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नक्सली हमले में शहीद मप्र के जांबाज कमांडो मनोज का बुधवार को उसके गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

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बिहार में हुए नक्सली हमले में शहीद मप्र के जांबाज कमांडो मनोज का बुधवार को उसके गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान बहादुर जवान को विदाई देने हजारों लोग पहुंचे। इससे पहले सुबह पार्थिव देह को गया(बिहार) से पटना और फिर वहां से नागपुर के रास्ते परासिया तहसील के परमंडल लाया गया। अंतिम संस्कार गृह ग्राम परमंडल के मोक्षधाम में उसके छोटे भाई संजय ने किया। इस दौरान CRPF बिहार के डीआईजी एपी सिंह, सीएम शिवराज सिंह चौहान की तरफ से गौ संवर्धन बोर्ड के उपाध्यक्ष संतोष जोशी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
परमंडल के मनोज चौरे (28) ने औरंगाबाद के डुमरी गांव में सोमवार रात हुए नक्सली हमले में जमकर मोर्चा संभाला। सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन में पदस्थ मनोज के शहीद होने की खबर मंगलवार सुबह 8.30 बजे जैसे ही गांव पहुंची तो सन्नाटा पसर गया। गांव सदमे में था पर गर्व था कि बेटे ने नक्सलियों से मोर्चा लिया। मनोज के छोटे भाई संजय ने बताया 2009 में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन में भर्ती हुई थी। घर पर आते थे तो बटालियन की वीरता की बातें ही होती थी। जून में मनोज 15 दिन की छुट्टी में घर आया था। 26 जून को रिश्तेदारों और ग्रामीणों को स्वस्थ रहना खुश रहने की सीख देकर डयूटी पर गया था।
यह है मामला…
बिहार के औरंगाबाद-गया जिले के बॉर्डर पर सोनदाहा के जंगल में नक्सलियों ने सोमवार दोपहर लैडमाइन्स में ब्लास्ट कर दिया था। सर्च ऑपरेशन पर निकले कमांडोज ने इसके बाद नक्सलियों के साथ एनकाउंटर शुरू किया, जो देर रात तक चला। इस दौरान 10 जवान शहीद हो गए। इनमें मप्र के बैतूल जिले की मुलताई तहसील का रहने वाला जवान मनोज चौरे भी शहीद हो गया।
सुबह टीवी देखकर ही दहल गया था पिता का दिल
पिता रामदयाल ने बताया मंगलवार सुबह टीवी पर नक्सली हमले का समाचार देखा तो सन्न रह गए। तभी से डर लगने लगा था कहीं बेटे को कुछ न हुआ हो। थोड़ी देर बार खबर ही आ गई कि, मेरा बेटा शहीद हो गया।
दो दिन पहले ही फोन पर पूछे थे मां का हाल
मां कमला बाई बेटे को याद करके सिसकती रही। बस यही पूछती रही कहां है मेरा लाल। दो दिन पहले ही तो मनोज ने फोन पर उसने हाल पूछे थे। उसे सब की चिंता थी उसकी चिंता किसी ने नहीं की। पिता रामदयाल ने कहा बेटे के जाने का दुख है लेकिन उसकी देश सेवा पर गर्व है।
मनोज पर ही थी परिवार की जिम्मेदारी
मनोज पुत्र रामदयाल चौरे CRPF की 205 कोबरा औरंगाबाद बटालियन का जवान था। किसान पिता की संतान मनोज की अभी शादी नहीं हुई थी, लेकिन घरवाले जल्द शादी का सपना संजोये बैठे थे। मनोज CRPF में 2009 में भर्ती हुआ था। पांच एकड़ की कृषि भूमि वाले किसान रामदयाल चौरे के शहीद पुत्र मनोज पर ही परिवार की जिम्मेदारी थी। गांव में रामदयाल और मनोज के छोटे भाई संजय खेती संभालते हैं। मनोज हाल ही में 26 जून को छुट्टी बिताकर गांव से ड्यूटी के लिए रवाना हुआ था। रामदयाल की अपने बेटे से दो दिन पहले ही बात हुई थी और उसने अपनी मां के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी भी ली थी। घर में मां कमलाबाई के अलावा एक छोटा भाई संजय और बहन कल्पना है। एक बहन बाली की शादी हो चुकी है। सभी मनोज के शहीद होने की खबर सुनकर जहां गमगीन हैं, वहीं उन्हें इस बात पर गर्व भी है कि, वो अपना फर्ज निभाते हुए शहीद हुआ। स्थानीय लोगों के मुताबिक, मनोज हंसमुख और मिलनसार व्यक्ति था।
-बरकतउल्ला विवि (भोपाल) से ग्रैजुएशन करने वाला मनोज अपनी ड्यूटी के बीच फुर्सत के पलों को फोटो के रूप में अकसर एफबी पर शेयर करता था। खतरों के बीच ड्यूटी करने के बावजूद उसका हर फोटो मुस्कुराता नजर आता था।
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