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शिवराज सरकार अपने पांच लाख कर्मचारियों को 7वें वेतनमान का लाभ देने का मन बना चुकी है

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शिवराज सरकार अपने पांच लाख कर्मचारियों को 7वें वेतनमान का लाभ देने का मन बना चुकी है। जल्द ही इसे कैबिनेट में लाया जाएगा। लेकिन करीब चार लाख पेशनरों को इसका लाभ कब मिलेगा, इसको लेकर उलझन है। उन्हें इसके लिए अगले साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। दरअसल वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनर्स के मामले में 2.57 गुना बढ़ोतरी होनी थी, लेकिन वित्त विभाग ने पेंशनर्स को मिलने वाली बढ़ोतरी में कमी करने का प्रस्ताव देकर इसपर अड़ंगा लगा दिया। सूत्रों की माने तो पेंशनर्स के लिए 2.42 का फाॅर्मूला लागू किया जा सकता है। इससे प्रत्येक पेंशनर्स को तीन हज़ार से लेकर 10 हजार रुपए प्रति माह तक का नुकसान हो सकता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वित्त विभाग के अधिकारियों से कहा था कि पेंशनर्स के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद अफसरों ने पेंशनर्स के फार्मूले में परिवर्तन करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। दलील दी कि इससे होने वाली लगभग 300 करोड़ की बचत का उपयोग नई भर्ती में किया जा सकता है। इसके अलावा बढ़ती हुई पेंशन लाइबिलिटी का हवाला भी वित्त विभाग के अधिकारियों द्वारा दिया जा रहा है ।
केबिनेट करेगी फैसला
राज्य के कर्मचारियों को सातवां केंद्रीय वेतनमान का लाभ जल्द ही मिलेगा। पेंशनर्स को भी इसका फायदा मिलेगा। इस बारे में अंतिम निर्णय केबिनेट में लिया जाएगा। -जयंत मलैया, वित्तमंत्रीयह होगा असर
शहरों में 50-60 फीसदी निम्न मध्यम व मध्यम वर्ग के लोग रहते हैं। सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलने से बाजार सुधरेगा। रियल एस्टेट मार्केट जोर पकड़ेगा। सब्सिडी वाले कार और हाउसिंग लोन में दो गुनी बढ़ोतरी हो सकती है।

मतभेद न करे सरकार
वित्त सेवा लेखा अधिकारी संघ के पूर्व प्रांताध्यक्ष गोपाल दुबे ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा है कि सरकार को कर्मचारी और पेंशनर्स के बीच मतभेद नहीं करना चाहिए और सातवें वेतनमान का लाभ एक साथ ही देना चाहिए।
8000 करोड़ का बोझ
सातवें वेतनमान का लाभ कर्मचारियों और पेंशनर्स को देने पर सरकार पर लगभग 8000 करोड़ रुपए का बोझ आएगा । यही नहीं पिछले आठ महीनों का एरियर भी कर्मचारियों को नगद मिलेगा। छठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए गठित अग्रवाल कमेटी की सिफारिशों पर भी अमल आरम्भ होगा, जिससे कई स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियो की वेतन विसंगतियां दूर होंगी। इन सिफारिशों को लागू करने पर लगभग 500 करोड़ का अतिरिक्त बोझ सरकार पर पड़ेगा।
– यह भी हुआ है
बढ़े हुए वेतन का लाभ देने के लिए वित्त विभाग ने सबसे पहले उन ग्रेड-पे स्केल को एक साथ शामिल किया है जो केंद्र और राज्य में एक समान हैं। इसी के साथ जिन ग्रेड-पे के स्लेब में केन्द्र और राज्य में अंतर है, उसे दूर किए जाने का रास्ता भी निकाला जा रहा है। वेतनमान को लेकर बने अंतर को समाप्त करने के लिए अलग से चार्ट बनाया गया है ।
छत्तीसगढ़ के पास अभी तक नहीं भेजा प्रस्ताव
सरकार ने अभी तक छत्तीसगढ़ सरकार के पास इस बारे में कोई प्रस्ताव ही नहीं भेजा है। वित्त विभाग के प्रस्ताव के अनुसार जो पेंशनर्स 1 जनवरी 2016 के बाद रिटायर हुए है उन्हें तो 2.57 के फाॅर्मूले के तहत ही लाभ देने का प्रस्ताव है। उसके पहले सेवानृवित हुए पेंशनर्स को 2.42 की दर से लाभ दिया जाए। गौरतलब हैं कि छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से मप्र के पेंशनर्स को महंगाई राहत या वेतन आयोग की सिफारशें लागू करने के लिए उसकी सहमति भी लेनी होती है।
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