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पेट्रोल पंप और मार्केट में लगी लोगों की भीड़

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PM नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार, आतंकवाद, कालाधन और जाली नोटों के खिलाफ लड़ाई का ऐलान कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों आई स्कीम आय घोषणा योजना-2016 के तहत कई लोगों ने अपनी संपत्ति उजागर की थी। इसमें सिर्फ भोपाल से ही 2200 लोगों से 900 करोड़ रुपए का कालाधन बाहर आया था। इस स्कीम के तहत छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर रीजन में 3000 लोगों ने इस योजना का फायदा लेते हुए 1300 करोड़ रुपए उजागर किए थे। इस स्कीम का फायदा लेने में इंदौर तीसरे नंबर पर रहा था। इसके तहत इंदौर रीजन से 1000 लोगों ने अपनी इनकम डिक्लेयर करते हुए 600 करोड़ रुपए बाहर निकाले थे।
पेट्रोल पंप और मार्केट में लगी लोगों की भीड़
मोदी सरकार ने देश में 500 और 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए। सरकार का ये फैसला मंगलवार आधी रात से ही लागू हो गया। फैसला आते ही देशभर सहित भोपाल में भी हड़कंप मच गया है। हर कोई अपने पास रखे 500 और 1000 रुपए के नोटों को बदलने की फिराक में लगा हुआ है। मंगलवार देर रात से बुधवार तक शहर के पेट्रोल पंप और मार्केट में लोगों की खासी भीड़ देखने को मिल रही है।
-मीडिया की खबरों के मुताबिक सिर्फ मप्र में ही 5,00000 करोड़ से ज्यादा कालाधन है। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे देश में कालेधन की क्या स्थिति होगी।
-आयकर विभाग द्वारा पिछले 6 महीने के दौरान मारे गए छापों में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में करीब 225 करोड़ रुपए का कालाधन निकला था। अकेले भोपाल से करीब 100 करोड़ रुपए का कालाधन मिला था। विभाग ने करीब पांच करोड़ रुपए की संपत्ति को राजसात भी किया था।
-पिछले दिनों आयकर विभाग ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में 30 हजार से ज्यादा अमीरों की सूची तैयार की थी, जिनके पास हजारों-करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति मौजूद है।
-आयकर विभाग ने ऐसे काले कुबेरों को चार क्लास में बांटकर पी-1, पी-2, पी-3 और पी-4 का नाम दिया है। विभाग ने सभी से आर्थिक लेनदेन और प्रॉपर्टी के संबंध में जवाब मांगे हैं। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर विभाग जांच-पड़ताल, सर्वे और छापे की कार्रवाई कर सकता है।
-मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में आईडीएस-16 में करीब 5500 अमीरों ने अपने पास मौजूद 2800 करोड़ से अधिक कालेधन पर 45 प्रतिशत टैक्स देने की सहमति दी थी।
-1 जून से 30 सितंबर तक चली इस योजना के बाद आयकर अफसरों ने उन लोगों पर दबिश देने की तैयारी कर ली थी, जो अपने कालेधन को विभाग से बचाकर रखना चाहते थे। लेकिन, मोदी के इस ऐलान ने धनकुबेरों के कुनबे में खलबली मचा दी है।
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