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गैंगरेप के तीन दिन बाद शुक्रवार को सरकार एक्शन मोड में आई

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मंगलवार शाम 7 बजे हबीबगंज आरपीएफ थाने के पास कोचिंग से लौट रही युवती से गैंगरेप के तीन दिन बाद शुक्रवार को सरकार एक्शन मोड में आई। सीएम शिवराज सिंह चौहान के आदेश पर तीन टीआई और एक एसआई को सस्पेंड कर दिया गया। एमपी नगर सीएसपी को हटाकर पीएचक्यू अटैच किया गया। सीएम ने दोपहर 12 बजे मुख्य सचिव और डीजीपी के साथ आला अफसरों को तलब किया। वे डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला और डीआईजी संतोष सिंह पर नाराज हुए। डीजीपी से कहा- यह शर्मनाक है कि राजधानी में ऐसी घटना हुई। एफआईआर में भी देरी की गई, जबकि आपको तुरंत हरकत में आना चाहिए था। क्या अपराध पर ऐसा ही नियंत्रण है आपका? इस पर डीजीपी जवाब नहीं दे सके।

– सीएम ने इसके बाद कानूनी सुरक्षा और पुलिस की कार्यशैली पर भी नाराजगी जाहिर की। इस दौरान मुख्य सचिव बीपी सिंह, एडीजी इंटेलिजेंस, आईजी भोपाल योगेश चौधरी, सीएम के ओएसडी समेत अन्य अफसर मौजूद रहे।

– गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह बैठक में नहीं थे। सीएम सचिवालय के अफसरों ने बताया कि वे उप चुनाव के सिलसिले में क्षेत्र में हैं। हालांकि उनसे इस बारे में चर्चा हो गई है।

– सीएम ने बैठक खत्म होने के तुरंत बाद जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड करने और पीएचक्यू अटैच करने की कार्रवाई की।

– डीआईजी संतोष कुमार सिंह ने एमपी नगर थाने के एसआई आरएम टेकाम को गुरुवार को सस्पेंड कर दिया था।

जिम्मेदारों का सिर्फ सस्पेंशन

1. मोहित सक्सेना
टीआई जीआरपी, हबीबगंज
– कारण : छात्रा की मां से तीन घंटे तक बहस करने का आरोप, एफआईआर दर्ज करने में की देरी।

2. संजय सिंह बैस
टीआई, एमपी नगर

– कारण : थाने का बेहतर सुपरविजन न करना, इसी कारण एसआई ने घटना के बारे में उन्हें बताया ही नहीं।

3. कुलवंत सिंह सीएसपी : थाना स्टाफ पर नियंत्रण
– नहीं, लापरवाह स्टाफ ने उन्हें घटना की जानकारी ही नहीं दी।

4. रविंद्र यादव, टीआई हबीबगंज, कारण :

एफआईआर दर्ज करने में देरी का आरोप।

5. भवानी प्रसाद उइके एसआई जीआरपी, कारण :

बहस करते रहे, एफआईआर दर्ज नहीं की।

यह है प्रावधान…

दुष्कर्म और छेड़छाड़ जैसे मामलों में एफआईआर लिखना अनिवार्य, न लिखने वाले को 2 साल तक सजा

– सेक्शन- 166 (क)… धारा 376, 326, 354, 509 के अधीन दंडनीय संज्ञेय अपराध के संबंध में दी गई किसी सूचना को दर्ज न करने वाले अफसर के खिलाफ सेक्शन 166 (क) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसमें कम से कम छह माह के कठोर कारावास और अधिकतम दो साल तक कारावास व जुर्माने की सजा का प्रावधान है।

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