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गर्भ के बाहर निकलने की कोशिश में शिशु की मां के पेट में ही मौत

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एक महिला प्रसव पीड़ा से शुक्रवार रातभर तड़पती रही। नर्स ने डॉक्टर को फोन कर बताया भी, लेकिन डॉक्टर अस्पताल नहीं आई। इधर, नर्स ने भी ध्यान नहीं दिया। दर्द बढ़ता गया, आखिरकार गर्भ से बाहर निकलने की कोशिश में शिशु की मां के पेट में ही मौत हो गई। शनिवार सुबह शिशु का शव ऑपरेशन से निकाला गया। डॉक्टर का कहना है कि डिलीवरी चार घंटे पहले कर दी जाती तो ऐसा नहीं होता। हादसा मप्र के भिंड जिला अस्पताल में हुआ।
ये है मामला
मीरा कॉलोनी निवासी रिंकी भदौरिया (21) को शुक्रवार शाम लेबर पेन होने पर जिला अस्पताल लाया गया था। डयूटी डॉक्टर रंजना चौधरी ने टेस्ट के बाद कहा कि डिलीवरी रात 11-12 बजे के बीच हाेगी। इससे पहले डॉक्टर घर चली गई। रात 12 बजे रिंकी की सास नर्स से मिली तो नर्स ने रंजना चौधरी को मोबाइल कर केस बताया तो डॉक्टर ने नर्स से कहा तुम ही देख लो। नर्स बोली डिलीवरी रात तीन बजे होगी, लेकिन तीन बजे भी डिलीवरी नहीं कराई गई। प्रसूता का दर्द बढ़ता रहा, शनिवार सुबह 8 बजे तक किसी ने सुध नहीं ली।
समय पर ऑपरेशन होता तो बच जाता बच्चा
डॉ. अंशु मिश्रा ने कहा कि डिलीवरी में चार घंटे की देरी हुई है। इस दौरान बाहर निकलने की कोशिश में बच्चे का दम घुट गया और उसकी मौत हो गई। इसमें महिला की जान भी जा सकती थी। मृत शिशु को समय पर बाहर निकाल लिए जाने से महिला बच गई।
घिसा-पिटा जवाब जांच के बाद कार्रवाई
मामले में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन केके दीक्षित ने शिशु की गर्भ में मौत के मामले में वही घिसा-पिटा जवाब दिया है। वे बोले कि रंजना चौधरी का नाम सामने आया है। मामले की जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
इंदौर : नवजात का शव कुत्ता ले गया, मर्च्युरी में एक व्यक्ति का शव चीटियां खाती रहीं
एमवायएच की बर्न यूनिट से शुक्रवार रात नवजात का शव कुत्ता उठाकर ले गया। वहीं, जिला अस्पताल की मर्च्युरी में शनिवार को एक व्यक्ति के शरीर को चींटियां खाती रहीं। हालांकि बताया जा रहा है कि शव लाया गया वहीं से उस पर चींटियां लगी थीं। इन अस्पतालों की पिछली लापरवाही अभी जांच में उलझी है। धार जिले के धुलेट गांव की मनीषा (19) खाना बनाते वक्त 83 फीसदी जल गई थी। उसे एमवायएच की बर्न यूनिट में भर्ती करवाया गया था। मनीषा को सात माह का गर्भ था। शुक्रवार को उसने मृत बच्चे को जन्म दिया। रात होने के कारण परिजन ने बच्चे का शव मां के बिस्तर के पास ही रख दिया। रात ढाई बजे आहट से नींद खुली तो देखा एक कुत्ता शव उठाकर ले जा रहा था। आधे घंटे बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव तलाशा और उसे मर्च्युरी में रखवा दिया।
धार : डॉक्टर सोते रहे, ड्रेसर ने अपने घर में ही महिला को चढ़ा दिया ग्लूकोज, मौत
गुजरी (धार)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शनिवार तड़के डॉक्टर की बजाय ड्रेसर ने एक महिला को ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दी। इसके बाद उसकी मौत हो गई। बड़ा भेड़लिया गांव की कविता का नसबंदी ऑपरेशन हुआ था। शुक्रवार रात उसे पेट दर्द हुआ तो वह पति के अस्पताल पहुंची। यहां डॉ. रौनकसिंह चंदेल का दरवाजा खटखटाने के बाद भी वे नहीं उठे तो परिसर में ही रहने वाले ड्रेसर अमित दुबे ने उसे बोतल चढ़ाई थी। ड्रेसर को निलंबित कर दिया गया।
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