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टीपू सुल्तान अंग्रेजों से लड़ते हुए बहादुरों की तरह मरे- राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को कहा कि टीपू सुल्तान अंग्रेजों से लड़ते हुए बहादुरों की तरह मरे। कोविंद ने कहा, “टीपू सुल्तान ने ही अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में पहली बार मैसूर रॉकेट के इस्तेमाल की शुरुआत की।” बता दें कि मोदी कैबिनेट के मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने टीपू सुल्तान को हत्यारा बताया था। – कर्नाटक सरकार 10 नवंबर को टीपू सुल्तान की जयंती मनाएगी। टीपू सुल्तान पर रामनाथ कोविंद ने कर्नाटक लेजिस्लेटिव असेंबली और लेजिस्लेटिव काउंसिल के ज्वाइंट सेशन में बयान दिया। – उन्होंने कहा, “दोनों हाउस कर्नाटक की जनता की उम्मीदों और इच्छाओं को रिप्रेजेंट करते हैं। आप लोग कर्नाटक की जनता के आदर्शों, आशाओं, ऊर्जा और विविधता को भी रिप्रेजेंट करते हैं। विधानसभा वो जगह है, जहां मुद्दों पर चर्चा होती है, असहमति जताई जाती है और अंत में फैसला लिया जाता है।”
 मोदी के मंत्री ने लिखा था कर्नाटक सरकार को लेटर
नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कर्नाटक सरकार को लेटर लिखकर कहा था कि उन्हें टीपू सुल्तान की जयंती के प्रोग्राम्स में शामिल ना किया जाए। हेगड़े के मुताबिक- टीपू वास्तव में हत्यारा और बलात्कारी था। हेगड़े स्किल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री में राज्यमंत्री हैं।
कर्नाटक सीएम ने विरोध जताया था
– कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया ने कहा था- हेगड़े सरकार का हिस्सा हैं, उन्हें इस तरह का लेटर नहीं लिखना चाहिए था। जहां तक टीपू सुल्तान की बात है तो वो अंग्रेजों के खिलाफ चार जंग लड़े।

कौन था टीपू सुल्तान?

– टीपू 18वीं सदी में मैसूर का राजा था। उसके पिता का नाम हैदर अली था। कुछ इतिहासकार उसे ‘टाइगर ऑफ मैसूर’ भी कहते हैं। उसका पूरा नाम सुल्तान फतेह अली खान साहब था। दावा किया जाता है कि टीपू ही भारत में पहली बार रॉकेट टेक्नोलॉजी लाया।
– ब्रिटिश कंपनी ईस्ट इंडिया से उसका विवाद 1799 तक चलता रहा। इसी साल उसकी मौत भी हुई थी। 1750 से 1799 तक वो मैसूर पर राज करता रहा।
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