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अोलिंपिक का रियो में भारत का पहला मेडल

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ओलिंपिक के 12वें दिन 23 साल की रेसलर साक्षी मलिक ने कमाल का मैच खेला। वे 58 किलो की फ्री-स्टाइल रेसलिंग में 5-0 के बड़े मार्जिन से पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने आखिरी 9 सेकंड में बाजी पलटकर भारत को ब्रॉन्ज दिला दिया। रियो में यह भारत का पहला मेडल है। महिला रेसलिंग में भारत का किसी भी अोलिंपिक का पहला मेडल है। साक्षी ने बुधवार शाम 6:38 बजे से देर रात 2:50 आठ घंटे 12 मिनट में 5 मुकाबले लड़े। चार में जीतकर देश को मेडल दिलाया। रोहतक में उनके पिता ने भास्कर को बताया कि साक्षी ने महज ड्रेस के लिए रेसलिंग शुरू की थी।
1# रेसलिंग में 3 मिनट की बाउट होती है। ब्रॉन्ज के लिए रेपेचेज राउंड के दूसरे मुकाबले में ढाई मिनट तक साक्षी किर्गिस्तान की रेसलर एसुलू तिनिवेकोवा 5-0 से पिछड़ रही थीं।
2# साक्षी थोड़ा प्रेशर में थीं, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं खोया और फिर जबरदस्त पलटवार करते हुए एसुलू को दो बार मैट पर गिराया और मुकाबला खत्म होने के 10 सेकंड पहले तक स्कोर 5-5 पर ला दिया।
3#साक्षी मेडल से बस कुछ ही दूर थीं। आगे के गेम में उन्होंने कोई गलती नहीं की और आखिरी 9 सेकंड में साक्षी ने किर्गिस्तान की रेसलर काे पटका। इससे तीन प्वाइंट मिले और साक्षी ने रियो ओलिंपिक के 12 दिन बाद भारत को पहला मेडल दिलाया। 8-5 के अंतर से एसुलू तिनिवेकोवा को हराकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
लगातार तीसरा ओलिंपिक जब रेपचेज में मिला मेडल
– ये लगातार तीसरा ओलिंपिक है, जब भारत ने रेपचेज से मेडल जीता है। 2008 में सुशील कुमार और 2012 में योगेश्वर दत्त ने भी इसी तरह रेपेचेज राउंड में ब्रॉन्ज जीता था।
– क्वार्टर फाइनल में हार के बाद साक्षी को रेपेचेज मुकाबले में हिस्सा लेने का मौक़ा मिला था।
– इससे पहले रेपेचेज राउंड में साक्षी का पहला मुकाबला मंगोलिया की रेसलर ओरखोन से हुआ था। इसमें उन्होंने ओरखोन को 12-3 से हराया।
महिला रेसलिंग के लिए ऐतिहासिक मौका
– मैच के बाद साक्षी ने कहा, “मुझे जीत का भरोसा था। यह भारतीय महिला रेसलिंग के लिए ऐतिहासिक मौका है। यह सफलता मेरी 10 सालों की कड़ी मेहनत का नतीजा है। यह मेरे लिए स्पेशल है और मैं गर्व महसूस कर रही हूं कि मैंने देश के लिए मेडल जीत लिया।”
रेसलिंग में पहला, महिलाओं को चौथा मेडल
– साक्षी ओलिंपिक में मेडल जीतने वाली भारत की चौथी एथलीट बन गई हैं।
– उनसे पहले 2000 में कर्णम मल्लेश्वरी ने वेटलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज जीता था।
– 2012 में मैरी कॉम ने बॉक्सिंग में ब्रॉन्ज जीता।
– 2012 में साइना नेहवाल ने बैडमिंटन में ब्रॉन्ज जीता।
– रेसलिंग में किसी भारतीय महिला एथलीट को इससे पहले कोई मेडल नहीं मिला था।
देशभर में जश्न का माहौल, मां की दुआ रंग लाई
– साक्षी की जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है। हरियाणा के रोहतक में देर रात तक उनके प्रशंसक घर पर डटे रहे। रोहतक में मां सुदेश मलिक ने कहा कि साक्षी से मंगलवार शाम को बात हुई थी। उसने बताया था कि बुधवार को बाउट होनी है। इसमें मैं मेडल लेकर आऊंगी, लेकिन मैंने कहा कि बेटा, तुम्हें मेडल के लिए नहीं खेलना। जीत के लिए दांव लगाने हैं। मेडल तो अपने आप आ जाएगा।
ऋषिकेश से नीलकंठ तक पैदल जाएंगे पिता
– उधर, जीत के बाद साक्षी के पिता सुखबीर मलिक ने कहा, “उसका पहला ओलिंपिक है और उसने देश के लिए मेडल जीतकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। मैं अपनी मन्नत के अनुसार ऋषिकेश से 32 किलोमीटर दूर नीलकंठ महादेव मंदिर तक पैदल जाऊंगा। बेटी का मोखरा गांव से लेकर रोहतक सेक्टर 3 तक जोरदार स्वागत किया जाएगा।
– साक्षी की जीत के बाद कई बड़े प्लेयर्स और नेताओं ने उन्हें बधाई दी। इनमें अनिल कुंबले, राज्यवर्धन राठौर, गगन नारंग, योगेश्वर दत्त, सुशील कुमार, ज्वाला गुट्टा आदि शामिल हैं।
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