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हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस पंजाब के अमृतसर में हुई

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हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस पंजाब के अमृतसर में हुई। रविवार को नरेंद्र मोदी सभी देशों के डेलिगेशन से मिले। मोदी ने कहा, ”अफगानिस्तान में शांति के लिए टेरर नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है। एक साथ आकर इसका विरोध करना होगा। आतंकियों की मदद करने वालों पर सख्ती जरूरी है।” इससे पहले शनिवार देर शाम मोदी ने हार्ट ऑफ एशिया में आए चार देशों के फॉरेन मिनिस्टर्स से मुलाकात की। इसमें पाक पीएम नवाज शरीफ के एडवाइजर सरताज अजीज भी शामिल थे। बता दें कि कॉन्फ्रेंस में 40 से ज्यादा देशों के डेलिगेशन हिस्सा लिया।
मोदी हार्ट ऑफ एशिया को संबोधित किया। कहा- ”टेरर नेटवर्क को खत्म करने के लिए हमें एकजुट होकर विरोध करना होगा। इसके लिए इच्छाशक्ति दिखानी होगी।”
– “हमें मिलकर टेरर नेटवर्क को खत्म करना होगा। क्योंकि यह हमारे रीजन में खूनखराबा और डर पैदा कर कर रहा है। हमारी कोशिश और एक्शन अफगानिस्तान में सुरक्षा को बढ़ाना है।”
– कहा- “हमारे अफगान के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता इस पूरे रीजन के लिए बहुत अहम है।”
– “अफगानिस्तान के सामने चुनौतियां हैं, लेकिन हम मिलकर उनसे निपटेंगे। हम सभी को मिलकर अफगानिस्तान और दूसरे देशों के साथ कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए मजबूती से काम करना होगा।”
– ”अफगानिस्तान में शांति की आवाज को सपोर्ट करना काफी नहीं है। बल्कि इसके लिए हमेंं मिलकर कदम उठाने होंगे। हमें आतंकवाद के खिलाफ ही कदम नहीं उठाना है बल्कि उन लोगों के खिलाफ भी कदम उठाना है जो इन संगठनों को फाइनेंशियल सपोर्ट देने के साथ आसरा भी दे रहे हैं।”
“हमारी कोशिश और एक्शन अफगानिस्तान में सुरक्षा को बढ़ाना है।”
गनी ने कहा- मिस्टर अजीज, फंड का इस्तेमाल हम टेररिज्म रोकने के लिए भी कर सकते हैं
– गनी ने अपनी स्पीच में कहा, ”अफगानिस्तान के विकास के लिए पाकिस्तान 500 मिलियन डॉलर की रकम दे रहा है।”
– ”मिस्टर अजीज (पाक पीएम के सलाहकार), यह रकम आतंकवाद से लड़ने में खर्च की जा सकती है।”
– ”हमें सीमा पार आतंकवाद की पहचान करने और आतंकवाद से लड़ने के लिए फंड की जरूरत है।”
– समझा जा रहा है कि क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म को लेकर गनी का इशारा पाकिस्तान की ओर ही था।
सरताज अजीज से मिलाया हाथ, पर बायलैट्रल मीट नहीं हुई
– शनिवार देर शाम मोदी ने हार्ट ऑफ एशिया में आए चार देशों के फॉरेन मिनिस्टर्स से मुलाकात की। इसमें पाक के फॉरेन एडवाइजर और नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज भी शामिल थे। मोदी ने इस मुलाकात के दौरान कहा कि अफगानिस्तान और इस रीजन में स्थिरता के लिए आतंकवाद और हिंसा का खात्मा जरूरी है।
– मीटिंग में अजीज के अलावा किर्गिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और स्लोवाकिया के मिनिस्टर्स शामिल थे।
– मोदी-अजीज की मुलाकात जरूर हुई लेकिन दोनों देशों के बीच बायलैट्रल टॉक की उम्मीद कम है।
– इधर, कांग्रेस ने इस मुलाकात पर सवाल उठाया। कहा, ”क्या मोदी ने अजीज को अमृतसर में छोले-कुल्चे खिलाने के लिए बुलाया है।”
– ”सरकार तय नहीं कर पा रही है कि पाकिस्तान के साथ किस नीति पर चलना है।”
15 घंटे पहले ही इंडिया पहुंचे अजीज
– कॉन्फ्रेंस के लिए सरताज अजीज को रविवार सुबह पहुंचना था, लेकिन वे 15 घंटे पहले ही आ गए।
– प्लान में बदलाव के पीछे का कारण अभी पता नहीं चला है।
– बता दें कि भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में उड़ी हमले और एलओसी पर सीजफायर के बाद से लगातार तनाव है।
– ऐसे में उम्मीद कम है कि दोनों देशों के अफसरों के बीच किसी भी लेवल पर बायलैट्रल टॉक हो।
कॉन्फ्रेंस में कौन-कौन ले रहा है हिस्सा?
– न्यूज एजेंसी के मुताबिक, हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस में भारत, चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान समेत 14 देशों के सीनियर ऑफिशियल्स और 17 सहायक देशों के
रिप्रेंजेटेटिव्स शिरकत कर रहे हैं।
– 40 देशों और यूरोपियन यूनियन की भागीदारी से ये जाहिर है कि ये कॉन्फ्रेंस कितनी अहम है।
कॉन्फ्रेंस में रहे मुद्दे?
– अफगानिस्तान में शांति बहाली के प्रॉसेस को नए सिरे से शुरू करना। अफगानिस्तान का साउथ और सेंट्रल एशिया के देशों से जुड़ाव और उनके साथ ट्रेड बढ़ाने पर जोर।
– एशिया में आतंकवाद, कट्टरता और उग्रवाद के बढ़ते खतरे से निपटना। सुरक्षा और संपन्नता इस कॉन्फ्रेंस की थीम रही।
– पांच देशों के चाबहार रेलवे प्रोजेक्ट और तापी (TAPI- तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत) गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई।
क्या है हार्ट ऑफ एशिया?
– यह एनुअल कॉन्फ्रेंस कई चुनौतियों का सामना कर रहे अफगानिस्तान पर इस्तांबुल प्रॉसेस का हिस्सा है।
– हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल प्रॉसेस 2011 में शुरू की गई थी।
– इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अजरबैजान, चीन, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, सउदी अरब, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और यूएई शामिल हैं।
– इस प्लेटफॉर्म का मकसद अफगानिस्तान और उसके पड़ोसी देशों के बीच इकोनॉमिक, पॉलिटिकल और सिक्युरिटी को लेकर आपसी सहयोगी बढ़ाना है।
– कनाडा, डेनमार्क, इजिप्ट, फ्रांस, फिनलैंड, जर्मनी, इराक, इटली, जापान, नॉर्वे, पोलैंड, स्पेन, स्वीडन, ब्रिटेन और अमेरिका ने इस पहल का सपोर्ट किया है।
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