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महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ से बड़ी राहत मिली

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महू विधायक व भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ से बड़ी राहत मिली है। उनके निर्वाचन के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को हाई कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया है। विजयवर्गीय पर चुनाव प्रचार के दौरान मोहर्रम के जुलूस में मैडल-ट्रॉफी बांटने, विधायक प्रतिनिधि द्वारा अवैध शराब बांटने और पेंशनपुरा बस्ती में आरती के बाद महिलाओं को 1000, 500 के नोट बांटने के आरोप में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने तीनों आरोप को खारिज कर दिया। अब याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करेंगे।

– जस्टिस आलोक वर्मा की बेंच के समक्ष इस याचिका पर सुनवाई हुई। लगभग सवा महीने पहले हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को जस्टिस वर्मा की कोर्ट खचाखच भरी हुई थी। याचिकाकर्ता अंतरसिंह दरबार और विजयवर्गीय के समर्थक दोपहर सवा दो बजे से ही कोर्ट रूम में जाकर बैठ गए थे। वकील भी बड़ी संख्या में थे।

वकीलों ने पढ़ा जजमेंट :

हाई कोर्ट ने फैसला लिखने के बाद दोनों पक्षों के वकीलों के पास भेज दिया। दोनों पक्षों के वकीलों ने जजमेंट पढ़ा और कोर्ट रूम से बाहर आकर याचिका खारिज होने की जानकारी दी।

यह भी जानिए
– 20 जनवरी 2014 को चुनाव याचिका जस्टिस वर्मा के समक्ष ही दायर हुई थी। फिर उनकी कोर्ट से चुनाव याचिका को जस्टिस जरतकुमार जैन की बेंच के पास भेज दिया था। उनके रिटायर होने के बाद फिर जस्टिस वर्मा के पास मामला आया था।

विजयवर्गीय एक बार, दरबार हर बार आए
– याचिका दायर होने के बाद विजयवर्गीय केवल एक बार (प्रतिपरीक्षण के दिन) हाई कोर्ट में आए जबकि याचिकाकर्ता व पूर्व विधायक दरबार हर सुनवाई पर उपस्थित रहे।

कोर्ट ने यह लिखा जजमेंट में

– हाई कोर्ट ने माना कि चुनाव के दौरान विधायक प्रतिनिधि कमल पटेल की कार में शराब भरी हुई थी…

…लेकिन यह साबित नहीं हो रहा कि वह शराब महू चुनाव में मतदाताओं को बांटने के लिए लाई गई थी।
– हाई कोर्ट ने माना कि विजयवर्गीय ने चुनाव प्रचार के दौरान मोहर्रम के जुलूस में मैडल, ट्रॉफी बांटे…
…लेकिन उनका ऐसा करना करप्ट प्रैक्टिस, (वोट के लिए प्रलोभन) या कदाचरण के विपरीत गतिविधि के दायरे में नहीं आता।
– हाई कोर्ट ने माना कि महू की पेंशनपुरा बस्ती में महिलाएं विजयवर्गीय की आरती कर रही थीं…
…लेकिन यह साबित नहीं हो रहा कि आरती के बाद विजयवर्गीय ने उन्हें हजार, पांच सौ के नोट दिए।

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