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नए नोटों के हिसाब से एटीएम तैयार करने में 2 से 3 हफ्ते का वक्त लगेगा- जेटली

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यूनियन फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा है कि नए नोटों के हिसाब से एटीएम तैयार करने में 2 से 3 हफ्ते का वक्त लगेगा। जेटली ने कहा कि ये काम अगर पहले किया जाता तो फिर सीक्रेसी कैसे रहती? उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया कि लोगों को इस वजह से कुछ तकलीफ भी हो रही है। रिजर्व बैंक के मुताबिक, 201861 एटीएम हैं।
– ATM के अंदर कैश रखने के लिए 4 ब्लॉक यानी कैसेट्स होते हैं। इन चारों कैसेट्स में अलग-अलग नोट रखे जाते हैं। इन कैसेट्स नोटों की लंबाई-चौड़ाई के हिसाब से तैयार किया गया था। अब तक 100, 500 और 1000 के नोट रखे जाते थे। इनकी चौड़ाई बराबर लेकिन लंबाई में फर्क था।
– नए जारी किए गए 500 और 2000 के नोटों की चौड़ाई पुराने नोटों के मुकाबले कम है। इसलिए ATMs नए नोट नहीं निकाल सकते। सीधी सी बात है कि केसेट्स का डिजाइन नए नोटों के हिसाब से किए जाने तक दिक्कत बनी रहेगी।
– अब 100 का नोट ही ATMs निकाल पा रहे हैं। वैसे दिक्कत ये भी है कि भारत में ATMs कम और विदड्रॉल करने वालों की संख्या बेहद ज्यादा है। एक केसेट में ही 100 के नोट रखे जा सकते हैं। इस अनुपात में प्रोडक्शन भी आसान नहीं है।
एक बार में कितना कैश आता है ATMs में?
– 100, 500 और 1000 रुपए के नोटों को मिलाकर कुल 15 से 20 लाख रुपए तक कैश एक बार में भरा जाता है। लेकिन अब चूंकि 100 रुपए के नोट ही रखे जा रहे हैं। ये एक बार में चार लाख से ज्यादा नहीं आ सकते।
इसलिए भी लगेगा ज्यादा वक्त
– दरअसल, एटीएम को नए नोटों के हिसाब से तैयार करने में नया सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने से ज्यादा वक्त लगता है।
– एक इंजीनियर एक दिन में दो या तीन एटीएम ही नए नोटों के हिसाब से तैयार कर पाएगा। देश में दो लाख से ज्यादा एटीएम हैं। इसका मतलब ये हुआ कि 10 हजार इंजीनियर मिलकर ये काम 10 दिन से कम में पूरा नहीं कर पाएंगे।
जेटली ने क्या कहा?
– एटीएम फंक्शनिंग के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा, “इतनी बड़ी संख्या में जो लोग आए और आएंगे, उनसे केवल इतनी अपील है कि ये 30 दिसंबर तक डिपॉजिट एक्सचेंज की सुविधा है। आने वाले दिनों में भीड़ छंटेगी। बाद में आएं सुविधा होगी।”
2- “टेक्नॉलजी की वजह से लिमिटेशंस हैं, क्योंकि सीक्रेसी रखनी पड़ती है। जब तक डिसीजन हुआ और इसे सार्वजनिक किया गया। दो लाख एटीएम मशीनों को पहले रीकैलिबरेट नहीं किया गया। क्योंकि, इस काम में हजारों लोग लगते हैं। इस वजह से सीक्रेसी नहीं रहती।”
– “पैसा डालना, रीकैलिबरेट करना, पुराने 100 रुपए 500 और हजार के लिए कैलिबरेटेड थे। 2 से 3 सप्ताह का समय लगता है रीकैलिबरेट करने का। इसलिए जो नए नोट आए हैं.. उनका साइज अलग है। धीरे-धीरे रीकैलिबरेट किए जा रहे हैं।”
अमित शाह ने क्या कहा- एटीएम तो मशीन हैं, इनसान तो नहीं
– बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट अमित शाह से जब एटीएम में आ रही दिक्कतों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा- ATM मशीन है मानव नहीं। इसके अंदर जो नोट होते हैं उसके साइज के हिसाब से वो ऑपरेट होता है। जो नए नोट बनाए गए हैं उनका वजन और साइज अलग है.।
– शाह के मुताबिक- व्यवस्था बदलने में थोड़ा वक्त लगेगा। सौ-सौ के नोट ATM में मौजूद हैं लेकिन ये ATM में ज्यादा आ नहीं सकते। जल्दी खत्म हो जाते हैं। इसलिए जब तक व्यवस्था नहीं बदल जाती तब तक थोड़ी तकलीफ जरूर होगी।
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