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हाथों में मिट्टी और गेहूं लेकर पहुंचे कांग्रेसियों ने सदन में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की

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मप्र विधानसभा में चल रहे मानसून सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस विधायकों ने जमकर हंगामा किया। हाथों में मिट्टी और गेहूं लेकर पहुंचे कांग्रेसियों ने सदन में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उधर, कांग्रेस के हंगामे के बाद विधानसभा की कार्रवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विधानसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने ये मुद्दा उठाया। कांग्रेस विधायक अपने साथ मिट्टी मिले अनाज के पैकेट भी लाए थे। शून्यकाल के दौरान कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि राजधानी में बाढ़ पीड़ितों को मिट्टी मिला खराब अनाज बांटा गया है। उन्होंने इस मामले में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे से जवाब मांगा। इसी बीच भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र से सत्तारूढ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक और पूर्व गृह मंत्री बाबू लाल गौर ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों के समर्थन में अपनी बात कही। इसके बाद उपनेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन ने प्रदेश में पिछले दिनों आई भारी बारिश के कारण लोगों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया। पूरे घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस के अन्य विधायकों का खराब अनाज के मुद्दे पर हंगामा चलता रहा और उन्होंने इसके बाद सदन से बहिर्गमन कर दिया।  सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले मीडिया से चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ पीड़ितों के साथ धोखा कर रही है। जरूरतमंद लोगों को गेहूं में मिट्टी मिलाकर दे रही है, ये तो भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है। कांग्रेसियों के सवाल के जवाब में मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जो गेहूं बाढ़ पीड़ितों को बांटा गया था वह किसानों से ही खरीदा गया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बनाए गए ओमप्रकाश धुर्वे ने विधानसभा में स्वीकार किया कि पूरे प्रदेश में फर्जी राशनकार्ड की शिकायतें हैं। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के विधायक अशोक रोहाणी ने राशन वितरण में गड़बड़ियों की शिकायत करते हुए पूछा कि राशन के लिए कितनी बार समग्र आईडीकार्ड और आधार कार्ड देना पड़ता है। इस पर मंत्री ने कहा कि आधार कार्ड एक बार ही देना पड़ता है। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट प्रश्नकर्ता विधायक ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में लोगों को राशन के लिए भटकाया जा रहा है। इस पर धुर्वे ने कहा कि फर्जी राशनकार्ड की शिकायतें पूरे प्रदेश में हैं, इसके चलते ये निर्देश दिए जाएंगे कि पात्रता पर्ची समस्त योग्यताएं पूरी होने पर ही जारी की जाएं।
ये था पूरा मामला…
राजधानी में बाढ़ राहत की पहली किस्त जरूरतमंदों के बीच मंगलवार को बांटी गई थी। पीड़ितों को गेहूं की जो बोरियां दी गई थीं, उन्हें खोलते ही मिट्टी सामने आई। 50-50 किलो गेहूं की बोरियों में 20-20 किलो मिट्टी मिली हुई थी। अफसरों को शिकायत हुई। नेता दौड़े-भागे बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे। शुरुआती जांच के बाद ही कलेक्टर निशांत वरवड़े ने माना कि गेहूं में मिट्टी मिली थी। उन्होंने मामले की जांच के आदेश के साथ ही आनन-फानन में पीड़ितों से गेहूं को वापस लेकर दूसरा गेहूं देने के आदेश जारी कर दिए।
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