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देवउठनी एकादशी दो दिनों तक मनाई जाएगी

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इस बार देवउठनी एकादशी दो दिनों तक मनाई जाएगी। गुरूवार को सुबह दस से शुक्रवार सुबह दस बजे एक एकादशी रहेगी। इसके बाद शुक्रवार को चतुर्मास समाप्त होगा। देवशयन काल समाप्त होते ही गन्ने का मंडप बनाकर तुलसी विवाह कराया जाएगा। तुलसी विवाह के बाद से मांगलिक कार्यक्रम शुरू होंगे। इस मौके पर विधायक रामेश्वर शर्मा ने समर्थकों और भक्तों के साथ तुलसी विवाह कराया।
पंडित धर्मेंद्र शास्त्री के अनुसार इस बार नवंबर से मार्च तक मांगलिक कार्यों के लिए 35 से ज्यादा शुभ मुहूर्त है। तुलसी विवाह पर लोगों के घरों में विवाह मंडप के लिए गन्ने लाए गए हैं। गन्ने पूजा को देवउठनी एकादशी कहा जाता है, इस पर्व पर तुलसी के पौधे को हल्दी कुमकुम अक्षत पीले वस्त्र से सजाकर गन्ने को मंडप बनाकर पूरे विधि विधान से महिलाएं तुलसी विवाह की रस्में निभाते हुए तुलसी की पूजा करते है। तुलसी पूजा में गन्ने का विशेष महत्व होता है।
शास्त्रीजी के अनुसार ग्यारस शुक्रवार को उदया तिथि में रहने पर उसी दिन मनाई जाएगी। शैव, स्मार्त परंपरा के लोग गुरूवार जबकि वैष्णव परंपरा से जुड़े लोग शुक्रवार को देवउठनी ग्यारस की बूजा व आतिशबाजी करेंगे। मंदिरों में भी इसी दिन मनाई जाएगी।
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