरी आपबीती बताई।
– लड़की का किडनैप होने की रिपोर्ट डेढ़ महीने पहले बंगाल में लिखाई गई थी। लड़की ने बताया- उसके प्रेमी ने ही उसे यहां बेचा।
– जानकारी मिलते ही लड़की के परिजन मंगलवार (23 मई) को बंगाल पुलिस को लेकर आगरा आ गए। एसपी सिटी ने इस मामले में कार्रवाई की जिम्मेदारी ट्रेनी आईपीएस अपर्णा सिंह को सौंपी ।
– इसके बाद अपर्णा गुप्ता ने 150 पुलिस वालों की टीम के साथ रेड लाइट एरिया में छापा मारा, जहां से 11 लड़कियां, 5 लड़के अरेस्ट किए गए। इसके अलावा 4 नाबालिग लड़कियों को तहखाने का ताला तोड़कर रेस्क्यू किया गया। बुधवार को भी 11 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है।
इंजेक्शन के जरिए बढ़ाए जाते हैं हारमोंस
– अपर्णा गुप्ता ने बताया, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम, एंटी रोमियो की महिला सिपाही, सर्विलांस एसओजी और कई थानों की फोर्स समेत करीब 150 पुलिस कर्मियों की सहायता से ऑपरेशन को सफल बनाया गया।
– कम उम्र की लड़कियों को यहां लाकर पेन किलर और हार्मोन के इंजेक्शन दिए जाते थे, इससे इनका शरीर जल्दी डेवेलव हो जाता है। धीरे-धीरे उन्हें इन इंजेक्शन्स की आदत हो जाती है और वो इस धंधे से निकल नहीं पाती हैं।
– रेड में पुलिस को भारी तादात में आपत्त‍िजनक सामान और पेन किलर इंजेक्शन मिले हैं। इसके अलावा रेड लाइट रेरिया के हर घर में ढेर सारी शराब की खाली बोतलें पाई गई हैं।
– ऑपरेशन की भनक लगते ही देह व्यापारियों ने इलाके की लाइट काट दी। लेकिन पुलिस ने टॉर्च के दम पर चप्पे-चप्पे को खंगाला। पुलिस ने अलग-अलग तहखानो़ं से तस्करी के जरिए लाइ गई बंगाल की चार लड़कियों को बरामद किया।
माहौल देख तमतमा गई थी आईपीएस
– आईपीएस अपर्णा गुप्ता ने बताया, जब तहखाने में जानवरों की तरह कैद लड़कियां दिखाई दीं, तो वो उन्हें बहुत गुस्सा आया। हालांकि ज्यादातर महिलाएं वहां अपनी मर्जी से थीं और करीब बीस-बीस साल से इस धंधे से जुड़ी हुई थीं।
ताजमहल की नींव के साथ ही शुरू हुआ था बाजार
– इतिहासकारों की मानें तो ताजमहल की नींव डालते ही मुगलों ने बेड़ि‍या (नट) जाती के लोगों को यहां बसाया था। ये लोग उस समय काम के बाद थके मजदूरों को नाच-गाना दिखाकर बहलाया करते थे। ज्यादातर मजदूर अकेले थे, इसलिए कुछ बेड़िया परिवारों ने देह व्यापार का काम भी शुरू कर दिया। उस समय से अब तक यहां ये काम होता रहा है।
– मुंबई में बार बंद होने के बाद यहां से मानव तस्करी कम हुई थी, क्योंकि काफी महिलाएं अपनी मर्जी से यहां आ गई थीं। लेकिन अब ज्यादा पैसे के लिए बाहर से छोटी उम्र की लड़कियां तस्करी के जरिए लाई जाती हैं।
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