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दिग्विजय सिंह के बेटे विधायक जयवर्धन सिंह भी करंसी बदलने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहे

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राघौगढ़ के राजकुमार और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के बेटे विधायक जयवर्धन सिंह भी करंसी बदलने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहे। जयवर्धन शनिवार को घंटों आम जनता के साथ राघौगढ़ स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहे। लगभग 3 घंटे बाद जयवर्धन ने फार्म भरकर चार हजार रुपए के पुराने नोटों को नए नोटों में तब्दील कराया।
खास बात ये रही कि संबंधित ब्रांच के मैनेजर ने विधायक जयवर्धन को अंदर चलकर करेंसी बदलवाने की सलाह दी थी, लेकिन वे नहीं माने। उनका कहना था, कि मेरा मकसद सिर्फ नोट बदलने तक सीमित नहीं है मैं आम लोगों की पीड़ा को समझना चाहता हूं। गौरतलब है कि शुक्रवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी नई दिल्ली की एक ब्रांच आम लोगों के साथ लाइन में लगकर नोट एक्सचेंज कराए थे।
मैनेजर ने मनाया, फिर भी नहीं मानें
राजघराने से ताल्लुक रखने वाले जयवर्धन सिंह के कतार में खड़े होने की सूचना जैसे ही राघौगढ़ एसबीआई के शाखा प्रबंधक आरके सिन्हा तक पहुंची, वे फौरन जाकर जयवर्धन से मिले। उन्होंने जयवर्धन से कतार में न लगकर, सीधे अंदर आकर नोट बदलवाने की सलाह दे दी। लेकिन, जयवर्धन नहीं माने उन्होंने कहा कि वे सरकारी फैसले का असर आम लोगों के जीवन पर देखना चाहते हैं, लिहाजा वे उन्हीं की तरह कतार में लगे रहेंगे। तकरीबन 15 मिनिट तक सिन्हा और विधायक के बीच बातचीत हुई, लेकिन विधायक कतार से हटने के लिए राजी नहीं हुए।
लोग रह गए हैरान
आम लोगों की तरह राजघराने के विधायक जयवर्धन को इस तरह कतार में खड़ा देखकर लोगों को बड़ी हैरानी हुई। कभी वे लंबी कतार को देखते, तो कभी धूप के कारण जयवर्धन सिंह के चेहरे पर झलक रहे भावों को। जयवर्धन दोपहर 12 बजे से कतार में लगे थे, लगभग 3.15 बजे वे संबंधित काउंटर पर पहुंचे। काउंटर पर फार्म भरकर उन्होंने चार हजार रुपए के नोट बदलवाए।

सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
विधायक जयवर्धन सिंह ने केन्द्र सरकार के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि नोट बदलवाने की टाइमिंग काफी कम है। इस समय फसलों की बोवनी का काम चल रहा है और किसानों को खाद-बीज एवं बिजली कनेक्शन सहित अन्य जरूरी कार्यों के लिए पैसों की जरूरत पड़ रही है। वहीं, तुलसी विवाह के बाद से ही शादियों का सिलसिला भी शुरू हो गया है, लेकिन लोग पैसे न होने के कारण परेशान हो रहे हैं। यह फैसला श्राद्धपक्ष में लिया जाता तो इतनी मुश्किल नहीं होती। एकदम से करंसी बदलने के फैसले से महंगाई का ग्राफ भी बढ़ गया है। विधायक के मुताबिक आतंकियों के पास भारत की करंसी नहीं होती, इसलिए सरकार का ये कहना बिलकुल गलत होगा कि इससे आतंकवाद रुक जाएगा।

अमेरिका में पढ़ाई के बावजूद सादगी पसंद
जयवर्धन को राघौगढ़ की जनता महाराज कुंवर या छोटे बाबा साहेब के नाम से पुकारती है। ये राघौगढ़ राजघराने के राजकुमार और कांग्रेस के विधायक हैं। इनके पिता दिग्विजय सिंह हैं, जो दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।
 09 जुलाई, 1982 में हुआ जन्म
जयवर्धन का जन्म सन् 1982 में हुआ था। इन्हें कुंवर के नाम से भी जाना जाता है। दून स्कूल से पढ़ाई करने के बाद जयवर्धन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और वहां से डिग्री हासिल कर लौटने के बाद राजनीति में कूद पड़े।
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