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मुलायम सिंह यादव और सुमित्रा महाजन के बीच नोकझोंक

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मुद्दा सदन की कार्यवाही चलाने को लेकर था। लोकसभा में सोमवार को मुलायम सिंह यादव और सुमित्रा महाजन के बीच नोकझोंक हो गई। हुआ यूं कि शून्यकाल में वाईएसआर कांग्रेस के सदस्य आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पर आसंदी के सामने नारेबाजी कर रहे थे। इसी दौरान सपा सुप्रीमो खड़े हुए और स्पीकर से कहा, ”आपसे अगर सदन नहीं संभल रहा था तो हमें बुला लेंती।” अगले ही पल स्पीकर ने जवाब दिया- कैसे सदन चलाना है, किसी से सीखने की जरुरत नहीं।
– स्पीकर ने कहा, ”कमेटी तय करती है कि सदन में कब क्या कार्यवाही होगी। सदन में उठने वाले मसलों पर किसी दल के क्या विचार या सुझाव हैं यह जानने के लिए राजनीतिक दलों की बैठक बुलाने की व्यवस्था है।
– ”ऐसे मामलों में सदन के भीतर किसी दल या नेता की मदद लेने की व्यवस्था नहीं है।”

– बाद में अध्यक्ष ने जब मुलायम की बात हंसी में टालने की कोशिश की तो मुलायम सिंह नाराज हो गए।
– उन्होंने कहा, “आप हंसी में हमारी बात को टाल रही हैं। लोकतंत्र बातचीत से चलता है। बड़े-बड़े स्पीकर देखे हैं हमने।”
– उन्होंने सदन की कार्यवाही चलाने के स्पीकर के तौर तरीकों पर सवाल उठाए।
– इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने नाराजगी के साथ कहा कि आप इस प्रकार बात मत कीजिए। मैं नियमों का अनुसरण कर रही हूं जो स्वयं सदन ने बनाए हैं।”

  – मुलायम स्पीकर के जवाब से नाखुश दिखे।
– उन्होंने कांग्रेसी मेंबर्स की ओर से किए जा रहे हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही जारी रखने पर नाराजगी जाहिर की।
– कहा- ”यह काेई तरीका नहीं है। यदि कोई सदस्य अपनी कोई जरूरी बात रखना चाहता है तो उसे बोलने का मौका दिया जाना चाहिए। अगर उनकी बातें जायज हैं तो मान लीजिए नहीं है तो उन्हें संतुष्ट करके शांत कीजिए।”
– इस पर स्पीकर ने कहा, ”सदन की एक व्यवस्था है कामकाज उसी के मुताबिक चलता है। कांग्रेसी सदस्यों को शून्यकाल के बाद अपनी बात कहने की अनुमति दी जाएगी। मना नहीं किया गया है।”
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