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अंतरिक्ष केंद्र से एक साथ रिकॉर्ड 20 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया

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श्रीहरिकोटा। देश की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज यहाँ सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एक साथ रिकॉर्ड 20 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया।   केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से सुबह 09.26 बजे ध्रुवीय प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी34 ने तीन भारतीय और 17 विदेशी उपग्रहों के साथ अंतरिक्ष की उड़ान भरी और तकरीबन आधे घंटे बाद इसरो के अध्यक्ष ए.एस. किरण कुमार ने मिशन के सफतापूर्वक पूरा होने की घोषणा की। मिशन 26 मिनट 30 सेकेंड में पूरा हो गया। उन्होंने बताया कि सभी 20 उपग्रहों को उनकी यथेष्ट कक्षाओं में स्थापित कर दिया गया है। इससे पहले इसरो ने वर्ष 2008 में एक साथ सर्वाधिक 10 उपग्रह छोड़े थे।         एक साथ कई उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने के मामले में अब भारत सिर्फ रूस (33) और अमेरिका (29) से ही पीछे है। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह मुकाम हासिल करने पर इसरो के वैज्ञानिकों और मिशन की पूरी टीम को बधाई दी है।
इसरो ने बताया कि 16 मिनट 30 सेकेंड के बाद उपग्रहों ने भूमध्य रेखा से 97.5 डिग्री के कोण पर 508 किलोमीटर की ऊँचाई वाली सौर समचालित कक्षा हासिल कर ली जो वांछित कक्षा के काफी करीब है। इसके बाद अगले 10 मिनट में सभी 20 उपग्रह पूर्व नियोजित क्रम में एक-एक कर प्रक्षेपण यान के चौथे चरण से अलग हो गए।      इसरो के निदेशक पी. उन्नीकृष्णन ने कहा कि इस प्रक्षेपण के साथ ही इसरो ने एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा “मैं पूरी टीम के प्रति दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। हम अधिक से अधिक पेशेवराना कार्यशैली अपनाते जा रहे हैं। हमें खुशी है कि हम अपने ग्राहकों को विश्वस्तरीय सेवा देने में सफल रहे हैं।” प्रक्षेपण के बाद नियंत्रण कक्ष में सभी वैज्ञानिकों की निगाहें कंप्यूटर स्क्रीनों पर टिकी थीं। 17 मिनट बाद जैसे ही प्रक्षेपण यान ने सबसे पहले मिशन में सबसे महत्वपूर्ण इसरो के उपग्रह कार्टोसैट-2 को उसकी कक्षा में छोड़ा नियंत्रण कक्ष में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी। बेंगलुरु स्थित इसरो के टेलीमिट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क ने प्रक्षेपण यान से अलग होते ही कार्टोसैट-2 को अपने नियंत्रण में ले लिया। आगामी कुछ दिनों में इसे दूरस्थ नियंत्रण के जिरए उपयोग के लिए वांछित स्थिति में लाया जाएगा। इसके बाद भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के उपग्रहों सत्यभामासैट और सत्यम् पीएसएलवी से अलग हो गए। शेष 17 विदेशी उपग्रहों में इंडोनेशिया के लापैन-ए3, जर्मनी के बाइरोस, कनाडा के एम3एमसैट, अमेरिका के स्काईसैटजेन2-1, कनाडा के जीएचजीसैट-डी तथा अमेरिका के 12 डव उपग्रहों को दो चरणों में छोड़ा गया। एक-एक कर यान से अलग-होते गए और वैज्ञानिकों के चेहरों पर मुस्कान बढ़ती गई। सभी 20 उपग्रहों का कुल वजन लगभग 1288 किलोग्राम है। इसमें कार्टोसैट-2 727.5 किलोग्राम का तथा अन्य लघु तथा सूक्षम उपग्रहों का कुल वजन 560 किलोग्राम है। सभी 20 उपग्रहों में कार्टोसैट-2 सबसे महत्वपूर्ण है जिसका वजन 727.5 किलोग्राम है। इसका प्रयोग रिमोट सेंसिंग के लिए किया जाएगा। दो अन्य भारतीय उपग्रह सत्यभामासैट और स्वयम् हैं। डेढ़ किलोग्राम वजन वाला सत्यभामासैट चेन्नई के सत्यभामा विश्वविद्यालय का है जिसका इस्तेमाल ग्रीन हाउस गैसों के अध्ययन के लिए किया जाएगा। स्वयम् पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का उपग्रह है। एक किलोग्राम वजन वाले इस उपग्रह का इस्तेमाल प्वाइंट टू प्वाइंट मैसेजिंग के लिए किया जाएगा। शेष 17 विदेशी उपग्रह अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और इंडोनेशिया के हैं। इनमें इंडोनेशिया का मल्टी-स्पेक्टेरल रिमोट सेंसिंग उपग्रह ‘लापैन-ए3’ (120 किलोग्राम), जर्मनी के एयरोस्पेस सेंटर का वैज्ञानिक अनुसंधान उपग्रह ‘बिरोस’ (130 किलोग्राम), कनाडा के ‘एम3एमसैट’ और ‘जीएचजीसैट-डी’ तथा अमेरिका के ‘स्काईसैट जेन2-1’ और ‘डव सैटेलाइट’ प्रमुख हैं। वर्ष 1999 से अब तक इसरो 74 विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर चुका है। पिछले साल तीन मिशनों के तहत इसरो ने 17 विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण किया था। (वार्ता)
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