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मासूम से रेप के बाद उसे झाड़ियों में फेंकने का मामला सामने आने के बाद राजनीति गर्मा गई

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भोपाल में एक मासूम से रेप के बाद उसे झाड़ियों में फेंकने का मामला सामने आने के बाद राजनीति गर्मा गई है। शनिवार को प्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर बच्ची से मुलाकात की और डॉक्टर्स से उसकी सेहत के बारे में जाना। हैरत की बात ये रही कि मंत्रीजी लगभग पांच सौ पुलिस कर्मियों के साथ हमीदिया अस्पताल पहुंचे थे, यहां वे सिर्फ दो मिनट ही रूके और इसके बाद सीधे प्रेस कॉफ्रेंस के लिए रवाना हो गए।
दर्द की वजह से शिफ्ट किया कमला नेहरू अस्पताल
बच्ची गुरुवार की रात दर्द से 3 घंटे तड़पती रही तब कहीं जाकर उसे इंजेक्शन दिया गया। बेहतर इलाज के नाम पर उसे आईसीयू की जगह प्राइवेट रूम दे दिया गया। जहां नर्स भी बुलाने पर ही आती है। ज्यादा दर्द की वजह से उसे कमला नेहरू अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।
पैसे से कम नहीं होगा दर्द
पीड़िता की मां ने बताया कि देखने आने वाले अफसर बता रहे हैं कि उसके खाते में चार लाख रुपए आ गए हैं। रुपया पैसा से बेटी का दर्द कम होगा क्या।
बच्ची के भाई से पुलिस कर रही है पूछताछ
चार दिन और अस्पताल में रखेंगे, फिर जाना तो वहीं है। पीड़िता के पिता ने बताया कि पुलिस मेरे सात साल के बच्चे से पूछताछ कर रही है। वह तो उठकर टेंट में खेलने चला गया था, उसे भी पता नहीं कि कौन बहन को उठा कर ले गया।
परिजनों से कर रहे गाली-गलौच
बच्ची को प्राइवेट रूम शिफ्ट करने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने किसी को भी बच्ची के कमरे के पास फटकने न देने की हिदायत दी है। इसके बाद सुरक्षा कर्मी आबिदा वार्ड में भर्ती महिलाओं के परिजनों के गाली-गलौच कर रही है। अभद्र व्यवहार करके उन्हें भगा रहे हैं।
 पुलिस ने इनाम घोषित किया
आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। उस पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। मामले में महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने दुष्कर्म पीड़िता बच्ची के माता-पिता को स्वेच्छानुदान से 20-20 हजार रुपए देने की घोषणा की है। वही राज्य मंत्री विश्वास सारंग ने भी 20-20 हजार रुपए देने की घोषणा की है।

बच्ची के पेट में था बिस्कुट इसलिए नहीं दिया एनेस्थीसिया
ज्यादती की शिकार हुई तीन साल की बच्ची का इलाज देर से शुरू करने के सवाल पर अस्पताल अधीक्षक बच्ची के पेट में बिस्कुट होने का तर्क दे रहे हैं। कहा गया कि, स्टमक खाली न होने की वजह से एनेस्थीसिया नहीं दिया जा सकता था, लिहाजा तीन घंटे बाद यानी 12.30 पर सर्जरी की गई। उधर, स्त्री रोग विभाग की एचओडी अरुणा कुमार बच्ची की सर्जरी को गैर जरूरी बताकर ड्यूटी डॉक्टर को सही ठहरा रही हैं। सवाल-जवाब की औपचारिकता में तीन दिन से अधिक समय बीत गया है, न तो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाले डॉक्टर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है और न ही आरोपी पकड़ा गया है। जीआरपी पीड़िता के सात साल के भाई से उस व्यक्ति के बारे में पूछ कर स्केच बनवा रही है, जो उसकी बहन को उठाकर ले गया था। इधर, एसपी रेल अवधेश गोस्वामी शुक्रवार को सुल्तानिया अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि संदेह के आधार पर अभी तक 16-17 लोगों को हिरासत में लिया है। उनकी निशानदेही कराई जा रही है।

सुल्तानिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. करण पीपरे ने टाइमलाइन बताई है। सुबह 9:30 पर बच्ची अस्पताल लाई गई। आधा घंटे तक यह नहीं बताया गया कि उसके साथ ज्यादती हुई है। इसके बाद पुलिस पहुंची। उसने रेप की बात बताई। तब कंसल्टेंट डॉ. वरुणा पाठक ने उसे देखा। 10.15 पर रजिस्ट्रेशन किया गया। 10:30 पर आरओएम ने एचओडी को सूचना दी। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेंद्र श्रीवास्तव को इमरजेंसी कॉल पर बुलाया। 10:45 पर आईवी फ्लूड चढ़ा दिया गया। 11 बजे ओटी में ले जाने की तैयारी हो रही थी, तब पता चला कि बच्ची ने बिस्कुट खाया है। इस पर एनेस्थेटिस्ट ने बेहोश करने से मना कर दिया। परिवार का कंसर्न चाहिए था। डॉ. वरुणा पाठक ने पहले फॉर्म पर कंसर्न देने की बात की। इसी जद्दोजहद में 11.30 बज गए। एसपी साउथ पहुंच गए और फॉर्म पर हस्ताक्षर किए। तब तक 12 बज चुके थे। 12:30 पर सर्जरी की गई। तब तक माता-पिता को लेकर पुलिस अस्पताल पहुंच चुकी थी।
यह है पूरा मामला
नेशनल क्राइम ब्यूरो (NCB) की 2015 के अपराधों पर जारी रिपोर्ट में MP की शर्मनाक नंबर-1 पोजिशन के बीच राजधानी में एक तीन साल की मासूम के साथ रेप का मामला सामने आया है। आरोपी बच्ची को झाड़ियों फेंक कर चला गया था। बच्ची की तबियत देखने महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने बच्ची को अस्पताल भेजने में मदद करने वाली महिला को सम्मानित करने की बात कही। हालांकि जाते-जाते वे पीड़ित बच्ची के माता-पिता का नाम सार्वजनिक करके विवादों में घिर गई। बुधवार सुबह अंडर ब्रिज के पास शौच के लिए गए मनोज बागरी ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी थी। वह झाड़ियों में दर्द से बिलख रही थी। वह उसे गोद में लेकर पत्नी के पास पहुंचा। फिर एंबुलेंस और पुलिस को कॉल किया। कुछ देर बाद पुलिस आई, लेकिन एंबुलेंस नहीं। ऐशबाग थाने के एसआई जितेंद्र चंदेलिया और अन्य महिलाएं बच्ची को ऑटो से लेकर अस्पताल पहुंचे थे।
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