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रमेश लंबे समय से राहुल को कांग्रेस की कमान सौंपने की वकालत कर रहे

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सीनियर कांग्रेस लीडर जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी दरअसल कांग्रेस के प्रेसीडेंट तो हैं, लेकिन उन्हें वास्तविक अध्यक्ष बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर बनने का इंतजार किए बगैर पार्टी को सियासी जंग के लिए तैयार करना चाहिए।
-राहुल गांधी को लीडरशिप सौंपने की जोरदार वकालत करते हुए रमेश ने कहा कि उहापोह में रहने से कोई फायदा नहीं होता।
-पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि अभी कांग्रेस जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, ये उस दौर के जैसी ही हैं जब मार्च 1988 में सोनिया गांधी ने पार्टी की कमान संभाली थी।
-जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस प्रेसीडेंट की पोस्ट संभाली थी, तब पार्टी के पास सिर्फ दो ही स्टेट थे। दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के सीएम थे और गिरिधर गोमांग ओडिशा के। लेकिन तब लोकसभा में कांग्रेस की संख्या 140 थी।
-रमेश ने कहा कि पहली बार पार्टी लोकसभा में बहुत ही कमजोर है। राज्यसभा में उसकी ताकत घटी है और कुछ ही स्टेट्स है जहां वह सत्ता में है। यह एक मुश्किल दौर है।
राहुल के पास है क्लियर कॉन्सेप्ट
-रमेश ने कहा कि कांग्रेस वाइस प्रेसीडेंट के पास पार्टी संगठन के रीस्ट्रक्चरिंग के लिए ढेर सारे विचार हैं।
-रमेश ने कहा कि कांग्रेस प्रेसीडेंट की पोस्ट का अपना संस्थागत महत्व है। राहुल गांधी को जल्द से जल्द इस पोस्ट पर आ जाना चाहिए।
-राहुल के पास स्ट्रेटेजी का एक क्लियर कॉन्सेप्ट है। वह उन लोगों को जानते हैं जिन्हें वह लाना चाहते हैं।
-एक चीज साफ हो जानी चाहिए कि जब राहुल गांधी कमान संभालेंग तो एक टीम कमान संभालेगी। कब? यह एक बड़ा सवाल है।
पार्टी में अलग-अलग है राहुल को लेकर विचार
-राहुल को प्रेसीडेंट बनाने की रमेश की यह वकालत ऐसे वक्त आई है जब इस मुद्दे पर पार्टी के अंदर राय बंटी हुई नजर आ रही हैं।
-पंजाब प्रेसीडेंट अमरिन्दर सिंह ने यह कहते हुए राहुल की वकालत की थी कि सोनिया अब 70 की हो रही हैं और अगर वह थका हुआ महसूस कर रही हैं तो राहुल यह जगह ले सकते हैं।
-दूसरी तरफ अंबिका सोनी का कहना है कि सोनिया बहुत काम कर रही हैं और उन्हें यह जारी रखना चाहिए। सीनियर कांग्रेस नेता कमल नाथ ने इस बिंदु पर सोनी को सपोर्ट किया था।
18 सालों से पार्टी प्रेसीडेंट हैं सोनिया
-सोनिया गांधी के पास 18 साल से कांग्रेस की कमान है जो 130 साल पुरानी पार्टी के लिए एक तरह से रिकार्ड है।
-राहुल को जनवरी 2013 में जयपुर चिंतन शिविर में पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया।
– रमेश लंबे समय से राहुल को कांग्रेस की कमान सौंपने की वकालत कर रहे हैं।
कांग्रेस की कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजी है कमजोर
-रमेश ने यह भी कहा कि वक्त का तकाजा है कि बदलते भारत के हिसाब से कांग्रेस भी बदले क्योंकि हमारी कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजी बहुत मजबूत नहीं है।
-लगातार चुनावी हार को देखते हुए हमें समाज के विभिन्न हिस्सों तक एग्रेसिव पहुंच बनाने की जरूरत है।
-पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत के नारों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि, हमारी चुनौतियां बहुत ही भारी हैं, लेकिन मायूसी के लिए कोई जगह नहीं है। जो कांग्रेस को खारिज कर रहे हैं वे वक्त से पहले मर्सिया पढ़ रहे हैं।
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