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यूपी में सात दिन का सस्पेंस खत्म  बीजेपी के फायरब्रांड लीडर  योगी आदित्यनाथ सीएम होंगे

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यूपी में सात दिन का सस्पेंस खत्म हुआ। बीजेपी के फायरब्रांड लीडर और हिंदू हार्डलाइनर इमेज वाले योगी आदित्यनाथ (44) यूपी के अगले के सीएम होंगे। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बीजेपी विधायक दल की लखनऊ में शनिवार शाम हुई मीटिंग में योगी के नाम पर मुहर लगी। आदित्यनाथ यूपी के पहले और बीजेपी के दूसरे भगवाधारी सीएम होंगे। योगी से पहले उमा भारती एमपी की सीएम रह चुकी हैं। विधायक दल की बैठक के बाद केशव मौर्य ने कहा कि सीएम के अलावा दो डिप्टी सीएम होंगे। इसके लिए मौर्य और दिनेश शर्मा का नाम पर मुहर लगाई गई है। चुनाव नतीजे आने के बाद राजनाथ सिंह से लेकर मनोज सिन्हा, केशव प्रसाद माैर्या और सिद्धार्थनाथ सिंह सीएम पद की दौड़ में थे। लेकिन सात दिन में सभी दौड़ से बाहर हो गए। बता दें कि DainikBhaskar.com ने एक पोल के जरिए रीडर्स से यूपी के सीएम को लेकर उनकी पसंद के बारे में जानना चाहा था। इस पोल में 1.5 लाख रीडर्स ने हिस्सा लिया था। इनमें से 43% लोगों ने कहा था- आदित्यनाथ को UP का CM बनाया जाना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ CM क्यों?
– पॉलिटिकल एक्सपर्ट श्रीधर अग्निहोत्री ने DainikBhaskar.com से बातचीत में वो 10 कारण बताए, जिसकी वजह से योगी यूपी के सीएम बनाए गए।
1) कट्टर हिंदूवादी चेहरा हैं। बीजेपी के फायर ब्रांड नेता हैं।
2) मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए नेता हैं। राम मंदिर का मुद्दा उठाते रहे हैं।
3) 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसा माना जा रहा है कि जैसा पोलराइजेशन इस विधानसभा चुनाव में हुआ है, 2019 में भी हो सकता है।
4) इस चुनाव में वेस्ट यूपी से लेकर पूर्वांचल तक योगी आदित्यनाथ ने जमकर प्रचार किया। माना जा रहा है कि इससे बीजेपी को भारी जीत में काफी फायदा हुआ।
5)बीजेपी को जो बहुमत मिला है, उसमें हिंदुत्व का एजेंडा ही कारगर रहा है।
6)आदित्यनाथ पर करप्शन का कोई आरोप नहीं है।
7) योगी की कोई लामबंदी नहीं है। उनके साथ गुटबंदी जैसी कोई चीज नहीं है।
8) पूर्वांचल में अच्छी पकड़ रखते हैं जहां मोदी-राजनाथ-अमित शाह की सबसे ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं।
9) गोरखपुर से 5 बार सांसद रहे हैं।
10)आरएसएस के करीबी माने जाते हैं। इसलिए उनके नाम पर आसानी से मुहर लगी।
योगी आदित्यनाथ के लिए क्या होंगी चुनौतियां?
– डेवलपमेंट

केंद्र सरकार की योजनाएं जैसे सुकन्या योजना, जनधन योजना और उज्जवला योजना को सही तरीके से लागू करना, ताकि इसका सही लाभ लोगों तक पहुंच सके।
– नौकरशाही
इस पर लगाम लगाना होगा। किसी तरह का कोई घपला न हो।
– हिंदुत्व की उम्मीदें
योगी आदित्यनाथ को हिंदुत्व के मुद्दे से जुड़ी उम्मीदों जैसे गोहत्या रोकने, हिंदुओं का पलायन रोकने और स्लॉटर हाउस बंद करने पर काम करना होगा।
– मुसलमानों का बुरा न हो
मुसलमानों के मुद्दे पर भी योगी को ध्यान देना होगा, ताकि उन्हें ये न लगे कि उनका नुकसान हो रहा है। मुसलमान असुरक्ष‍ित महसूस न करें, इसका ध्यान भी योगी को रखना होगा।
– सबका साथ
अति पिछड़ा, दलित समेत सभी वर्ग को साथ लेकर चलने की चुनौतियां भी होंगी, क्योंकि अब वे पूरे प्रदेश का नेतृत्व करेंगे।
योगी आदि‍त्यनाथ के सीएम बनने से कैसे हो सकती है दिक्कत?
