About us

पीएम मोदी सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर एम्स में एडमिट अटल बिहारी वाजपेयी को देखने पहुंचे

0

रविवार रात पीएम मोदी सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर एम्स में एडमिट अटल बिहारी वाजपेयी को देखने पहुंचे। मोदी के आने की पूर्व सूचना एम्स प्रशासन को भी नहीं थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ते हुए पीएम के आवास से लेकर एम्स तक हर ट्रैफिक सिग्नल पर मोदी का काफिला रुका। जबकि नियमों के तहत पीएम की कार निकलने के 15 मिनट पहले ही ट्रैफिक रोक दिया जाता है और काफिला गुजरने के 8 मि. बाद ही रोड़ पर ट्रैफिक शुरू हो सकता है। इन सबके बीच हम आपको बता रहे हैं कि आखिर कैसी होती है प्रधानमंत्री की सुरक्षा।

पीएम की कार का बम भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता
– पीएम मोदी बुलेटप्रुफ बीएमडब्ल्यू 760एलआई (BMW 7-Series 760Li) में सफर करते हैं। सिर्फ 6.2 सेकंड में यह कार 0 से 100 किमी की रफ्तार पकड़ सकती है। इसका टॉप स्पीड 210 किमी प्रति घंटा है। इसमें फायर फाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और बुलेटप्रूफ विंडो हैं। इसका एडवांस्ड हीट सेंसर बम और मिसाइल से प्रोटेक्ट करता है। इसमें 5,972 सीसी का इंजन है। कार 4.5-7.46Kmpl का माइलेज देती है।

– यदि पीएम की इस गाड़ी पर गैस से अटैक किया जाता है तो इसका कैबिन गैस-सेफ चेंबर में बदल जाता है। कार में ऑक्सीजन टैंक भी मौजूद है। इसमें सेल्फ सीलिंग फ्यूल टैंक है, जिसके चलते किसी भी हालत में गाड़ी में विस्फोट नहीं हो सकता। इस कार पर बम का असर भी नहीं होगा, क्योंकि ग्रेनेड और बम से बचाव के लिए इसमें नीचे की तरफ आर्मर प्लेट्स होती हैं। कार के शीशे बुलेटप्रूफ होते हैं और इसमें इमरजेंसी एग्जिट भी दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 करोड़ रुपए की यह कार मोडिफिकेशन और सिक्योरिटी फीचर्स के चलते 5 करोड़ रुपए की है।

Z+ सिक्योरिटी में चलते हैं पीएम
प्रधानमंत्री Z+ सिक्योरिटी से घिरे होते हैं। पीएम के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री को भी यह सिक्योरिटी मिलती है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारियों की कमेटी यह डिसाइड करती है कि Z+ सिक्योरिटी किस-किस को दी जाएगी। इस कमेटी में होम सेक्रेटरी और होम मिनिस्टर शामिल होते हैं।

खतरे के लेवल के हिसाब से सिक्योरिटी का लेवल तय किया जाता है। VVIPs, VIPs, पॉलिटिशियंस और हाईप्रोफाइल सेलिब्रिटीश को कुछ चुनिंदा एजेंसीज सुरक्षा प्रदान करती हैं। इनमें SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप), NSG (नेशनल सिक्योरिटी ग्रेड) और CRPF (सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स) शामिल हैं। प्रेसीडेंट, वॉइस प्रेसीडेंट, प्राइम मिनिस्टर, सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट के जज, गवर्नर, चीफ मिनिस्टर और केबिनेट मिनिस्टर्स ऑटोमेटिक सिक्योरिटी कवर में आ जाते हैं।

