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गुर्जर समाज ने आंदोलन के चौथे दिन सिकंदरा के पास आगरा नेशनल हाईवे जाम कर दिया

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राजस्थान में 5% आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जर समाज ने आंदोलन के चौथे दिन सिकंदरा के पास आगरा नेशनल हाईवे जाम कर दिया। आंदोलन का असर बस और ट्रेन सेवा पर भी पड़ा है। कई जगहों पर आंदोलनकारी रेलवे ट्रैक पर बैठे हुए हैं। उधर, धौलपुर में धारा 144 अभी भी लागू है। यहां रविवार को आंदोलनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया था और फायरिंग भी की गई थी। इसमें 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। आंदोलन से सबसे ज्यादा प्रभावित भरतपुर और अजमेर संभाग हैं।

 21 ट्रेनें रद्द, 12 बसों को रोका गया
उत्तर प्रदेश से आने वाली रोडवेज की बसों को रोक दिया गया है। कुछ बसें सिर्फ दौसा तक पहुंच पा रही हैं। सिंधी कैम्प में 12 बसों को रोका गया है। धौलपुर के पास भूतेश्वर पुल पर गुर्जर समाज के लोगों ने बाड़ी-बसेड़ी मार्ग जाम कर दिया। हालांकि, अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को समझाकर जाम खुलवाया। सोमवार को 21 ट्रेनें कैंसल की गईं और 18 का मार्ग बदला गया। मंगलवार को 15 ट्रेनें कैंसल की गई हैं और 8 का मार्ग बदला गया। 13 फरवरी को 15 ट्रेनें कैंसल की जाएंगी।

उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश से अतरिक्त सुरक्षा बल मंगाया
प्रशासन ने भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा और टोंक में सुरक्षा बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से अतिरिक्त सुरक्षा बल मंगवाया गया है। 8 जिलों में राजस्थान सशस्त्र बल की 17 कंपनियों की तैनात की गईं। रेलवे स्टेशन और ट्रैक की भी सुरक्षा की जा रही है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी
गुर्जर आरक्षण आंदोलन संघर्ष समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष भूरा भगत ने कहा, “सरकार का प्रतिनिधिमंडल सकारात्मक जवाब देने की बात कह कर गया था, लेकिन अब तक कोई संदेश नहीं आया। ऐसे में अब गुर्जर समाज को अपना आंदोलन तेज करना होगा।” इस बीच सरकार ने सरकार ने पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह, स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा और सामाजिक न्याय विभाग मंत्री भंवरलाल मेघवाल की कमेटी बनाई है।

  • गुर्जर समाज की मांग है कि सरकार सभी प्रक्रिया पूरी करके पांच प्रतिशत आरक्षण बैकलॉग के साथ दे।
  • 24 सितंबर 2015 को विधानसभा में एसबीसी विधेयक पारित हुआ था।
  • राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर 2015 को नोटिफिकेशन जारी करते हुए इसे लागू किया। ये 14 महीने चला और 9 दिसंबर 2016 को हाईकोर्ट ने खत्म किया।
  • हाईकोर्ट द्वारा आरक्षण पर रोक के बाद यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है।
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