About us

48 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर

0

प्रदेश के 48 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह समान कार्य के लिए समान वेतन देने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पंद्रह अगस्त को इस संबंध में घोषणा कर सकते है। ऐसा हुआ तो चालीस साल बाद प्रदेश के सभी दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को एकमुश्त नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन मिल सकेगा और नौकरी की गारंटी भी मिलेगी।
वित्त मंत्री जयंत मलैया, सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य की मंत्रिपरिषद समिति की बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार किया गया। प्रदेश के  दैनिक वेतन भोगी, मस्टरकर्मियों को अभी कलेक्टर दर पर वेतन दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग,जलसंसाधन विभाग,पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, वन विभाग सहित कुल बारह विभागों में ये कर्मचारी कार्यरत है। राज्य सरकार एक बार वर्ष 2004 में हटाए गए दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को बहाल कर चुकी है। लेकिन उसके बाद से अभी तक इन कर्मचारियों के हित में कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है।

जनसंकल्प में शामिल है दैवेभो का मुद्दा
भाजपा सरकार के जनसंकल्प में भी दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन देने अथवा उनके नियमितिकरण करने का प्रस्ताव है। सालों बाद यदि राज्य सरकार यह निर्णय लेती है तो प्रदेश के 48 हजार कर्मचारियों के लिए यह सबसे बड़ा तोहफा होगा। मंत्रालय में हुई मंत्रियों और अफसरों की बैठक में सभी निर्माण विभागों के अधिकारियों से यह जानकारी मांगी गई है कि उनके यहां किन-किन पदों पर कब से कितने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी काम कर रहे है। इन दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को वर्तमान में कितना वेतन दिया जा रहा है।

विभाग में कितने पद इस समय रिक्त चले आ रहे है जिनके विरुद्ध वे काम कर रहे है। इस बैठक में यह चर्चा हुई कि दैनिक वेतनभोगी के पद पर कितने कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल कर्मचारी कार्यरत है। इनके संबंध में वर्तमान में क्या नियम है।  इन कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के उस पद के बराबर वेतन देने पर सहमति बनी है जिस पर वे काम कर रहे है। इसके अलावा इस पर भी विचार किया गया कि क्या इन कर्मचारियों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया जा सकता  है।   इन्हें नौकरी की गारंटी दिए जाने का प्रावधान किए जाने पर भी चर्चा हुई।  सुप्रीम कोर्ट से रिलीफ पाने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की तरह ही अन्य सभी कर्मचारियों को इसका लाभ देने पर विचार किया गया। इंडस्ट्रियल एक्ट के प्रावधानों की तरह इन कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन दिए जाने पर चर्चा हुई।

प्रदेश के 48 हजार दैनिक वेतन भोगी, मस्टरकर्मियों को नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन और सुविधाएं देने पर विचार चल रहा है। सरकार का मानना है कि समान कार्य के लिए समान वेतन मिलना चाहिए। इसको लेकर दस से बारह अगस्त के बीच एक बैठक और होगी उसमें इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जयंत मलैया, वित्त मंत्री

नियमित पदों के विरुद्ध काम कर रहे कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को भी एक ग्रेड बनाकर नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन और अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिए जाने पर चर्चा हुई है। सरकार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के हितों के लिए गंभीर है और यह निर्णय उनके लिए एक बेहतर निर्णय साबित होगा।
लाल सिंह आर्य, राज्य मंत्री सामान्य प्रशासन विभाग

Share.

About Author

Leave A Reply