कैसे होती है SPG

– प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं, वहां हर एक स्टेप पर अचूक शूटर्स तैनात हैं। पीएम को खतरा पहुंचा सकने वाले लोगों को यह शूटर्स कुछ ही सेकंड्स में मारने की ताकत रखते हैं।
– एसपीजी में करीब 3 हजार जवान हैं। इनकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री, एक्स-पीएम और उनके परिवार को सिक्योरिटी प्रोवाइड करने की है। इन जवानों को अमेरिका की सीक्रेट सर्विस की गाइडलाइन के आधार पर तैयार किया जाता है।
– यह FNF-2000 असॉल्ट राइफल, ऑटोमैटिक गन, 17M रिवोल्वर्स जैसे मॉर्डन इक्विपमेंट से लैस होते हैं।
– एसपीजी कमांडोज बेल्जियम से इम्पोर्ट की गई 3.5kg की राइफल से लैस होते हैं। यह 1 मिनट में 850 राउंड फायर करने में कैपेबल होते हैं। इनकी रेंज 500 मीटर तक होती है।
– सेकंड कमांडोज के पास सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल होती हैं। बुलेटप्रूफ जैकेट पहने रहते हैं, जिसका वजन 2.2Kg होता है। घुटनों और कुहनी पर पेड पहने रहते हैं। आंखों पर काला चश्मा लगाए रखते हैं।
– यह चश्में ऐसे बने होते हैं कि अटैक होने पर भी जवानों को देखने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती। एकदम से फायरिंग होने पर एसपीजी कमांडोज पीएम के सामने खड़े होकर अटैक करने वाले को खत्म करने की ताकत रखते हैं।
– एसपीजी सोल्जर हमेशा एल्बो गार्ड और एक खास तरह के शूज पहने रहते हैं। यह शूज ऐसे होते हैं जो कभी स्लिप नहीं करते। स्पेशल ग्लव्ज भी सोल्जर के पास होते हैं। इसको पहनने से हथियार हाथों से स्लिप नहीं होते और चोट से भी बचाए रखते हैं।
– ट्रेनिंग के दौरान इन जवानों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी दी जाती है। ऐसे में हथियार न होने पर भी यह अटैक करने वाले को रोक सकते हैं और अपने काबू में कर सकते हैं।

– पीएम के रक्षादल में दर्जनभर गाड़ियों के साथ ही 2 आर्मर्ड BMW 7 सीरीज सेडान, 6 BMW X 5 और एक मर्सिडीज बेंज एम्बुलेंस शामिल होती हैं। इसके अलावा टाटा सफारी जैमर भी रक्षादल के साथ चलती है। पीएम को किसी भी तरह की दुर्घटना से बचाने के लिए दो डमी कारें भी शामिल की जाती हैं। जैमर व्हीकल में कई एंटीना होते हैं।

– यह एंटीना 100 मीटर तक की दूरी वाले बम को डिफ्यूज करने में कैपेबल होते हैं। इन सभी कारों में एनएसजी के अनुभवी शूटर्स मुस्तैद रहते हैं। जब प्राइम मिनिस्टर पैदल चलते हैं तब भी एनएसजी कमांडों यूनिफार्म और सिविल ड्रेस में उन्हें घेरे रहते हैं।

SPG का गठन कब हुआ
1984 में इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद 1988 में एसपीजी का गठन किया गया। इससे पहले दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल सेल प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात रहती थी। जिसके चारों तरफ एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की एक टीम घेरा बनाकर रखती थी। यह भारत की सबसे महंगी सिक्योरिटी एजेंसी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीन साल पहले इस सिक्योरिटी में 4 हजार से भी कम ऑफिसर्स थे, और इनके लिए 330 करोड़(सालाना) का बजट निर्धारित किया गया था।

चार पार्ट में डिवाइड

– एसपीजी ऑपरेशन, ट्रेनिंग, इंटेलिजेंस और टूर एडमिन इन चार पार्ट में पीएम की सिक्योरिटी का जिम्मा संभालती है। एसपीजी ऑपरेशन की जिम्मेदारी कम्युनिकेशन की होती है।

– पीएम की कार और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था संभालना इसी का काम होता है। वहीं इंटेलिजेंस एंड टूर टीम इटेंलिजेंस इनपुट और खतरों पर नजर रखती है। ये टीम पीएम की यात्रा की जिम्मेदारी भी संभालती है।

– पीएम की सुरक्षा में तैनात एसपीजी फोर्स FNF-2000 असॉल्ट राइफल से लैस होते हैं, जो की एक फुली ऑटोमेटिक गन है।
– साथ ही, कमांडोज के पास ग्लोक 17 नाम की एक पिस्टल भी होती है। कमांडो अपनी सेफ्टी के लिए एक लाइट वेट बुलेटप्रूफ जैकेटपहनते हैं और साथी कमांडो से बात करने के लिए कान में लगे ईयर प्लग या फिर वॉकी-टॉकी का सहारा लेते हैं।

– पीएम की सुरक्षा के लिए एल्बो और नी गार्ड पहनते हैं।
-एसपीजी कमांडो के जूते भी इस तरह बने होते हैं कि किसी भी जमीन पर फिसले नहीं।
-हाथ में खास तरह के दस्ताने होते हैं, जो कमांडो को चोट लगने से बचाते हैं।
-एसपीजी कमांडो द्वारा पहने जाने वाला चश्मा भी इस तरह बना होता है कि लड़ाई के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

Share.

About Author

Leave A Reply