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नौ राज्यों की 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे गुरुवार को आए

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तीन राज्यों की चार लोकसभा और नौ राज्यों की 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे गुरुवार को आए। इन 14 उपचुनावों में भाजपा और उसके सहयोगी के खाते में चार, जबकि विरोधी दलों के खाते में 10 सीटें गईं। जिन चार लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए, उनमें से तीन पर पिछली बार भाजपा जीती थी। इस बार उसे एक पर जीत मिली। विपक्षी एकता के बूते लड़ रहे राष्ट्रीय लोकदल ने उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट भाजपा से छीन ली। वहीं, कांग्रेस समर्थित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने भी भाजपा से महाराष्ट्र की भंडारा-गोंदिया सीट छीन ली। उधर, 10 विधानसभा सीटों में से तीन पर कांग्रेस, दो पर भाजपा और पांच पर अन्य दलों को जीत हासिल हुई। 2014 के आम चुनाव के बाद देश में बीते चार साल में 27 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। भाजपा को सिर्फ 5 पर जीत हासिल हुई। उसने अपनी जीती हुई 8 सीटें गंवा दीं।

चार लोकसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे

सीट इस बार कौन जीता पिछली बार कौन जीता
कैराना तबस्सुम हसन, रालोद हुकुम सिंह, भाजपा
पालघर राजेंद्र गावित, भाजपा चिंतामण वनगा, भाजपा
भंडारा-गोंदिया मधुकर कुकड़े, एनसीपी नाना पटोले, भाजपा
नगालैंड तोखेयो येपथोमी, एनडीपीपी नेफ्यू रियो, एनपीएस

10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव : कांग्रेस 3 और भाजपा 1 सीटों पर जीती

सीट इस उपचुनाव में कौन जीता पिछली बार कौन जीता
जोकीहाट, बिहार शाहनवाज आलम, राजद सरफराज आलम, जदयू
गोमिया, झारखंड बबीता देवी, झामुमो योगेन्द्र प्रसाद, झामुमो
सिल्ली, झारखंड सीमा महतो, झामुमो अमित महतो, झामुमो
चेंगन्नूर, केरल सजी चेरियन, सीपीएम रामचंद्रन नायर, सीपीएम
पलूस कडेगांव, महाराष्ट्र विश्वजीत कदम, कांग्रेस पतंगराव कदम, कांग्रेस
नूरपुर, उत्तर प्रदेश नईमुल हसन, सपा लोकेन्द्र सिंह चौहान, भाजपा
महेशतला, प.बंगाल दुलाल दास, टीएमसी कस्तूरी दास, टीएमसी
थराली, उत्तराखंड मुन्नी देवी, भाजपा मगन लाल शाह, भाजपा
शाहकोट, पंजाब हरदेव सिंह, कांग्रेस अजीत सिंह कोहर, अकाली दल
अंपाती, मेघालय मियानी डी शीरा, कांग्रेस मुकुल संगमा, कांग्रेस

* कर्नाटक की आरआर नगर सीट भी हारी भाजपा :राजराजेश्वरी नगर में वोटिंग टल गई थी। यहां कांग्रेस प्रत्याशी मुनिरत्न ने भाजपा कैंडिडेट मुनिराजू गौड़ा को 41,162 वोटों से हरा दिया।

इस साल भाजपा 27 में से 3 उपचुनाव जीत सकी

उपचुनाव / सीटें भाजपा

जीत (फायदा/नुकसान)

भाजपा समर्थित

जीत (फायदा/नुकसान)

कांग्रेस

जीत (फायदा/नुकसान)

कांग्रेस समर्थित

जीत (फायदा/नुकसान)

अन्य
लोकसभा 10 1 (-6) 1 (0) 2 (+2) 2 (+1) 4 (+3)
विधानसभा 18 2 (-2) 0 (-1) 6 (+0) 4 (0) 5 (+3)
कुल 28 सीटें 3 (-8) 1 (-1) 8 (+2) 6 (+1) 9 (+6)

4 साल में 27 में से सिर्फ 5 लोकसभा सीटों पर भाजपा को जीत मिली, 8 सीटें गंवाईं

साल सीटें भाजपा भाजपा समर्थित कांग्रेस कांग्रेस समर्थित अन्य
2014 5 2 (0) 0 (0) 0 (0) 0 (0) 3 (0)
2015 3 0 (-1) 0 (0) 1 (+1) 0 (0) 2 (0)
2016 5 2 (0) 1 (0) 0 (0) 0 (0) 2 (0)
2017 4 0 (-1) 0 (-1) 2 (+1) 1 (0) 1 (+1)
2018 10 1 (-6) 1 (0) 2 (+2) 2 (+1) 4 (+3)
कुल 27 5 (-8) 2 (-1) 5 (+4) 3 (+1) 12 (+4)

