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देशद्रोह के मामले में 22 साल के हार्दिक पटेल को बेल दे दी

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हाईकोर्ट ने देशद्रोह के मामले में 22 साल के हार्दिक पटेल को बेल दे दी, लेकिन अभी उनकी रिहाई नहीं होगी। उन पर राजकोट, अहमदाबाद और मेहसाणा में कई केस दर्ज हैं। बता दें कि वे पिछले 9 महीने से सूरत की जेल में बंद हैं। पिछले साल अक्टूबर में पटेल आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उनके बयानों के बाद हार्दिक और उनके पांच साथियों पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था। हार्दिक के पांच साथियों को पहले ही बेल मिल चुकी है।
– हाईकोर्ट ने शुक्रवार को हार्दिक को बेल देते हुए रिहाई के बाद 6 महीने गुजरात से बाहर रहने का आदेश दिया।
– हार्दिक के खिलाफ विसनगर कोर्ट में भी एक केस चल रहा है। इसकी सुनवाई 11 जुलाई को होगी। इसका फैसला आने के बाद ही वे जेल से बाहर आ सकते हैं।
– बता दें कि पाटीदार आंदोलन के वक्त हार्दिक ने पिछले साल 3 अक्टूबर को एक बयान दिया था।
– इस बयान में पटेल ने विपुल देसाई नाम के एक लड़के द्वारा सुसाइड की धमकी पर कहा था कि दो-चार पुलिसवालों को मार देना, लेकिन खुदकुशी मत करना।
– इस बयान का वीडियो वायरल हो गया था। इसके बाद पुलिस हरकत में आई थी और उसके भाषणों की रिकॉर्डिंग्स निकाली गई थीं।
पुलिस के पास थे ये सबूत
– पुलिस ने हार्दिक और उनके सहयोगियों के खिलाफ जो एफआईआर दर्ज की थी, उसमें भाषण की ट्रांसक्रिप्ट्स के अलावा हार्दिक के दिए भाषणों की रिकॉर्डिंग्स का जिक्र था।
– इस एफआईआर में सूरत और मेहसाणा में 17 और 18 अक्टूबर, 2015 को कई जगहों पर हुई हिंसा और हाईवे ब्लॉक किए जाने का जिक्र किया गया।
– भारत-साउथ अफ्रीका के बीच 18 अक्टूबर, 2015 को राजकोट में खेले गए वनडे मैच से एक दिन पहले हार्दिक अशांति फैलाना चाहते थे।
– एक ट्रांसक्रिप्ट में हार्दिक मैच वाले दिन अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा जताते हुए सुने गए।
– अगस्त, 2015 को अहमदाबाद में पाटीदार रैली में हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार आरोपियों की फोन पर हुई बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट्स भी पुलिस के पास थी।
– इसमें आरोपी कथित तौर पर पूरे गुजरात को घंटे भर में जला देने, सरकार का तख्ता पलट देने और ट्रेन जलाने की बातें करते सुने गए।
क्या है गुजरात में पटेल-पाटीदार कम्युनिटी का आंदोलन?
– पटेल-पाटीदार कम्युनिटी सरकारी नौकरियों और कॉलेजों में 10% रिजर्वेशन की मांग कर रही थी।
– इस मांग को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन की अगुआई हार्दिक पटेल ने कर रहे हैं।
– 31 साल के बाद राज्य में इस पैमाने पर कोई आंदोलन हुए थे।
– आंदोलन के बाद गुजरात सरकार ने अगड़ी जातियों को आर्थिक आधार पर 10% रिजर्वेशन देने का एलान किया।
– 6 लाख से कम इनुअल इनकम वाले परिवार को इस कैटेगिरी में रखे गए।
– इसे पटेल आंदोलन को खत्म करने के कदम के रूप में देखा गया
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