About us

11 जुलाई को सरकार को स्पष्ट करना है कि वह दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को कितना और कब से नियमित वेतनमान देगी

0
मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेशाध्यक्ष अशोक पांडे ने बताया कि दैनिक वेतन भोगियों को नियमित वेतनमान देने में लेटलतीफी को लेकर उनके संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका लगाई है। जिस पर 11 जुलाई को अंतिम सुनवाई है। सुप्रीम कोर्ट में 11 जुलाई को सरकार को स्पष्ट करना है कि वह दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को कितना और कब से नियमित वेतनमान देगी।

सुप्रीम कोर्ट में जवाब देने के लिए हाल ही में मुख्य सचिव अंटोनी डिसा ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों की बैठक ली है। मंत्रालय सूत्रों की मानें तो प्रदेश सरकार ने कैबिनेट में फैसले के लिए प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है। इस फैसले से सरकार पर सालाना 58 करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की याचिका पर 21 जनवरी 2015 को नियमित करने का फैसला सुनाया था। जब सरकार ने 8 माह तक कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया, तो प्रदेश कर्मचारी मंच सहित अन्य संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका लगायी थी। जिसमें मुख्य सचिव से लेकर 7 विभागों के प्रमुख सचिवों को पक्षकार बनाया गया था।

18 मार्च को पहली सुनवाई में सभी अफसरों को कोर्ट में उपस्थित होना पड़ा था। अफसरों ने आदेश का पालन करने के लिए कुछ समय मांगा। इस पर कोर्ट ने 25 अप्रैल को हलफनामा पेश करने को कहा था। इसके बाद 13 मई का समय दिया और अब 11 जुलाई को सुनवाई होना है। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अंतिम सुनवाई होगी, जिसमें सरकार को हलफनामा देकर साफ करना है वह दैनिक वेतन भोगियों के मामले में क्या फैसला लेनी वाली है।

Share.

About Author

Leave A Reply