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सेना का लड़ाकू विमान तेजस बुधवार को चार घंटों के लिए भोपाल स्थित राजा भोज एयरपोर्ट पर

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सेना का लड़ाकू विमान तेजस बुधवार को चार घंटों के लिए भोपाल स्थित राजा भोज एयरपोर्ट पर रूका था। यह नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के आधुनिक लड़ाकू विमान को दिया था जो महीनेभर पहले वायुसेना में शामिल किया गया। वजन में हल्के और खूबियों से भरे इस विमान ने बुधवार दोपहर 12 बजे भोपाल के आकाश में अपनी जोरदार आवाज के साथ आमद दी।

बेंगलुरू से लेह जा रहे तेजस का राजाभोज डोमेस्टिक एयरपोर्ट पहला हाल्ट था। खास बात यह है कि तेजस की कमान शहर के ही एक युवा के हाथों में थी। ग्रुप कैप्टन एसके आनंद इसे लेह ले जा रहे हैं। विमान एयरपोर्ट पर लैंड हुआ और चार घंटे तक ठहरा रहा। एयरपोर्ट डायरेक्टर आकाशदीप माथुर के मुताबिक विमान ने यहां से पठानकोट के लिए उड़ान भरी।
33 साल पहले शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
– अगस्त 1983 में एलसीए (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी।
– 1986 में सरकार ने देश में फाइटर प्रोजेक्ट के लिए 575 करोड़ मंजूर किए थे।
– प्रोजेक्ट के 33 साल बाद देश को यह फाइटर मिला है।
– एलसीए प्रोग्राम को मैनेज करने के लिए 1984 में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एलडीए) बनाई गई थी।
– 1986 में तब की कांग्रेस सरकार ने भारत में फाइटर प्लेन बनाने के लिए 575 करोड़ रुपए सेंक्शन किए थे।
– 4 जनवरी, 2001 में तेजस ने पहली उड़ान भरी।
– 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी ने फाइटर को ‘तेजस’ नाम दिया। यह संस्कृत शब्द है। इसका अर्थ पावरफुल एनर्जी होता है।
– जनवरी 2011 में इसे पहली बार मल्टीरोल और फाइटर परपज में लाने की बात हुई।
– दिसंबर 2013 में सिंगल इंजन वाले तेजस को शुरुआती ऑपरेशनल क्लीयरेंस मिली।

क्यों पड़ी तेजस की जरूरत?
– एयरफोर्स के पास महज 33 स्क्वॉड्रन बची हैं। एक स्क्वॉड्रन में 16-18 फाइटर प्लेन्स होते हैं।
– इन 33 में से 11 स्क्वॉड्रन्स में MiG-21 और MiG-27 फाइटर हैं।
– इनमें से भी सिर्फ 60 फीसदी ही ऑपरेशन के लिए तैयार हैं।
– मिग-21 और मिग-27 की हालत बहुत अच्छी नहीं है। इनमें हादसे होते रहे हैं।
– एक्सपर्ट्स की मानें तो चीन-पाकिस्तान के खतरे को देखते हुए भारत को 45 स्क्वॉड्रन चाहिए।
– तेजस 34th स्क्वाॅड्रन है। फ्रांस से राफेल मिलने पर वह 35th स्क्वॉड्रन होगी।

क्या है खास?
– तेजस एयर-टू-एयर और एयर-टू-सरफेस मिसाइल दागने में कैपेबल है।
– साथ ही इससे एंटीशिप मिसाइल, बम और रॉकेट को भी दागा जा सकता है।
– तेजस 42% कार्बन फाइबर, 43% एल्यूमीनियम अलॉय और टाइटेनियम से मिलकर बनाया गया है।
– तेजस फाइटर सिंगल सीटर और इसका ट्रेनर वेरिएंट 2 सीटर है।
– अब तक यह कुल 3184 बार उड़ान भर चुका है।
– तेजस 50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।
– तेजस की डेवलपमेंट कॉस्ट 7 हजार करोड़ रही।

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