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शीला दीक्षित ही यूपी में कांग्रेस की सीएम कैंडिडेट होंगी

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15 साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित ही यूपी में कांग्रेस की सीएम कैंडिडेट होंगी। 27 साल बाद शीला की यूपी के पॉलिटिक्स में एंट्री होगी। गुरुवार को गुलाम नबी आजाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनके नाम का एलान किया। इस मुद्दे पर आजाद और राज बब्‍बर की दिल्‍ली में मीटिंग हुई थी। कहा जा रहा है कि 2017 के यूपी इलेक्शन में 11 फीसदी ब्राह्मणों को लुभाने के लि‍ए कांग्रेस शीला को परफेक्‍ट चेहरा मान रही हैं।
– यूपी कांग्रेस के इलेक्शन स्ट्रैटजिस्ट प्रशांत किशोर 403 वि‍धानसभा सीटों में से पार्टी को कम से कम 100 सीटें दिलाना चाहते हैं।
– ऐसे में, सपा-बसपा और बीजेपी पर दबाव बनाने के लि‍ए शीला दीक्षि‍त का नाम कांग्रेस को सबसे असरदार लगा।
शीला का यूपी से पुराना नाता
– शीला दीक्षित का ससुराल यूपी के उन्‍नाव जि‍ले में है।
– वे 1984 से लेकर 1989 तक यूपी की कन्‍नौज सीट से सांसद और केंद्र में मंत्री रही हैं।
– पार्टी का चेहरा बनने से पार्टी ब्राह्मण वोटों को अपनी तरफ कर सकती है।
– 1998 में कांग्रेस ने उन्हें पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया था। चुनाव हारने के बाद उन्हें प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंप दी गई।
– 1998 के विधानसभा चुनाव से शीला दीक्षित ने जीत का जो सिलसिला शुरू किया, वह 2008 तक जारी रहा।
– 2013 में आम आदमी पार्टी (AAP) की आंधी में कांग्रेस का यह कि‍ला ढह गया।
– 2013 में चुनाव हारने के बाद पार्टी ने उन्‍हें केरल का गवर्नर बना दि‍या था।
– 2014 में बीजेपी की सरकार केंंद्र में बनने के बाद शीला ने गवर्नर की पोस्ट से इस्‍तीफा दे दि‍या था।
ब्राह्मण कार्ड खेल रही है कांग्रेस?
– यूपी कांग्रेस के लि‍ए स्‍ट्रैटजी तैयार कर रहे प्रशांंत कि‍शोर ने हाईकमान को यूपी चुनाव में ब्राह्मण कार्ड खेलने की राय दी थी।
– हालांकि, पार्टी नेता अभी इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं।
– दरअसल, प्रदेश में तीन दशक पहले तक ब्राह्मण वोट बैंक कांग्रेस का कैडर माना जाता था।
– इस कारण पार्टी का परफॉर्मेंस भी चुनावों में अच्छा रहता था। जब से यह वोट बैंक बीजेपी से जुड़ा, तब से पार्टी की स्थिति खराब होती गई।
– यूपी में दलित वोट बैंक बसपा का माना जाता है। इसके अलावा, कई छोटी पार्टियों का भी जातिगत जनाधार अच्छा है।
– बीजेपी भी दलित कार्ड खेलना चाहती है, इसलिए कांग्रेस उसके तोड़ के रूप में ब्राह्मण चेहरा लाना चाहती है।
– यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक अच्छा-खासा है। अगर यह पार्टी के पास लौट आया तो सीटों की संख्या बदलने में आसानी होगी।
कांग्रेस के यूपी प्रेसिडेंट बने हैं राज बब्‍बर
– बीते 12 जुलाई को राज बब्‍बर को यूपी कांग्रेस का नया चीफ बनाया गया था।
– उनकी टीम में इमरान मसूद, राजाराम पाल, भगवान प्रसाद चौधरी और राजेश मिश्रा को वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया।
– बब्बर लंबे समय से पार्टी से जुड़े हैं और अभी राज्यसभा सांसद हैं।
– इसके अलावा वे दो बार यूपी से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं।
– उन्होंने 2009 में हुए लोकसभा उप चुनाव में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को हराया था।
– ऐसे में, राज बब्बर के कद पर पार्टी में किसी को कोई संदेह नहीं था।
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