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नौ बैंक यूनियनों के संगठन यूनाईटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के बैनर तले बुधवार और गुरुवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल शुरू हो गई

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सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों और निजी क्षेत्र के पुराने बैंकों और विदेशी क्षेत्र के बैंकों में काम-काज नहीं हुआ। नौ बैंक यूनियनों के संगठन यूनाईटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के बैनर तले बुधवार और गुरुवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल शुरू हो गई। इससे राजधानी भोपाल में बैंकों की करीब 400 शाखाओं में बैंक का कामकाज प्रभावित रहा। दफ्तर सूने रहे और कामकाज बुरी तरह से प्रभावित रहा है। इससे करीब 3 लाख 74 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार प्रभावित होगा।

4 हजार शाखाओं के 40 हजार कर्मचारी

– बैंक यूनियन नेता अरुण भगोलीवाल एवं डीके पोद्दार ने बताया कि प्रदेश में 4 हजार शाखाओं के करीब 40 हजार कर्मचारी, अधिकारी हड़ताल पर हैं। इससे करीब 3 लाख 74 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार प्रभावित होगा। वहीं, भोपाल में करीब 400 शाखाओं के कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल पर हैं।

– इससे पहले हड़ताल के मद्देनजर बैंक कर्मचारियों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। अरेरा हिल्स स्थित पंजाब नेशनल बैंक के जोनल आफिस के सामने किए गए प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने मांगों को लेकर नारेबाजी की। इसके बाद सभा हुई। जिसे वीके शर्मा, डीके पोद्दार, संजीव सबलोक, संजय कुदेसिया, जेपी झंवर समेत कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया था।

– वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान वेतन समझौता नवंबर 2017 से लंबित है। बातचीत के 15 दौर हो चुके हैं। आखिरी दौर में बैंक प्रबंधन ने सिर्फ दो फीसदी वेतन वृद्धि का प्रस्ताव रखा।

हड़ताल क्यों …?
– बैंक कर्मचारियों ने वेतन में 2 फीसदी की वृद्धि के प्रस्ताव के खिलाफ हड़ताल पर गए हैं। इन दो दिनों की हड़ताल से आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एआईबीईए के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने बताया कि वह इस बात पर अड़े हैं कि अधिकारियों की बातचीत पर स्केल 3 तक ही सीमित रहेगी। पिछली बार आईबीए ने 15 फीसदी की बढ़ोत्तरी की थी। साथ ही हमारी मांग वेतन वृद्धि समझौता लागू करना, सेवा शर्तों में सुधार शामिल है।

देश के करीब 10 लाख कर्मचारी हड़ताल पर हैं

– देश के तकरीबन 10 लाख कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं। वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर बैंक कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं। विभिन्न राज्यों में इस हड़ताल का असर साफ दिखाई दे रहा है। सरकारी बैंकों और एटीएम पर ताले लग गए हैं, जिसकी वजह से लोगों को परेशानियों का सामने करना पड़ रहा है।

– हड़ताल से देश की बैंकिंग व्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ने की आशंका है लेकिन इसका सबसे ज्यादा खामियाजा सरकारी बैंकों को उठाना पड़ सकता है। असल में, सरकारी क्षेत्र के 17 बैंकों को पिछली तिमाही में 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हो चुका है।

– ये बैंक आगे का काम चलाने के लिए सरकार से अतिरिक्त वित्तीय मदद मांग रहे हैं। ऐसे में दो दिनों की हड़ताल से इन पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है। एनपीए वसूली जैसी गतिविधियों पर भी असर होगा।

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