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समाजवादी पार्टी का इलेक्शन सिंबल ‘साइकिल’ अखिलेश यादव को मिल गया

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समाजवादी पार्टी का इलेक्शन सिंबल ‘साइकिल’ अखिलेश यादव को मिल गया। इलेक्शन कमीशन ने सोमवार शाम इसकी घोषणा की। पार्टी का नाम भी मुलायम सिंह को नहीं मिला। वह अखिलेश के पास ही होगा। वहीं, चुनाव आयोग का फैसला आने से पहले सपा के लखनऊ हेडक्वार्टर में अखिलेश और मुलायम, दोनों के ही नाम की राष्ट्रीय अध्यक्ष वाली नेमप्लेट लग गई। बता दें कि 8 जनवरी को मुलायम ने अखिलेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नरेश उत्तम के प्रदेश अध्यक्ष वाली नेमप्लेट हटवा दी थी।
इलेक्शन कमीशन ने क्यों फ्रीज नहीं किया साइकिल का सिंबल?
– चुनाव आयोग ने इलेक्शन सिंबल्स (रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट) ऑर्डर 1968 के पैरा 15 का हवाला दिया।
– यह पैरा 15 किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल से अलग हुए गुट या उसके बगावती गुट से जुड़ा है।
– यह नियम कहता है, ”अगर चुनाव आयोग दोनों पक्षों की दलीलों से संतुष्ट हो जाता है तो वह या तो संबंधित दल के किसी एक गुट को मान्यता देता है या फिर दोनों की मान्यता नहीं देता।”
– इस नियम के हिसाब से चुनाव आयोग ने अखिलेश गुट को मान्यता दी और साइकिल के सिंबल को फ्रीज नहीं किया।
समाजवादी पार्टी के बारे में आयोग ने क्या कहा?
– आयोग ने कहा, ”अखिलेश यादव की अगुआई वाला गुट ही समाजवादी पार्टी है। इसी गुट को पार्टी के नाम और उसके सिंबल साइकिल का इस्तेमाल करने का हक है।”
क्या है आदेश के मायने
– पूर्व जज चन्द्र भूषण पाण्डेय के मुताबिक, “अगर इलेक्शन कमीशन ने इलेक्शन सिम्बल्स (रिजर्वेशन एंड एलोटमेंट ) आर्डर 1968 के पैरा 15 के तहत यह आर्डर दिया है तो यह माना जाएगा कि कमीशन ने पार्टी में बंटवारे की दलील नहीं मानी। कमीशन ने माना है कि पार्टी का बहुमत अखिलेश यादव के साथ है।”
– “कमीशन ने ये भी माना कि 1 जनवरी को जो विशेष अधिवेशन बुलाया गया था वह सही था। सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश को माना गया है। मुलायम सिंह यादव को पार्टी का मार्गदर्शक माना गया है।”
पार्टी सिंबल को लेकर लड़ाई क्यों थी?
– पार्टी से बाहर किए गए रामगोपाल यादव ने 1 जनवरी को लखनऊ में सपा का राष्‍ट्रीय अधिवेशन बुलाया। वहां अखिलेश यादव भी मौजूद थे।
– अधिवेशन में प्रस्ताव पारित कर अखिलेश को पार्टी का नेशनल प्रेसिडेंट बनाया गया। मुलायम को समाजवादी पार्टी का संरक्षक बनाया गया।
– शिवपाल यादव को पार्टी के स्टेट प्रेसिडेंट के पद से हटाया गया और अमर सिंह को पार्टी से बाहर किया गया।
– इससे पहले, अखिलेश और मुलायम ने यूपी चुनाव के मद्देनजर विधानसभा कैंडिडेट्स की अलग-अलग लिस्‍ट जारी की थी।
– इसके बाद दोनों ने पार्टी की मीटिंग बुलाई। मुलायम की मीटिंग में महज 17 विधायक पहुंचे, जबकि अखिलेश से मिलने 207 विधायक पहुंचे थे।
– इसके बाद अखिलेश गुट ने पार्टी पर अपना कंट्रोल होने का दावा किया। दोनों गुट साइकिल के निशाने पर दावा करते हुए कमीशन तक पहुंचे।
मुलायम गुट की कौन-सी दलीलें काम नहीं आईं?
– मुलायम सिंह गुट का कहना था कि चूंकि रामगोपाल पार्टी से बर्खास्त हैं, इसलिए वे पार्टी अधिवेशन नहीं बुला सकते। अधिवेशन असंवैधानिक था।
– अखिलेश गुट की तरफ से कहा गया कि रामगोपाल को पार्टी में बहाल करने के बाद अधिवेशन बुलाया गया था। अखिलेश के साथ 90% विधायक थे, जबकि मुलायम गुट के साथ काफी कम विधायक हैं।
रामगोपाल ने क्या कहा?
– रामगोपाल बोले- हम इलेक्शन कमीशन के फैसले का स्वागत करते हैं। हम सपा के सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं से आह्वान करते हैं कि वो मैदान में जाएं। दो दिन में कैंडिडेट्स की सूची जारी की जाएगी।
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