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लड़की के नहीं हैं दोनों हाथ, फिर भी यूं किया कमाल

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मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एग्जाम में फर्स्ट डिविजन लाने वाली दिव्यांग छात्रा दुर्गा को कृत्रिम हाथ लगवा दिए गए हैं। दुर्गा के बचपन से ही दोनों हाथ नहीं थे, इसके बावजूद उसने 10वीं के एग्जाम में 600 में से 395 अंक हासिल कर एक मिसाल कायम की थी।
लगे कृत्रिम हाथ…
दमोह जिले के तेंदूखेड़ा SDM डॉ. सीपी पटेल ने छात्रा की मदद का आश्वासन दिया था और इस बारे में कलेक्टर को जानकारी दी थी। कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने तय किया कि छात्रा को कृत्रिम अंग लगवाए जाएंगे। आखिरकार यह काम हो गया।
मंत्री ने की एक लाख देने की घोषणा
-19 मार्च को जिला स्तरीय अंत्योदय मेले में कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने वित्तमंत्री जयंत मलैया को दुर्गा के बारे में बताया था।
-वित्तमंत्री ने दुर्गा से मिलकर मेले में ही छात्रा को एक लाख रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी।
-मंत्री ने उसे आश्वासन दिया था कि जब भी उसे पढ़ाई के लिए जरूरत हो वह उनसे सीधे मिल सकती है।
-मंत्री के निर्देश के बाद छात्रा को उदयपुर ले जाया गया था, लेकिन वहां इलाज संभव नहीं हुआ। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने इंदौर भेजकर दुर्गा को कृत्रिम हाथ लगवाए।
– एमपी के दमोह जिले के बम्हौरी ग्राम की दोनों हाथों से दिव्यांग स्टूडेंट दुर्गा ने 10वीं की एग्जाम में पहला स्थान हासिल किया था।
– उसने हाथ न होने पर अपने पैरों से लिखकर पेपर दिया और फ़र्स्ट डिवीजन से एग्जाम क्लियर किया था।
– यह कारनामा करने वाली दुर्गा लोधी ने 600 में से 395 मार्क्स हासिल किए थे। जबकि, साइंस में उसे डिस्टिंक्शन मिला है।
– एग्जाम देने से पहले दुर्गा ने था, ‘परीक्षा में फेल हो जाऊं या पास, पर पढ़ने का जुनून हमेशा कायम रखूंगी।’
– आम बच्चे अपने हाथों से पेपर हल कर परीक्षा में पास नहीं हो पाते हैं, ऐसे में दुर्गा की अचीवमेंट किसी मिसाल से कम नहीं है।
बचपन से नहीं थे हाथ
– दुर्गा के बचपन से ही दोनों हाथ नहीं थे। वह सभी काम अपने पैरों से करती थी।
– उसने पहली से 10वीं तक पैरों से ही लिखाई की है एवं परीक्षा के पेपर भी अपने पैरों से हल किए थे। कभी भी किसी दूसरे लिखने वाले से हेल्प नहीं ली।
-दुर्गा ने कहा था कि, ‘मेरा लक्ष्य है कि मैं किसी पर बोझ न बनूं सहजता से ही स्वयं अपना जीवन यापन कर सकूं।’
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