– योगी को एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपीरिएंस नहीं है। ब्यूरोक्रेसी गुमराह कर सकती है। उनका वीएचपी से ताल्लुक है। मठ मंदिर से आए हैं। उन पर साधु-संन्यासी हावी हो सकते हैं।
– उन पर ठाकुरवादी होने का आरोप लगता रहा है। अति पिछड़े और अन्य कास्ट के लोग नाराज हो सकते हैं। पार्टी के दूसरे नेताओं के सपोर्टर्स नाराज हो सकते हैं। गुटबाजी हो सकती है।
– वि‍वादि‍त बयानों को दोहराते हैं तो राजनीति‍क अव्यवस्था पैदा हो सकती है।
पढ़ें लाइव अपडेट्स…
06:00 PM- लोकभवन में बीजेपी विधायक दल की बैठक शुरू।
05:45 PM- मीडिया के सवालों पर केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि बैठक खत्म होने तक इंतजार करें।
05:25 PM- VVIP गेस्ट हाउस में वेंकैया नायडू, योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्या के बीच अहम बैठक खत्म हुई। भूपेंद्र यादव, आेम माथुर और सुनील बंसल भी मीटिंग में शामिल थे। ये सभी लोकभवन की ओर रवाना हुए।
05:05 PM- लोकभवन से कुछ ही दूरी पर मौजूद VVIP गेस्ट हाउस में वेंकैया नायडू अहम नेताओं के साथ मीटिंग कर रहे हैं। बैठक में योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्या शामिल हैं। नायडू को बीजेपी विधायक दल की मीटिंग के लिए आलाकमान ने सेंट्रल ऑब्जर्वर बनाया है।
04:50 PM- सुबह तक सीएम पद की रेस में आगे रहे मनोज सिन्हा वाराणसी से लखनऊ नहीं पहुंचे। उनके दिल्ली ही लौट जाने की खबर आई।
04:46 PM- लखनऊ में योगी आदित्यनाथ की वेंकैया नायडू के साथ बंद कमरे में मीटिंग हुई।
04:45 PM- मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि सीएम पद की रेस में मनोज सिन्हा पीछे हो गए हैं। अभी योगी आदित्यनाथ का नाम सबसे आगे चल रहा है।
04:30 PM-केशव प्रसाद मौर्या दिल्ली से लौटकर लखनऊ पहुंचे। मीडिया के सवालों पर उन्होंने कहा कि विधायक दल की बैठक होने तक इंतजार करें।
04:30 PM- लखनऊ के कई जगह होर्डिंग्स नजर आ रहे हैं। राजनाथ स‍िंह, केशव प्रसाद मौर्या, स्वतंत्र देव सिंह, दिनेश शर्मा, मनोज सिन्हा, योगी आदित्यनाथ को सीएम के चेहरे के तौर पर दिखाते हुए बीजेपी की जीत पर बधाई दी गई है।
04:20 PM- कई नए विधायकों को सचिवालय के सुरक्षाकर्मियों ने अंदर जाने से भी रोक दिया। इन विधायकों को पता नहीं था क‍ि मीटिंग कहां होनी है।
04:15 PM- पहली बार विधानसभा पहुंचे बीजेपी विधायक विधानभवन को आश्चर्य भरी नजरों से देख रहे हैं। कई विधायकों ने वहां सेल्फी ली। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के कुल 325 विधायकों में से सिर्फ 10 से 12 विधायक पुराने हैं, जो बीजेपी विधानमंडल दल के पुराने ऑफिस में बैठे हैं।
04:00 PM- इस बीच अमेठी की रानी और संजय सिंह की पत्नी गरिमा सिंह लोकभवन पहुंची हैं। यहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें मंत्री बनने की कोई लालसा नहीं है। पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे अच्छे से निभाऊंगी। बता दें कि गरिमा सिंह ने अमेठी से सपा के कद्दावर नेता गायत्री प्रसाद प्रजापति को हराया था।
43% लोगों ने कहा था- आदित्यनाथ को बनाया जाना चाहिए UP का CM
यूपी के चुनाव नतीजे सामने आने के बाद 12 से 14 मार्च के बीच दो फेज में पोल चलाया था। इसमें रीडर्स से पूछा गया था कि आपके हिसाब से कौन हो सकता है UP का CM कैंडिडेट? पोल में 1,51,734 रीडर्स ने हिस्सा लिया था।
– रीडर्स से पूछा गया था कि राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, केशवप्रसाद मौर्या, मनोज सिन्हा, डाॅ. दिनेश शर्मा, स्वतंत्रदेव सिंह, डाॅ. महेश शर्मा और सुरेश खन्ना में से कौन सीएम बन सकता है?
