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कैबिनेट ने बुधवार को 7th पे कमीशन की सिफारिशों को मंजूरी दे दी

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मोदी सरकार की कैबिनेट ने बुधवार को 7th पे कमीशन की सिफारिशों को मंजूरी दे दी। सभी क्लास के इम्प्लॉइज की बेसिक सैलरी 2.57 गुना बढ़ेगी। अलाउंसेस में इजाफे पर फैसला 4 महीने बाद लिया जाएगा। अरुण जेटली ने कहा, ”1 जनवरी 2016 से सिफारिशें लागू होंगी। इसका फायदा सेंट्रल गवर्नमेंट के 47 लाख इम्प्लॉइज और 53 लाख पेंशनर्स को मिलेगा। जून तक का 6 महीने का एरियर सरकार मार्च 2017 से पहले ही देगी।’ 10 Q&A में समझें कैसे और कितना फायदा…
#1 कब से लागू होगा?
1 जनवरी 2016 से।
#2 बढ़ी हुई सैलरी कब से मिलने लगेगी?
जुलाई की सैलरी, जो अगस्त में आएगी।
#3 कितनी सैलरी बढ़ेगी?
सभी कैटेगरी में बेसिक सैलरी में ढाई गुना इजाफा होगा।
#4 तो अब मेरी सैलरी बढ़कर कितनी हो जाएगी?
– बेसिक तो ढाई गुना बढ़ जाएगा। लेकिन अगले 4 महीनों तक मौजूदा अलाउंस ही मिलेगा।
– इन दोनों को जोड़कर जो अमाउंट आएगा वही आपकी नई सैलरी होगी।
#5 मिनिमम और मैक्सिम सैलरी अब कितनी हो गई?
– 7 हजार रुपए की मिनिमम बेसिक पे बढ़कर 18 हजार रुपए हो गई।
– मैक्सिमम बेसिक पे 90 हजार थी वो अब 2.5 लाख होगी।
– पेंशनर्स के लिए मिनिमम पेंशन अब 3500 की जगह 9 हजार हो गई है।
#6 तो क्या अलाउंस में कोई इजाफा नहीं होगा?
– फिलहाल कोई इजाफा नहीं होगा।
– सरकार ने 7th पे कमीशन की अलाउंस से जुड़ी सिफारिशों के रिव्यू के लिए एक कमेटी बनाई है। एक्सपर्ट ग्रुप्स की राय पर कमेटी 4 महीने में सुझाव देगी।
– सुझाव के आधार पर ही अलाउंस पर फैसला होगा। उसके बाद ही एरियर के साथ अलाउंस में बढ़ोत्तरी होगी।
– तब तक मौजूदा रेट से अलाउंस ही मिलता रहेगा।
#7 जनवरी से जून 2016 के 6 महीनों के एरियर का क्या?
– मार्च 2017 से पहले ही मिल जाएगा। एक बार में ही पूरा एरियर मिलेगा या किश्तों में, ये तय होना बाकी।
– सूत्रों के मुताबिक, सरकार एरियर को एक साथ 30:30:40 के रेशियो में देने की तैयारी कर रही है।
– इसके तहत एरियर के टाेटल अमाउंट का 30% कैश देगी। 30% पीएफ में जमा करेगी और बचे 40% के लिए 10 साल का बॉन्ड देगी।
#8 और क्या फायदे मिलेंगे?
– एक बार की जगह साल में दो अलग-अलग डेट यानी 1 जनवरी और 1 जुलाई को इंक्रीमेंट होगा। लेकिन एक इम्प्लॉई को दो बार इंक्रीमेंट नहीं मिलेगा।
– 7.5 की जगह अब घर बनाने के लिए एडवांस (एचबीए) 25 लाख रुपए ले सकेंगे।
– ग्रेजुएटी 10 से बढ़ाकर 20 लाख कर दी है।
– एक्स-ग्रेशिया 10 से 20 लाख की जगह 25 से 45 लाख रुपए मिलेगा।
इन 4 जरूरतों पर मिलेगा इंट्रेस्ट फ्री एडवांस:टूर या ट्रांसफर के ट्रैवल अलाउंस के लिए, लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी) पर, मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए और मृत इम्प्लॉई के आश्रितों के लिए टीए की जरूरत पड़ने पर।
#9 7th पे कमीशन कब तक के लिए है?
अगले 10 साल तक इसी पे कमीशन के आधार पर सरकार से सैलरी मिलेगी।
#10 तो क्या अगले 10 साल तक यही सैलरी मिलती रहेगी?
नहीं, 7th पे कमीशन के मुताबिक जो आपकी सैलरी होगी, उस पर सालाना 3 फीसदी का इन्क्रीमेंट मिलेगा। साथ ही, महंगाई भत्ते में बढ़ोत्तरी होने पर भी सैलरी बढ़ेगी।
सिफारिशों से सेंट्रल इम्प्लॉईज नाराज, 11 जुलाई से करेंगे हड़ताल
– ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन (एआईआरएफ) के सेक्रेटरी शिवलाल मिश्र का कहना- “इस आयोग की सिफारिशें ही गलत है। पहले 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी होती रही है।”
– एआईआरएफ की मांग है कि मिनिमम सैलरी को 18 हजार से बढ़ाकर 26 हजार किया जाए।
– “सरकार इसे ठीक करे नहीं तो हमारें 32 लाख कर्मचारी 11 जुलाई से हड़ताल पर जाएंगे।”
70 साल में सबसे कम इजाफे की सिफारिश
– बेसिक पे के मामले में यह 70 साल में सबसे कम बढ़ोत्तरी की सिफारिश है। क्योंकि इस बार यह 16% बढ़ाने की बात कही गई है। जबकि 6th पे कमीशन में बेसिक सैलरी 20% बढ़ाने की सिफारिश की गर्इ थी।
– 16% बेसिक पे के साथ अगर अलाउंस 67% बढ़ा दें तो इस बार टोटल सैलरी 23.55% तक बढ़ेगी। पेंशन में एवरेज 24% की बढ़ोत्तरी की सिफारिश है।
क्या थीं कमीशन की बाकी अहम सिफारिशें?
