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कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी गुरुवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए

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पूर्व राष्ट्रपति और 43 साल से कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी गुरुवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा- ‘मैं राष्ट्र, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता की बात करने आया हूं। तीनों को अलग-अलग रूप में देखना मुश्किल है।’ सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि प्रणब जी को बुलाने की चर्चा पक्ष-विपक्ष में है। हम सब एक हैं, लेकिन किसी को यह समझ नहीं आता। डॉ. हेडगेवार भी कांग्रेस के आंदोलन में जेल गए थे। इससे पहले प्रणब ने आरएसएस मुख्यालय में डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी। उन्हें भारत मां का महान बेटा बताया। बता दें कि अब्दुल कलाम के बाद प्रणब दूसरे पूर्व राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने नागपुर में हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी।

यहां राष्ट्रवाद की बात कहने आया हूं: मुखर्जी

– प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘‘मैं आज यहां देश, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता की अवधारणा के बारे में अपनी बात साझा करने आया हूं। इन तीनों को आपस में अलग-अलग रूप में देखना मुश्किल है। देश यानी एक बड़ा समूह जो एक क्षेत्र में समान भाषाओं और संस्कृति को साझा करता है। राष्ट्रीयता देश के प्रति समर्पण और आदर का नाम है।’’

– ‘‘भारत खुला समाज है। भारत सिल्क रूट से जुड़ा हुआ था। हमने संस्कृति, आस्था, आविष्कारों और महान व्यक्तियों की विचारधारा को साझा किया है। बौद्ध धर्म पर हिंदुओं का प्रभाव रहा है। यह भारत, मध्य एशिया, चीन तक फैला। मैगस्थनीज आए, हुआन सांग भारत आए। इनके जैसे यात्रियों ने भारत को प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था, सुनियोजित बुनियादी ढांचे और व्यवस्थित शहरों वाला देश बताया।’’
– ”ग्रीक, चीन आदि जगहों से यात्री आए। उन्होंने भारत के बारे में कहा कि यहां ऐसा शासन है जो अच्छा मूलभूत ढांचा मुहैया करता है और व्यवस्था चलता है।”

भारत में जन्मा हर व्यक्ति भारत पुत्र

– मोहन भागवत ने कहा, ”प्रणब जी से हम परिचित हुए। सारा देश पहले से ही जानता है। अत्यंत ज्ञान और अनुभव समृद्ध आदरणीय व्यक्तित्व हमारे साथ है। हमने सहज रूप से उन्हें आमंत्रण दिया है। उनको कैसे बुलाया और वे क्यों जा रहे हैं। ये चर्चा बहुत है।”

– ”हिंदू समाज में एक अलग प्रभावी संगठन खड़ा करने के लिए संघ नहीं है। संघ सम्पूर्ण समाज को खड़ा करने के लिए है। विविधता में एकता हजारों वर्षों से परंपरा रही है। हम यहां पैदा हुए इसलिए भारतवासी नहीं हैं। ये केवल नागरिकता की बात नहीं है। भारत की धरती पर जन्मा हर व्यक्ति भारत पुत्र है।”

सब मिलकर काम करें तभी देश बदलेगा

– ”हमारी इसी संस्कृति के अनुसार इस देश में जीवन बने। सारे भेद-स्वार्थ मिटाकर सुख-शांति पूर्ण संतुलित जीवन देने वाला प्राकृतिक धर्म राष्ट्र को दिया जाए ऐसा करने में अनेक महापुरुषों ने अपनी बलि भी दे दी।”

– ”किसी राष्ट्र का भाग्य बनाने वाले व्यक्ति, विचार, सरकारें नहीं होते। सरकारें बहुत कुछ कर सकती हैं, लेकिन सबकुछ नहीं कर सकती हैं। देश का समाज अपने भेद मिटाकर, स्वार्थ को तिलांजलि देकर देश के लिए पुरुषार्थ करने के लिए तैयार होता है तो सारे नेता, सारे विचार समूह उस अभियान का हिस्सा बनते हैं और तब देश बदलता है।”

हेडगेवार कांग्रेस के कांग्रेस के कार्यकर्ता भी रहे

– ”आजादी से पहले सभी विचारधाराओं वाले महापुरुषों की चिंता थी कि हमारे विचार से कुछ भला होगा, लेकिन सदा के लिए बीमारी नहीं खत्म होगी। डॉ. हेडगेवार सभी कार्यों में सक्रिय कार्यकर्ता थे। उनको अपने लिए करने की कोई इच्छा नहीं थी। वे सब कार्यों में रहे। कांग्रेस के आंदोलन में दो बार जेल गए, उसके कार्यकर्ता भी रहे। समाजसुधार के काम में सुधारकों के साथ रहे। धर्म संस्कृति के संरक्षण में संतों के साथ रहे।”
– ”हेडगेवार जी ने 1911 में उन्होंने सोचना शुरू किया। उन्होंने विजयादशमी के मौके पर 17 लोगों को साथ लेकर कहा कि हिंदू समाज उत्तरदायी समाज है। हिंदू समाज को संगठित करने के लिए संघ का काम आज शुरू हुआ है। ये जो हमारी दृष्टि है, हमसब एक हैं। किसी किसी को एकदम समझ आता है, किसी को समझ में नहीं आता है। किसी को मालूम होते हुए भी वो उल्टा चलते हैं। किसी को तो मालूम भी नहीं है।”