इस तरह आए  POLL के नतीजे
– राजनाथ सिंह : 32%
– योगी आदित्यनाथ : 43%
– केशवप्रसाद मौर्या : 15%
– मनोज सिन्हा : 10%
इन चेहरों पर होती रही चर्चा
1) केशवप्रसाद मौर्या : शाह ने दिए थे अलग संकेत
– अमित शाह ने कहा था कि अगला सीएम माैर्य की पसंद का होगा। इससे माना गया कि अब मौर्य भी दौड़ से बाहर हैं। लेकिन मौर्य ऐसा नहीं मान रहे थे। वे कहते रहे कि विधायक दल की बैठक का इंतजार करें।
– मौर्या मोदी और अमित शाह, दोनों की पसंद हैं। वे 2012 में विधानसभा सदस्य चुने जाने के बाद 2014 का लोकसभा चुनाव फूलपुर से जीते। इसके बाद उन्हें यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
– मौर्या संघ के अलावा विहिप और बजरंग दल जैसे संगठनों में भी काम कर चुके हैं। वे विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल के काफी नजदीकी हुआ करते थे।
2) मनोज सिन्हा : खुद को रेस से बाहर बताया
– केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा पूर्वांचल के पॉपुलर फेस हैं। गाजीपुर से तीन बार से सांसद सिन्हा सिविल इंजीनियरिंग से एमटेक हैं।
– संगठन में 1989 से 1996 तक राष्ट्रीय परिषद् के सदस्य रह चुके हैं। गृह मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी हैं। पीएम रेल राज्य मंत्री के तौर पर सिन्हा के काम की तारीफ भी कर चुके हैं।
– इस बीच शनिवार को मनोज सिन्हा ने एक बार फिर कहा कि वे सीएम बनने की रेस में नहीं हैं। इस तरह का मेरा कोई दावा भी नहीं था। पता नहीं क्यों मीडिया अनावश्यक रूप से ये बातें कर रहा है।
3) राजनाथ सिंह : अगला सीएम बनने की अटकलों को फालतू करार दिया
– राजनाथ अटल बिहारी वाजपेयी के संसदीय क्षेत्र रहे लखनऊ से सांसद हैं और केंद्रीय गृह मंत्री हैं। पहले भी यूपी के सीएम रह चुके हैं। संघ में भी उनकी पकड़ है। उन्हें संगठन और सत्ता, दोनों का काफी एक्सपीरियंस है। वे प्रदेश अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ऐसा माना जा रहा है कि सवर्णों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी उन्हें सीएम के तौर पर केंद्र से यूपी भेज सकती है।
– पिछले दिनों जब उनसे पूछा गया कि क्या कि वे सीएम पद की रेस में हैं तो उन्होंने कहा, ”क्या फालतू बात है।”
4) योगी आदित्यनाथ : हिंदू हार्डलाइनर की छवि
– यूपी में योगी आदित्यनाथ बीजेपी के फायर ब्रांड नेता के तौर पर जाने जाते हैं। पहले वे पूर्वांचल तक ही सीमित थे, लेकिन इस चुनाव से पहले पार्टी ने उनसे वेस्ट यूपी में भी जमकर प्रचार कराया है। उनकी हिंदू हार्डलाइनर इमेज है।
– गोरखपुर से सांसद आदित्यनाथ (44) का नाम चुनाव नतीजे आने के बाद सीएम पद की रेस में काफी पीछे थे। लेकिन शनिवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक शुरू होने से पहले उनका नाम सीएम की दौड़ में अचानक से आगे हो गया।
5) सिद्धार्थनाथ सिंह: क्लीन इमेज
– सिद्धार्थनाथ सिंह इलाहाबाद की पश्चिमी विधानसभा से विधायक हैं। उन्हें 14 मार्च की शाम को इलाहाबाद से सीधे दिल्ली आने के लिए कहा गया।
– वे लाल बहादुर शास्त्री के पोते हैं। वो बीजेपी में पिछले 14 साल से हैं। बंगाल में पार्टी के प्रभारी हैं। वहां लोकल बॉडी इलेक्शन में बीजेपी का परफॉर्मेंस सुधार चुके हैं।
6) दिनेश शर्मा: लोकसभा चुनाव की टीम में रहे
– बीजेपी के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट हैं। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान नेशनल मेंबरशिप इंचार्ज बनाया गया। इस वक्त शर्मा को गुजरात का एडिशनल चार्ज दिया गया है। वो लखनऊ के लगातार दो बार मेयर रहे हैं। लखनऊ यूनिवर्सिटी से उन्होंने डबल पीएचडी की है। जनता में उनकी इमेज साफ और दो टूक बात कहने वाली है।
7) सतीश महाना: सात बार से विधायक
– बीजेपी के 6 बार से लगातार विधायक रहे सतीश महाना इस बार भी यानी 7वीं बार विधायक बने हैं। कारोबारियों में महाना की अच्छी पकड़ है। महाना को भी 14 मार्च को अमित शाह की तरफ से तुरंत आने को कहा गया। संगठन में जबरदस्त पकड़ होने के साथ-साथ पॉपुलर फेस हैं।
शपथ ग्रहण समारोह के टाइम में बदलाव
– गवर्नर राम नाइक ने शुक्रवार को लखनऊ में कहा था कि यूपी के नए सीएम कैबिनेट के सहयोगियों के साथ 19 मार्च को शाम 5 बजे कांशीराम स्मृति उपवन में शपथ लेंगे।
– हालांकि, बाद में समारोह के टाइम में बदलाव किया गया और अब शपथ ग्रहण समारोह रविवार दोपहर 2.15 बजे होगा। इसमें नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे।
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