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VIP रोड से खानूगांव तक बनाई गई 2.8 किमी लंबी रिटेनिंग वॉल निर्माण में गड़बड़ी

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बड़े तालाब के किनारे VIP रोड से खानूगांव तक बनाई गई 2.8 किमी लंबी रिटेनिंग वॉल निर्माण में गड़बड़ी पर लोकायुक्त ने पूर्व गृहमंत्री बाबूलाल गौर, पूर्व महापौर कृष्णा गौर सहित तीन IAS अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज की है। उल्लेखनीय है कि दीवार को बड़े तालाब के अस्तित्व के लिए खतरा माना गया था। मुख्यमंत्री ने खुद इसे तोड़ने के आदेश दिए थे। इस दीवार के निर्माण पर बेवजह 8 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए।
कोर्ट पहुंचा मामला…
एडवोकेट सिद्धार्थ गुप्ता ने 6 अगस्त को लोकायुक्त में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की जांच के बाद 1 अक्टूबर को पूर्व गृहमंत्री बाबूलाल गौर, पूर्व महापौर कृष्णा गौर सहित तत्कालीन BMC कमिश्नर विशेष गढ़पाले और तेजस्वी एस. नायक के अलावा वर्तमान कमिश्नर छवि भारद्वाज के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
शिकायत में कहा गया कि निगम कमिश्नर ने इस मामले में NGT में झूठा शपथ पत्र पेश किया था। इसमें कहा गया कि बड़े तालाब के भराव क्षेत्र में कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया। जबकि हाल में जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने क्षेत्र का भ्रमण किया, जहां उन्होंने दीवार के डूबे होने पर उसे तोड़ने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद अफसरों ने दीवार गिराने के बजाय उस हिस्से को मिट्टी से पूर दिया।
 लगातार हुआ था विरोध
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) की प्रोफेसर सविता राजे ने बड़े तालाब पर बन रही रिटेनिंग वॉल को खतरनाक बताया था। राजे ने कहा था कि तालाब के भीतर रिटेनिंग वॉल बनाने से तालाब की इकोलॉजी खराब होगी। उन्होंने यह भी कहा था कि पॉथ-वे के लिए रिटेनिंग वॉल की जरूरत नहीं होती।

 अतिक्रमण बचाने बना रहे दीवार
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष मो सगीर ने आरोप लगाया था कि तालाब किनारे प्रभावशाली और बड़े लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण को बचाने और उन्हें वैध करके बिल्डिंग परमिशन देेने के लिए दीवार बनाई जा रही थी। इसे रिटेनिंग वॉल का नाम दिया गया, लेकिन यह वास्तव में पार्टीशन वॉल थी।
गौर का था आइडिया…
वॉल बनाने का आईडिया तत्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर का था। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया तत्कालीन आयुक्त नगर निगम विशेष गढ़पाल और तेजस्वी नायक ने। सिटीजन्स फोरम के संयोजक हरीश भवनानी समेत कई पर्यावरण प्रेमियों का कहना था कि जनता का पैसा बर्बाद हुआ है। इसकी जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।
 सेप्ट ने बनाई थी यह योजना, रिटेनिंग वॉल का जिक्र नहीं
-उन दिनों सेप्ट यूनिवर्सिटी बड़े तालाब का मास्टर प्लान बनाने का काम कर रही थी। गौर के निर्देश पर सेप्ट ने लेक फ्रंट डेवलपमेंट के लिए जो योजना बनाई थी उसमें रिटेनिंग वॉल का जिक्र नहीं था।
मार्च 2013 : बदल गई योजना, आया रिटेनिंग वॉल का कन्सेप्ट
मार्च 2013 में जब यह पता चला कि केंद्र सरकार लेक फ्रंट डेवलपमेंट योजना को मंजूर करने जा रही है। गौर फिर दिल्ली गए और इस बार सेप्ट की बजाय दूसरी योजना पेश की। इसमें खानूगांव की तरफ हो रहे अतिक्रमण को रोकने और बोट क्लब पर भीड़ का दबाव कम करने के लिए नया बोट क्लब विकसित करने का तर्क देकर नई योजना पेश कर दी। यह प्रोजेक्ट भोपाल की एक कंपनी हुजूर डिजाइंस ने बनाया था। खास बात यह है कि इसके लिए आज तक उसे कोई पेमेंट भी नहीं किया गया।

यह था बदलाव
-वीआईपी रोड पर व्यू पॉइंट के पास से खानूगांव तक तालाब से महज 20 से 30 मीटर की दूरी पर 2.62 किमी लंबा वॉक वे और साइकल ट्रैक, वॉक वे के लिए रिटेनिंग वॉल।
– खानूगांव में टू व्हीलर और फोर व्हीलर पार्किंग
-पार्किंग के पास फूड जोन

अगस्त 2014 : साधिकार समिति की आपत्ति
सेप्ट की रिपोर्ट पर विचार के लिए 27 अगस्त 2014 को हुई साधिकार समिति की बैठक में लेक फ्रंट डेवलपमेंट का मामला भी उठा। समिति ने इस योजना पर आपत्ति जताई और सेप्ट से रिपोर्ट लेकर ही इस पर काम शुरू करने की सलाह दी गई। इसके पहले जून में बड़े तालाब से संबंधित मुद्दों पर एनजीटी में चल रहे मामले में लेक फ्रंट डेवलपमेंट का मुद्दा भी शामिल हो गया।

दिसंबर 2014 : 13 करोड़ 13 लाख में वर्क ऑर्डर
काम शुरू होने से पहले ही विवाद में आने के कारण नगर निगम को इस काम के लिए कोई कांट्रेक्टर नहीं मिल रहा था। दिसंबर 2014 में कांट्रेक्टर केएन नारंग को 13 करोड़ 13 लाख रुपए में इस काम का वर्क ऑर्डर जारी किया गया। एनजीटी के निर्देश पर इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल से एनओसी भी ली गई। जब यह योजना बनी विशेष गढ़पाले नगर निगम के कमिश्नर थे और वर्क ऑर्डर जारी होते समय तेजस्वी एस नायक निगमायुक्त थे।

इनके समय प्रोजेक्ट आगे बढ़ा
1. विशेष गढ़पाले
इनके कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट की डीपीआर बनी।
2. तेजस्वी नायक
इंजीनियरों ने जो बताया मान लिया, निर्माण शुरू हुआ।
3. जीएस सलूजा
ईई, झील संरक्षण प्रकोष्ठ प्रभारी, तब तय हुआ वॉल कहां से कहां तक बनेगी।
4. संतोष गुप्ता
ये झील संरक्षण प्रकोष्ठ के प्रभारी थे तब काम शुरू हुआ।
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