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ऑटो रिक्शा, वैन सहित अन्य वाहनों को स्कूली बच्चों को लाने ले जाने से रोकना तानाशाही है

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डीपीएस बस हादसे के बाद ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग ने सभी स्कूली वाहनों पर सख्ती शुरू कर दी है। प्रशासन ने उस ऑटो रिक्शा और वैन को प्रतिबंधित कर दिया है, जो बच्चों को स्कूल लाने ले जाने का काम करते हैं। प्रशासन के इस फैसले के बाद गुरुवार को बड़ी संख्या में शहरभर के आॅटो और वैन चालक गांधी हाल पर विरोध स्वरूप जमा हुए। हड़ताल पर गए रिक्शा चालकों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए संभायुक्त के नाम एक ज्ञापन सौंपा।

यह लिखा है ज्ञापन में…
– ऑटो रिक्शा, वैन सहित अन्य वाहनों को स्कूली बच्चों को लाने ले जाने से रोकना तानाशाही है। इस प्रकार के आदेश से हजारों ऑटो, वैन चालकों के सामने रोजी-रोटी चलाने की समस्या खड़ी हो गई है।

– उन्होंने मांग की है कि ऑटाे रिक्शा में बच्चों की संख्या पूर्व में हुए समझौते के अनुसार तय किया जाए। सीएनजी पंपों की संख्या बढ़ाई जाए। मॉल, अस्पताल, शासकीय कार्यालय सहित अन्य भीड़ वाली जगहों पर ऑटो स्टैंड बनाए जाएं।

– ऑटो रिक्शा, उबेर, जुगनू, ओला सहित सभी इस प्रकार के सभी वाहनों का किराया एक समान किया जाए। ऑटो रिक्शा फिटनेस और ड्राइविंग लाइसेंस पर ली जाने वाली पैनल्टी समाप्त कर राजस्थान हाईकोर्ट का निर्णय लागू किया जाए। इसके अलावा भी इन्होंने कई अन्य मांगे रखी हैं।

प्रतिबंध किसी पर नहीं, केवल नियम से ही चलेंगे वाहन
– कलेक्टर निशांत वरवड़े ने कहा सुप्रीम कोर्ट से गाइड लाइन ढाई साल पहले बन गई, हम केवल उसी का पालन करने के लिए कह रहे हैं। किसी ऑटो में दस बच्चे बैठकर जाएं या वैन, मैजिक में क्षमता से ज्यादा बच्चे बैठा लिए जाएं, यह ठीक नहीं है। पालक भी इस ओर ध्यान दें। नियमानुसार चलने वाले किसी भी स्कूली वाहन पर रोक नहीं है।

नहीं दे रहे स्कूली वाहन का दर्जा
– स्कूली वैन एसोसिएशन के अध्यक्ष बहादुर सिंह ठाकुर ने बताया स्कूली वाहन का दर्जा दिलाने के लिए कई बार परिवहन विभाग से मांग की, लेकिन वे स्कूल का लेटर मांगते हैं और स्कूल लेटर देने को तैयार नहीं हैं। इसके चलते परमिट नहीं मिल पा रहा है।

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