– केंद्र के सभी इम्प्लॉइज के लिए भी वन रैंक-वन पेंशन हो। इसके दायरे में 10 साल पहले रिटायर हुए इम्प्लॉइज भी होंगे।
– जब भी डीए 50% बढ़ेगा, ग्रैच्युटी लिमिट 25% बढ़ेगी।
– सैलरी तय करने के लिए पे बैंड और ग्रेड पे का सिस्टम खत्म।
– 56 तरह के अलाउंस खत्म किए जाएं, सभी को एक जैसी पेंशन।
– पैरा मिलिट्री फोर्स के लिए भी शहीद का दर्जा। मिलिट्री सर्विस पे दोगुना होगा। यह सिर्फ आर्मी पर लागू होगा। बाकी पर नहीं।
केंद्र पर कितना आएगा बोझ
– सैलरी बढ़ाने से केंद्र पर 1.02 लाख करोड़ रुपए का बोझ आएगा, जो कुल जीडीपी का 0.7% है।
– 39100 करोड़ रुपए सैलरी, 29300 करोड़ रुपए अलाउंस और 33700 करोड़ रुपए पेंशन बढ़ाने पर खर्च होंगे।
– आम बजट पर 73650 करोड़ रुपए और रेलवे बजट पर 28450 करोड़ रुपए का बोझ आएगा।
– इम्प्लॉइज को अगस्त महीने से एरियर के साथ सैलरी दिए जाने की उम्मीद है। जनवरी से अब तक के एरियर्स भी मिलेंगे।
सेक्रेटरीज की कमेटी ने ज्यादा बढ़ोत्तरी की सिफारिश की थी
– पीके सिन्हा की अगुआई वाली सेक्रेटरीज की कमेटी ने पे कमीशन की सिफारिशों से भी 30% ज्यादा सैलरी तय करने की बात कही थी।
– यानी 18,000 की जगह करीब 27,000 और 2, 25,000 की जगह 3, 25,000 रुपए सैलरी करने का प्रपोजल दिया था।
क्या है सेवन्थ पे कमीशन?
– कमीशन के चेयरमैन अशोक कुमार माथुर हैं। उन्होंने कुछ महीने पहले फाइनेंस मिनिस्टर जेटली को सिफारिशें सौंपी थीं।
– यह कमीशन यूपीए सरकार ने फरवरी 2014 में बनाया था। इसे 18 महीने में रिपोर्ट सौंपनी थी। लेकिन इसका टर्म अगस्त 2015 में चार महीने के लिए बढ़ा दिया गया था।
सरकारें क्यों बनाती हैं पे कमीशन?
बढ़ती महंगाई और इम्प्लॉइज बेनिफिट के तकरीबन हर 10 साल बाद केंद्र सरकार पे कमीशन बनाती है। यह केंद्र के इम्प्लॉई का पे स्केल, रिटायरमेंट के बेनिफिट और दूसरे बेनिफिट्स पर चर्चा करता है।
कब-कब बने कमीशन?
पहला पे कमीशन :जनवरी 1946 में बना था। इसकी रिपोर्ट मई 1947 में भारत की अंतरिम सरकार को सौंपी गई थी।
दूसरा पे कमीशन :अगस्त 1957 में बना। इसकी रिपोर्ट 1959 में सौंपी गई। इससे सरकार पर करीब 40 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ा।
तीसरा पे कमीशन :अप्रैल 1970 में बना। मार्च 1973 में रिपोर्ट सौंपी। इससे सरकार पर 144 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ा।
चौथा पे कमीशन :जून 1983 में बना। चार साल में तीन फेज में इसकी रिपोर्ट सब्मिट की गई। सरकार पर 1,282 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ा।
पांचवां पे कमीशन :9 अप्रैल 1994 को आयाेग बना। तीन साल बाद इसकी रिपोर्ट सौंपी। सरकार पर 17,000 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ा।
छठा पे कमीशन :अक्टूबर 2006 में बना। मार्च 2008 में रिपोर्ट सौंपी। 1 जनवरी 2006 में सिफारिशें लागू की गईं। इससे सरकार पर 22,000 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ा।
तब राज्य सरकारों के पास सैलरी देने के लिए पैसे नहीं थे
– पांचवें पे कमीशन की सिफारिशें लागू होने के बाद केंद्र ने राज्य सरकारों से भी अपने इम्प्लॉइज की सैलरी का रिव्यू करने को कहा।
– हालात ये बन गए थे कि 2000 में 13 राज्यों के पास अपने इम्प्लॉइज को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं बचे।
– इस फाइनेंशियल क्राइसिस से उबरने के लिए पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम ने एक ऐसा सिस्टम बनाने की मांग की, जिसके तहत केंद्र सरकार राज्य सरकारों से सलाह लिए बगैर सैलरी न बढ़ाए। वर्ल्ड बैंक ने भी इसे क्रिटिसाइज किया था।
तब सबसे कम 10 रुपए बढ़ी थी सैलरी
– पहले पे कमीशन में रेलवे के क्लास-4 इम्प्लॉई की सैलरी 10 रुपए से 30 रुपए तक बढ़ाई गई थी।
– क्लास-3 इम्प्लॉई की सैलरी में 35 से 60 रुपए का इजाफा हुआ था।
– कमीशन ने रेलवे इम्प्लॉई के लिए मिनिमम पे 55 रुपए फिक्स किया था।
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