2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अमित शाह ने 360+ सीटें लाने का लक्ष्य नेताओं को दिया

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बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अभी से टारगेट तय कर लिया है। अमित शाह ने 360+ सीटें लाने का लक्ष्य नेताओं को दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले के दम पर मेजॉरिटी हासिल कर 282 सीटें जीती थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी प्रेसिडेंट ने केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी नेताओं से उन सीटों पर खासतौर पर फोकस करने को कहा है जहां बीजेपी को पिछले चुनाव के दौरान हार मिली थी।
– बताया जा रहा है कि शाह ने बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों की अचानक बुलाई गई बैठक में इस टारगेट के बारे में बताया। मिशन 360+ में फोकस उन 150 सीटों पर रहेगा जहां पार्टी 2014 में चुनाव नहीं जीत पाई थी। तेलंगाना, आंध्र और बंगाल में पार्टी ज्यादा फोकस करेगी।
– बता दें कि गुरुवार को ही बंगाल के 7 निकायों के चुनाव नतीजे आए। इनमें सभी पर तृणमूल ने जीत दर्ज की लेकिन बीजेपी यहां लेफ्ट और कांग्रेस को पीछे छोड़कर दूसरे नंबर की पार्टी रही।
2014 में ये थे नतीजे
पार्टी सीटें वोट शेयर
BJP 282 31.3%
CONG 44 19.5%
AIADMK 37 3.3%
TRINMOOL 34 3.9%
BJD 20 1.7%
देश में अभी क्या है बीजेपी की स्थिति…
1) 70% आबादी, 58% इकोनॉमी पर बीजेपी का शासन
– आज देश के 13 राज्यों में बीजेपी सत्ता में है। पांच राज्यों में सहयोगी दलों की सरकार है। इस तरह कुल 17 राज्यों में बीजेपी सरकार चला रही है।
– बीजेपी को 2014 में लोकसभा चुनाव में 282 सीटें मिली थीं। सबसे ज्यादा 71 सीटें यूपी से मिली थीं, जहां इसी साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद उसी की सरकार है।
– जेडीयू के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने के बाद अब बीजेपी देश की 70% आबादी और 58% इकोनॉमी पर शासन कर रही है, ऐसा मुकाम पहली बार हासिल किया है।
– बीजेपी देश के प्रमुख राज्यों में आगे बढ़ रही है। उसकी अलायंस पार्टियां 12 में से 7 राज्यों में सत्ता में हैं।
2) जहां सरकार में शामिल नहीं, वहां 71 सांसदों वाली पार्टियों से भी सपोर्ट
– तमिलनाडु और ओडिशा जैसे स्टेट्स में बीजेपी की सरकार नहीं है। तमिलनाडु में AIADMK और ओडिशा में BJD की गवर्नमेंट है। लेकिन, इन दोनों पार्टियों का झुकाव भी बीजेपी की ओर ही दिख रहा है।
राष्ट्रपति चुनाव में भी दोनों पार्टियों ने एनडीए के कैंडिडेट रामनाथ कोविंद के पक्ष में ही वोट डाले थे।
– 2014 में AIADMK ने तमिलनाडु में 37 और BJD ने ओडिशा ने 20 लोकसभा सीटें जीती थीं।
3) कांग्रेस के पास सिर्फ एक बड़ा स्टेट
– 130 साल पुरानी कांग्रेस के पास केवल एक बड़ा स्टेट कर्नाटक बचा हुआ है। लेकिन, यहां भी बीएस येदियुरप्पा की लीडरशिप में बीजेपी 2018 में मजबूत पोजिशन बनाने के लिए ओवरटाइम कर रही है। जिन राज्योें में नॉन-बीजेपी और कांग्रेस की सरकार है, उनमें केरल और प. बंगाल ही अहम हैं।
अमित शाह ने तीन साल में कैसे पार्टी को आगे बढ़ाया?
a) रोज 541 किमी का सफर, 500 रैलियां

– अमित शाह ने तीन साल में देश के हर राज्य का दौरा किया। ज्यादातर सफर सड़क से किया। औसतन रोज 541 km का सफर किया। तीन साल में 500 से ज्यादा रैलियां कीं। देशभर में 110 दिनों का सघन प्रवास करने वाले बीजेपी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने।
b) पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए पहल
– शाह ने वर्कर्स और पार्टी का वोट बेस बढ़ाने के लिए पहली बार ओबीसी मोर्चा का गठन किया।
– जनसंवाद नाम से कार्यक्रम शुरू किया। अब कोई भी वर्कर पार्टी नेताओं से बिना अपॉइंटमेंट लिए मिल सकता है।
– 8 लाख से अधिक वर्कर्स को घर के पास स्थित ब्लॉक, जिले में ट्रेनिंग की सुविधा दी। इससे बूथ लेवल तक डेडीकेटेड वर्कर मिलने शुरू हो गए।
– आरएसएस की तर्ज पर फुल टाइम वर्कर्स का कॉन्सेप्ट लेकर आए। इसके तहत 4 लाख वर्कर्स शामिल किए गए।
– इन 4 लाख वर्कर्स ने 15 दिन, 6 महीने और एक साल के लिए घर से दूर रहकर अनजान जगहों पर पार्टी के लिए दिन-रात काम करने का फैसला किया।
c) ऐसे बढ़ाई पार्टी की पॉपुलैरिटी
– शाह ने जनता के करीब आने के लिए कहा, “बड़े नेता हवाई सफर की जगह रेल या सड़क मार्ग से ही सफर को प्रायोरिटी दें।”
– “कहीं रात को रुकना पड़े तो होटल के बजाय शोषित या वंचित वर्ग के वर्कर के घर ही रुकें नेता।”
– “देश के हर हिस्से में वर्कर्स के लिए घरों के पास ही ट्रेनिंग कैम्प ऑर्गनाइज किए गए, ताकि समय का सही इस्तेमाल हो।”
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