संघ लोकतांत्रिक संगठन है

– ”भारत में दुश्मन कोई नहीं है। सबकी माता भारत माता है। 40 हजार साल से सबके पूर्वज समान हैं। सबके जीवन के ऊपर भारतीय संस्कृति के प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिलते हैं। इस सत्य को संकुचित भेद छोड़कर स्वीकार कर लें। भारतीयता के सनातन प्रवाह को स्वीकार करते जाएं। संघ को समाज में नहीं, समाज का संगठन करना है।”
– ”संघ लोकतांत्रिक है। इसी व्यवहार से स्वभाव बनता है। समाज का हर व्यक्ति अध्ययन और विचार करके नहीं चलता। वो उस वातावरण के हिसाब से चलता है, जो बनता है। वातावरण बनाने वाले लोग चाहिए। तात्विक चर्चा हमारा समाज नहीं करता। तत्व की चर्चा करने जाएंगे तो विषयों को लेकर मतभेद होगा। हर ऋषि अलग-अलग बात बताता है। अनुयाई वैसे ही चलते हैं।”

प्रणब हेडगेवार को श्रद्धांजलि देने वाले दूसरे राष्ट्रपति

– प्रणब मुखर्जी ने डॉ. हेडगेवार के जन्मस्थान का दौरा किया। इस दौरान भागवत ने उन्हें संघ के संस्थापक के घर के बारे में जानकारी दी। प्रणब ने यहां विजिटर बुक में लिखा- ‘मैं यहां भारत माता के बेटे को श्रद्धांजलि देने आया हूं।’

– बता दें कि जुलाई 2014 में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी नागपुर जाकर हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी थी। प्रणब ऐसा करने वाले दूसरे पूर्व राष्ट्रपति हैं।

– प्रणब दा नागपुर में 3 दिन तक संघ के मेहमान बनकर रहेंगे। इसके लिए वे बुधवार को एयरपोर्ट पहुंचे पर कोई कांग्रेसी उनसे मिलने नहीं पहुंचा। उधर, अहमद पटेल ने बुधवार देर रात कहा कि मुझे उनसे (प्रणब मुखर्जी) से ऐसी उम्मीद नहीं थी।

कांग्रेस के 30 नेताओं ने कार्यक्रम में न जाने की अपील की थी

– प्रणब के आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने के फैसले से कांग्रेस के नेता खुश नहीं हैं। सोनिया गांधी के करीबी और कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने बुधवार देर रात ट्वीट कर कहा कि मुझे उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।

– इससे पहले भी पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम, जयराम रमेश, सीके जाफर शरीफ समेत 30 से ज्यादा कांग्रेस नेताओं ने प्रणब से संघ कार्यक्रम में नहीं जाने की अपील की थी। इन नेताओं ने पत्र और मीडिया के जरिए मुखर्जी से इस कार्यक्रम से दूर रहने को कहा। नेताओं का कहना है प्रणब के कार्यक्रम में जाने से संघ विचारधारा को मजबूती मिल सकती है।

– उधर, इस कार्यक्रम में शामिल होने पर प्रणब दा ने 2 जून को कहा था कि इस बारे में कई लोगों ने पूछा, लेकिन जवाब नागपुर में दूंगा। उन्होंने कहा कि वे संघ के कार्यक्रम में जाने पर अभी कुछ भी नहीं कहना चाहते हैं।

कांग्रेस ने कहा- उनके आने की ऑफिशियल जानकारी नहीं
– कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। फिलहाल वे निजी दौरे पर नागपुर आए हैं। उनके दौरे की सूचना नगर कांग्रेस को भी अधिकृत तौर पर नहीं मिली है। लिहाजा कांग्रेस नेता उनसे मिलने नहीं पहुंचे। मुखर्जी से मिलने से किनारा करने की कोई ठोस वजह नहीं है।

किस प्रोग्राम में जा रहे हैं प्रणब मुखर्जी?

– नागपुर में आरएसएस का तृतीय शिक्षा वर्ग कार्यक्रम का समापन है। तृतीया शिक्षा वर्ग संघ के प्रचारक बनाने की प्रक्रिया का सबसे ऊंचे दर्जे का ट्रेनिंग प्रोग्राम है। मोदी भी तृतीय शिक्षा वर्ग में हिस्सा ले चुके हैं। इस बार नागरपुर में आरएसएस के देशभर से चुन कर आए हुए 914 स्वंयसेवकों को ट्रेनिंग दी गई है।
– 25 दिन तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में देशभर से डॉक्टर, आईटी एक्सपर्ट, इंजीनियर, पत्रकार, किसान और विभिन्न वर्गों के युवा शामिल हुए। इनकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है।

– सुभाषचंद्र बोस के पोते अर्धेंदु बोस और लाल लालबहादुर शास्त्री के बेटे भी सुनील शास्त्री भी नागपुर पहुंच गए हैं।

बेटी शर्मिष्ठा ने दी प्रणब को नसीहत

– बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने पिता प्रणब मुखर्जी से कहा कि “आरएसएस भी नहीं मानता है कि आप भाषण में उसकी सोच का बखान करेंगे, लेकिन बातें भुला दी जाएंगी। रहेंगे तो सिर्फ फोटो, जो फर्जी बयानों के साथ प्रसारित किए जाएंगे। नागपुर जाकर आप भाजपा-आरएसएस को फर्जी खबरें प्लांट करने, अफवाहें फैलाने का पूरा मौका दे रहे हैं। आज की घटना तो सिर्फ शुरुआत है।”

– बुधवार को कई मीडिया रिपोर्ट्स में उनके भाजपा में शामिल होने की खबरें आई थीं। शर्मिष्ठा ने इन खबरों को खंडन किया।

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