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नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर को स्वच्छता अभियान के 3 साल पूरे होने पर दिल्ली के विज्ञान भवन में स्पीच दी

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नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर को स्वच्छता अभियान के 3 साल पूरे होने पर दिल्ली के विज्ञान भवन में स्पीच दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के बारे में हमें ठीक से पता नहीं है। पुरुष तो अभी भी चौराहे पर खड़े हो जाते हैं, लेकिन टॉयलेट के लिए महिलाओं के तकलीफ झेलते हुए घर तक आना पड़ता है। इससे पहले मोदी ने राजघाट पर महात्मा गांधी और विजय घाट जाकरलालबहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि दी।
 – मोदी ने कहा, ”इसलिए स्वच्छता का एक ही तराजू मेरे दिमाग में है। पुरुषों को मैं पूछना चाहता हूं। मुझे इस प्रकार की भाषा के लिए माफ करें, लेकिन पुरुषों को जहां जगह मिलती है, वहां खड़े हो जाते हैं। लेकिन महिला ऐसा नहीं कर पाती। वह अपने शरीर का दमन करती रहती है और प्राकृतिक जरूरत के बावजूद खुले में ऐसा नहीं करतीं। जब तक ये नहीं सोचेंगे तब तक स्वच्छता की अहमियत नहीं समझ पाएंगे।”
– ”गांव की महिलाएं सुबह जल्दी उठकर जंगलों में प्राकृतिक कामों के लिए जाती हैं। डर रहता है, इसलिए पांच-छह सहेलियों के साथ जाती हैं। फिर अंधेरे तक वे इंतजार करती हैं। सोचिए, शरीर पर कितना दमन होता होगा। उस मां की क्या हालत होती होगी? अगर इतनी सी संवेदना भी हो तो स्वच्छता के बारे में जानने के लिए किसी टीवी की, किसी प्रधानमंत्री की, किसी राज्य सरकार की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये आपकी जिम्मेदारी का हिस्सा बन जाएगा। ”
– ”यूनिसेफ का आकलन है कि टॉयलेट ना होने से गरीब परिवार का स्वास्थ्य पर 50 हजार रुपए सालाना खर्च होता है। मैं जब से प्रधानमंत्री बना, मुझे कई लोगों से मिलने का मौका मिला। वे बहुत प्यार से कहते हैं कि मेरे लायक कोई सेवा हो तो बताइए। मैं भी प्यार से कहता हूं। ऐसा कीजिए, जरा स्वच्छता के लिए समय दीजिए ना… इसके बाद वे दोबारा नहीं आते। वे बढ़िया बायोडेटा लेकर मुझसे काम मांगने आते हैं। लेकिन फिर नजर नहीं आते। कोई काम छोटा नहीं होता। हम सभी हाथ लगा दें तो वह काम बड़ा हो जाता है।”
 और क्या बोले मोदी?
1. झेलने की कैपेसिटी बढ़ रहा हूं
– मोदी ने कहा, “क्योंकि ये दायित्व भी ऐसा है जिसे झेलना चाहिए। धीरे-धीरे मैं झेलने की अपनी कैपेसिटी भी बढ़ा रहा हूं। तीन साल बिना थके हम इस काम में लगे रहे, क्योंकि हम जानते थे कि महात्मा गांधी ने जो रास्ता चुना वो गलत हो ही नहीं सकता।”
2. मोदी को गाली देने के हजार विषय हैं
– “लोग कहते हैं कि मोदी का काम तो भाषण देना है। पानी कहां से आएगा, साबुन कहां से आएगा। …मोदी को गाली देने के हजार विषय हैं। मैं हर दिन कुछ न कुछ कहता हूं। उसका उपयोग करते रहो। लेकिन समाज के लिए मैं जो कहता हूं, उसकी आलोचना करने से पहले सोचें।”
3. चुनौतियां हैं लेकिन छोड़कर नहीं जा सकते
– “कई चुनौतियां हैं इसलिए देश को ऐसे ही रहने दिया जाए। चुनौतियां हैं इसलिए उन्हें चीजों को हाथ लगाया जाए, जिनमें जयकारा हो, वाहवाही हो।”
4. पहले सत्याग्रह था, अब स्वच्छाग्रह है
– ”स्वच्छता अभियान में अब तक जो सिद्धी मिली है, वह सरकार की है, ऐसा मेरा क्लेम नहीं है। यह उपलब्धि स्वच्छाग्रही देशवासियों की है। हमें स्वराज मिला। श्रेष्ठ भारत का संकल्प है स्वच्छता। अगर स्वराज के केंद्र में सत्याग्रह था तो श्रेष्ठ भारत के केंद्र में स्वच्छाग्रह है।”
5. मीडिया ने भी खुद को स्वच्छता अभियान से जोड़ा है
– नरेंद्र मोदी ने कहा, ”पांच साल पहले किसी स्कूल में बच्चे सफाई करते पाए जाते थे तो मीडिया की स्टोरी बनती थी। मां-बाप भी स्कूल में पहुंच जाते थे कि आप हमारे बच्चों से ये करवा रहे हैं। आज उल्टा हो गया है। बच्चे अपना स्कूल साफ करते हैं और पॉजिटव खबर बनती है। देश के प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने स्वच्छता अभियान से खुद को जोड़ा है। वे इसके लिए समय दे रहे हैं।”
6. मां के नजरिए से स्वच्छता को देखिए
– “जब तक आप इस अभियान को महिला के नजरिए से नहीं देखेंगे आपको इस अभियान की ताकत का अंदाज नहीं आएगा। एक अकेली मां है, जो सभी के घर से बाहर जाने के बाद कमर टूटने तक सफाई करती है। उस मां से पूछिए कि घर से बाहर जाने से पहले अगर हम चीजें जगह पर रखते हैं तो तुम्हें कैसा लगता है। वो कहती है, अब अच्छा लगता है।”
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