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मां नर्मदा के अमृत रूपी जल में जहर घुलने लगा है

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मां नर्मदा के प्रति लोगों की श्रद्धा िकसी से छुपी नहीं है। िदनों-िदन नर्मदा तटों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा बढ़ता ही जा रहा है। उसके बावजूद तटों तक पहुंचने वाले कम ही लोग नर्मदा जल से आचमन करना पसंद करते हैं। अधिकांश तट पर खड़े होकर नर्मदा जल हाथ में लेकर नमन कर लेते हैं। इसकी वजह नर्मदा का हद दर्जे तक प्रदूषित होना है। छोटे-बड़े गांव िमलाते हुए सौ से अधिक नाले मां नर्मदा में समाहित हो रहे हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर दिनों-िदन बढ़ रहा है।
– प्रदेश की जीवन रेखा कहीं जाने वाली नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए भारत सरकार ने मध्य प्रदेश को 15 करोड़ रुपयों की सहायता दी है। इसके अलावा राज्य सरकार भी नर्मदा जल को प्रदूषण से बचाने के लिए कई प्रकार के खर्चीले उपाय कर रही है। उसके बाद भी हालात जस के तस ही हैं। पानी एक दम मटमैला हो गया है। दूर तक कहीं भी मां नर्मदा स्वच्छ नहीं दिखती हैं। इधर आश्चर्य की बात ये है िक मप्र प्रदूषण िनयंत्रण की रिपोर्ट में प्रदूषण होता ही नहीं है। ये भी वे एक िवचारणीय प्रश्न है।
 ये भी एक वजह
इधर नर्मदा तटों पर बसे छोटे-छोटे गांव, छोटे-बड़े शहरों, छोटे-बड़े औद्योगिक उपक्रमों और रासायनिक खाद और कीटनाशकों के प्रयोग से की जाने वाली खेती के कारण उद््गम से सागर विलय तक नर्मदा प्रदूषित हो गई है और नर्मदा तट पर तथा नदी क्षेत्र में वनों की कमी के कारण आज नर्मदा में जल स्तर भी 20 वर्ष पहले की तुलना में घट गया है। आने वाले समय में नर्मदा का जल स्तर लगातार घटने के कयास लगाए जा रहे हैं, जाे एक गंभीर समस्या है।पी-3
 क्षारीय हो चुका पानी अब पीने योग्य नहीं
कई स्थानों पर जल में क्लोराईड और घुलनशील कार्बन डाईऑक्साइड का आंकलन अधिक पाया गया है। इससे िनष्कर्ष निकलता है िक ये पानी िकतना क्षारीय हो चुका है। कुछ स्थानों पर जल घातक रूप से प्रदूषित पाया गया। भारतीय मानक संस्थान ने पेयजल में पीएच 6.5 से 8.5 तक का स्तर तय किया है, इससे स्पष्ट है कि नर्मदा जल पीने योग्य नहीं है और इस प्रदूषित जल को पीने से नर्मदा क्षेत्र में गरीब और ग्रामीणों में पेट से संबंधित कई प्रकार की बीमारियां फैल रही हैं, इसे सरकारी स्वास्थ्य विभाग भी स्वीकार करता है। जनसंख्या बढ़ने, कृषि तथा उद्योग की गतिविधियों के विकास और विस्तार से जल स्त्रोतों पर भारी दबाव पड़ रहा है।
– गर्मी के मौसम में मध्य प्रदेश में नर्मदा तट के ही कई गांव और शहरों में भीषण जल संकट की स्थिति निर्मित हो जाती है। ऐसे में नर्मदा जल को प्रदूषण से बचाने के उपाय गंभीरता से नहीं हो रहे हैं, यह एक गंभीर चिन्ता का विषय है।
– जानकारों का कहना है कि हाल के वर्षों में जिस तरह से नर्मदा के आसपास के पर्यावरण को दूषित करने का प्रयास किया गया है, उससे जीवनदायिनी के अस्तित्व पर ही अब प्रश्न चिन्ह लगने लगे हैं। मां नर्मदा के अमृत रूपी जल में जहर घुलने लगा है, जो वर्तमान और भविष्य के लिहाज से विकराल समस्या बन सकता है।
– निर्मल जल का क्षारीय होने का अर्थ है कि गंदगी और जहरीला पानी नदी के पावन जल की गुणवत्ता को लील रहा है, वहीं रासायनिक प्रक्रियाओं से मां नर्मदा के जल में क्लाइड और कार्बन डाय ऑक्साइड खतरनाक स्तर तक बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है।
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