चार लोकसभा सीटों पर क्या हुआ?
1) कैराना, उत्तर प्रदेश : यहां भाजपा को घेरने के लिए 5 दल लामबंद थे, गन्ना बनाम जिन्ना की लड़ाई भाजपा हार गई
सीट क्यों खाली हुई थी
: भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन से
इस बार मुकाबला: तबस्सुम हसन, रालोद v/s मृगांका सिंह, भाजपा

कैराना में हार से भाजपा को 15 लोकसभा सीटों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है
– भाजपा उम्मीदवार को हराने लिए तगड़ी घेराबंदी हुई। रालोद उम्मीदवार को सपा, बसपा, कांग्रेस और आप ने समर्थन दिया था। नतीजा यह रहा कि भाजपा ने यह सीट गंवा दी। रालोद की तबस्सुम जीत गईं।
– रालोद नेता जयंत चौधरी ने अपनी रैलियों में भी कहा था कि हमें जिन्ना नहीं, बल्कि गन्ना चाहिए। योगी ने भी पलटवार करते हुए कहा था- गन्ना हमारा मुद्दा है, लेकिन हम जिन्ना की फोटो भी नहीं लगने देंगे।
– इस बहस में गन्ने का मतलब गन्ना किसानों और जिन्ना के मायने पाकिस्तान के कायद-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्ना की फोटो लगने से थे।
– गन्ना बेल्ट में चीनी मिलें शुरू नहीं हो सकीं। माना जा रहा है कि इससे जाट वोटर भाजपा से दूर हो गए।
– कैराना की हार से भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट बहुल 15 लोकसभा सीटों पर नुकसान हो सकता है। 2014 में ये सभी सीटें भाजपा के खाते में आई थीं।

2) पालघर, महाराष्ट्र : भाजपा ने सीट बरकरार रखी
क्यों खाली हुई थी
: भाजपा सांसद चिंतामण वनगा के निधन से
इस बार मुकाबला: श्रीनिवास वनगा, शिवसेना v/s राजेंद्र गावित, भाजपा

इस सीट पर शिवसेना भी भाजपा के खिलाफ थी
– श्रीनिवास भाजपा के दिवंगत सांसद चिंतामण वनगा के बेटे हैं, लेकिन इस बार एनडीए से अलग हुई शिवसेना उन्हें अपने पाले में करने में कामयाब हो गई। तब भाजपा को राजेंद्र गावित को टिकट देना पड़ा। वो पहले कांग्रेस में थे।
– कांग्रेस-एनसीपी ने 2014 में इस सीट से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था, लेकिन इस बार साझेदारी करके दामोदर शिंगदा को टिकट दिया।
– यहां भाजपा उम्मीदवार को जीत मिली। जीत के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया।

3) भंडारा-गोंदिया, महाराष्ट्र : एनसीपी ने भाजपा से सीट छीनी
क्यों खाली हुई थी
: भाजपा के बागी सांसद नाना पटोले के इस्तीफे से। वे कांग्रेस में शामिल हो गए
इस बार मुकाबला: मधुकर कुकड़े, एनसीपी v/s हेमंत पाटले, भाजपा

भाजपा से बगावत का पटोले को कांग्रेस ने नहीं दिया इनाम
– नाना पटोले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इस सीट पर कांग्रेस का एनसीपी से समझौता हुआ। माना जा रहा था कि कांग्रेस पटोले को टिकट देती तो एनसीपी का एक धड़ा उनका समर्थन नहीं करता।
– हालांकि, नतीजों पर इसका असर नहीं पड़ा। एनसीपी ने यह सीट जीत ली।
4) नगालैंड
क्यों खाली हुई थी
: मौजूदा मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के इस्तीफ से। वे भाजपा के समर्थन वाले नगा पीपुल्स फ्रंट से हैं।
इस बार मुकाबला: तोखेयो येपथोमी, एनडीपीपी v/s सी अपोक जमीर, एनपीएफ

कभी 86% वोट हासिल करने वाली कांग्रेस 4 चुनावों से नहीं कर पा रही वापसी

– इस सीट पर सिर्फ दो ही उम्मीदवार थे। राज्य की यह इकलौती लोकसभा सीट है।
– यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस के समर्थन वाली नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) और भाजपा के समर्थन वाली नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के उम्मीदवारों के बीच रहा।
– तीन बार से इस सीट पर एनपीएफ को जीत मिली है और इस बार यहां एनडीपीपी जीती। पिछले 4 चुनाव से यहां कांग्रेस वापसी नहीं कर पा रही है। जबकि, 1998 के चुनाव में यहां कांग्रेस उम्मीदवार को 86.70% वोट और 1999 में 71.18% वोट मिले थे। इसके बाद 2004 के चुनावों में एनपीएफ ने कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

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