राज्य शासन ने विवि में धारा 52 लगाकर कुलपति प्रो. मुरलीधर तिवारी को हटा दिया

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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में पिछले एक साल से चल रही धारा 52 लगाने की सुगबुगाहट शुक्रवार को समाप्त हो गई। राज्य शासन ने विवि में धारा 52 लगाकर कुलपति प्रो. मुरलीधर तिवारी को हटा दिया है। इससे दो दिन पहले ही प्रो. तिवारी ने इस्तीफा राजभवन को भेज दिया था। लेकिन राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। दो दिन चली इस कवायद के बाद राज्य शासन ने शुक्रवार दोपहर 12.20 मिनट पर कुलपति को हटाकर धारा 52 लगाने के आदेश विवि को फैक्स से भेज दिए। डिप्टी रजिस्ट्रार ने कुलपति को इस आदेश प्रति कर्मचारी के माध्यम से भिजवाई। आदेश मिलते ही कुलपति कमरे से पीछे के रास्ते निकल गए। इससे पहले छात्रों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की। वहीं दोपहर तीन बजे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विवि में पटाखे फोड़े और मिठाई बांटी। प्रो. तिवारी अप्रैल 2014 में बीयू के कुलपति बने थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2018 में समाप्त होना था। प्रो. तिवारी पर कार्यकाल के दौरान आर्थिक और प्रशासनिक अनियमिततता के गंभीर आरोप लगे थे। उनके खिलाफ राज्य शासन, राजभवन व मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ ही प्रधानमंत्री ऑफिस तक से शिकायत हुई थी। इसके बाद राजभवन ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अभय गोहिल की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी थी। हालांकि, राजभवन ने यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है।
क्या है धारा 52
विवि एक्ट के अनुसार जब किसी कुलपति के कार्यकाल में प्रशासनिक व आर्थिक अनियमितता होना साबित होता है तब राज्य शासन राजभवन की सहमति मिलने के बाद कुलपति को हटाकर विवि में धारा 52 लगाती है। इसकी अवधि अधिकतम दो साल की हो सकती है।
इन आरोपों के चलते विवादों में थे वीसी
-सितंबर 2014 में विवि ने 12 वीं पंचवर्षीय योजना के तहत प्राप्त अनुदान की राशि से 30 शैक्षणिक व 5 प्रशासनिक पद सृजन कर चयन प्रक्रिया आयोजित की। इसमें सबसे ज्यादा विवाद 10 असिस्टेंट प्रोफेसर और 1 असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर हुई नियुक्तियों को लेकर उठा था। आरोप था कि विवि को यह पद न तो यूजीसी से मिले थे और न ही राज्य शासन से स्वीकृत थे।
-वर्ष 2015 में स्टेम सेल पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में भी आर्थिक अनियमितता हुई थी। चार दिन की इस कांफ्रेंस में करीब 34 लाख रुपए का खर्चा आया था। इसमें 18 लाख रुपए हवाई यात्रा पर, एक लाख टैक्सी पर, 8 लाख खाने पर, 2.50 लाख आवास पर, दो लाख प्रिंटिंग व दो लाख अन्य खर्चों पर व्यय किए गए। सारे काम बिना टेंडर व क्रय प्रक्रिया के ही किए गए थे।
बीयू में कब-कब हुई यह कार्रवाई
वर्ष कार्यकाल
1998 केसी मेहरा
1990 केएस ढिल्लन
1993 केसी नायर
2000 एमएस सोढा
2008 भूपाल सिंह
2017 एमडी तिवारी
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