17 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग

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 4851 सांसद-विधायक इसके लिए वोटिंग करेंगे। एनडीए कैंडिडेट रामनाथ कोविंद और यूपीए की मीरा कुमार के बीच मुकाबला है। 20 तारीख को नतीजे आ जाएंगे। हालांकि, मौजूदा हालात में कोविंद का प्रेसिडेंट चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। कोविंद प्रेसिडेंट चुने गए तो देश को नौ पीएम देने वाले यूपी से वे पहले राष्ट्रपति होंगे। वहीं, मीरा कुमार चुनी जाती हैं तो वे प्रतिभा पटिल के बाद दूसरी महिला राष्ट्रपति होगी। दोनों में से कोई भी चुना जाए, देश को केआर नारायणन के बाद दूसरा दलित राष्ट्रपति मिलना तय है।
1) कौन चुनता है राष्ट्रपति?
लोकसभा सांसद: कुल 543, सभी वोट दे सकेंगे।
राज्यसभा सांसद: कुल 233, 231 वोट दे सकेंगे।
31 विधानसभा के विधायक: कुल 4120, वोट दे सकेंगे 4077।
2) कैसे निकालते हैं वोट वैल्यू?
– राष्ट्रपति चुनाव में डाले जाने वाले वोट की वैल्यू तय होती है। इसमें राज्य की आबादी का अहम रोल होता है। विधायकों और सांसदों की वोट वैल्यू निकालने के लिए दो अलग-अलग फॉर्मूले का इस्तेमाल किए जाते हैं।
विधायक: इनके वोट की वैल्यू तय करने के लिए कुल विधायकों की संख्या में 1000 का मल्टीप्लाई किया जाता है। फिर इससे राज्य की 1971 में रही कुल आबादी को डिवाइड कर दिया जाता है। देशभर के विधायकों के वोटों की टोटल वैल्यू 5,43,218 है। विधायकों की संख्या बीच में कम होने पर किसी राज्य में एक विधायक की वोट वैल्यू नहीं बदलती। जैसे- मध्य प्रदेश की 1971 में कुल आबादी 30,017,180 थी। इसलिए मध्य प्रदेश में एक विधायक की वोट वैल्यू 30,017,180/230X1000 = 30,017,180/2310000 = 131 है।
सांसद: इनके वोट की वैल्यू निकालने के लिए सभी विधायकों की वोट वैल्यू को सांसदों की संख्या से डिवाइड कर देते हैं। यानी विधायकों की टोटल वैल्यू 5,43,218 को 776 से डिवाइड करेंगे। इससे एक सांसद की वोट वैल्यू 708 निकलेगी। सांसदों की संख्या बीच में कम होने पर यह वोट वैल्यू नहीं बदलती।
3) विधायकों-सांसदों के वोट की अभी कितनी वैल्यू?
लोकसभा: 543 सांसद वोट देने के लिए एलिजिबल हैं। हर सांसद की वोट वैल्यू 708 है। इसलिए सभी सांसदों की कुल वोट वैल्यू 543×708= 3,84,444 होगी।
राज्यसभा: 233 सांसद, लेकिन 2 वोट नहीं दे पाएंगे। इसलिए 231 सांसद वोट देने के लिए एलिजिबल हैं। यहां भी हर सांसद की वोट वैल्यू 708 है। इसलिए सभी सांसदों की कुल वोट वैल्यू 231×708= 1,63,548 होगी।
– देशभर की 31 विधानसभा के 4120 विधायक हैं, लेकिन इनमें से कुछ राज्यों में विधायकों को अयोग्य किए जाने के बाद 4076 विधायक वोट देने के लिए एलिजिबल हैं। हर राज्य में इनकी वोट वैल्यू अलग-अलग है। सभी विधायकों की कुल वोट वैल्यू 5,43,218 है। (मध्य प्रदेश से नरोत्तम और चित्रकूट विधायक प्रेम सिंह का वोट हटाकर)
– बता दें कि 12 नॉमिनेटेड राज्यसभा मेंबर्स और लोकसभा में दो एंग्लो-इंडियन कम्युनिटी के नॉमिनेटेड मेंबर्स भी वोट नहीं डाल सकेंगे।
4) कितने वोट जरूरी?
– प्रेसिडेंट बनने के लिए जरूरी है कि कैंडिडेट को सभी सांसदों और विधायकों की कुल वोट वैल्यू के 50% से एक वोट ज्यादा मिले।
– टोटल वोट वैल्यू 3,84,444+1,63,548+5,43,218= 10,91,210 होगी। यानी प्रेसिडेंट बनने के लिए 10,91,210/2+1= 5,45,606 वोट वैल्यू की जरूरत होगी।
5) कौन किसके साथ?
कोविंद की जीत पक्की मानी जा रही है, क्योंकि…
– काेविंद को उम्मीदवार बनाने का एलान होने से पहले एनडीए के पास टोटल वोट पर्सेंटेज 48.10% था।
– कोविंद का नाम सामने आते ही इन दलों ने एनडीए को सपोर्ट दे दिया:
TRS: 1.99%
AIADMK: 5.39%
YSR कांग्रेस: 1.53%
JDU: 1.89%
BJD: 2.99%
– इस तरह अब एनडीए के पास इतने वोट हैं: 61.89%
मीरा की दावेदारी कैसे हुई कमजोर?
– कोविंद के एलान से पहले अगर सभी अपोजिशन पार्टियां एक हो जातीं तो टोटल वोट 5,68,148 होता यानी यूपीए के पास करीब 51.90% वोट होते।
– मीरा कुमार को कैंडिडेट बनाने के बाद यूपीए को बीएसपी ने सपोर्ट कर दिया है। मायावती कह चुकी थीं कि कोई मजबूत दलित कैंडिडेट मिलने पर वो उसे सपोर्ट करेंगी।
– एसपी में फूट है। मुलायम-शिवपाल कोविंद के फेवर में हैं। अखिलेश मीरा कुमार के फेवर हैं।
– मीरा को AAP का भी सपोर्ट मिल सकता है।
यूपीए के पास अब इतने वोट हैं
SP: 2.36%
BSP: 0.74%
AAP: 0.82%
INDL: 0.38%
मौजूदा UPA: 50.01%
– इस तरह अब एनडीए के पास इतने वोट हैं: 54.31%
रामनाथ कोविंद v/s मीरा कुमार
रामनाथ कोविंद: यूपी में जन्मे, बिहार के गर्वनर रहे। सादगीभरी छवि, कानून के जानकार, संविधान की समझ, दलित चेहरा। दो चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
मीरा कुमार: बिहार में जन्मीं मीरा साफ-सुथरी छवि, कानून की जानकार, संविधान की जानकारी (लोकसभा स्पीकर रहीं)। विदेश नीति की जानकारी (इंडियन फॉरेन सर्विस में रहीं)। दलित चेहरा और पूर्व डिप्टी पीएम जगजीवन राम की बेटी। रामविलास पासवानऔर मायावती जैसे बड़े दलित लीडर्स को चुनाव में हरा चुकी हैं। करोलबाग से 3 बार MP भी रहीं।
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