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बच्चों की मौत और पोषण आहार वितरण में गड़बड़ी का मामला शुक्रवार को विधानसभा में छाया, तीखी नोकझोंक हुई

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पोषण आहार नहीं मिलने से बच्चों की मौत और पोषण आहार वितरण में गड़बड़ी का मामला शुक्रवार को विधानसभा में छाया रहा। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस के विधायक जयवर्धन सिंह ने महिला बाल विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया है। जिसमें कहा गया है कि प्रदेश में 2011 से 2016 के बीच 6 माह से 3 वर्ष की आयु वर्ग के 20.94 लाख बच्चे और 3 वर्ष से 6 वर्ष की आयु वर्ग के 57 लाख बच्चों को पोषण आहार नहीं बांटा गया। इसी तरह 7.99 लाख गर्भवती माताओं को भी पूरक पोषण आहार नहीं दिया गया।

2011 से 2015 के बीच पूरक पोषण आहार योजना पर 5012 करोड़ रुपए खर्च

इसके साथ ही टेक होम राशन की सप्लाई करने वाली कंपनी एमपी एग्रो ने तय मात्रा से ज्यादा गेहूं और चावल का उपयोग किया और उससे जुड़ी कंपनियों को 15.57 करोड़ रुपए का अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाया गया। सिंह ने कहा 2011 से 2015 के बीच पूरक पोषण आहार योजना पर 5012 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

पोषण आहार किसी को मिला तो वो कंपनी के बड़े अफसर-मालिकों को
सिंह ने कहा हाईकोर्ट तीन साल पहले सरकार को निर्देश दिए कि स्वसहायता समूहों से पोषाहार वितरित करवाया जाए। इसके बावजूद भी वही तीन कंपनियां टेक होम राशन बना रही थी। केसा लगता है कि मप्र में किसी को पोषण आहार मिला है तो एमपी एग्रो के बड़े अधिकारियों को मिला है। ऐसी जो कंपनियां हैं, उनमें एमपी एग्रो न्यूट्री फूड्स है, उनके जो मालिक हैं उनका तो बहुत पेट भरा है। भाजपा विधायक आरडी प्रजापति ने आरोप लगाया कि महिला एवं बाल विकास के अधिकारियों के गिरोह के कारण आंगनबाडिय़ों में पोषण आहार पहुंचता ही नहीं है।

मुख्यमंत्री ने स्वयं लिया निर्णय

 विधायकों के सवालों का जवाब देते हुए महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में स्वसहायता समूहों से पोषण आहार वितरित कराए जाने का स्वयं फैसला लिया। इसके साथ ही नई व्यवस्था से प्रदेश की 20 लाख से ज्यादा महिलाओं को फायदा मिलेगा। नई व्यवस्था प्रदेश के सात स्थानों पर शुरू की जाएगी जिसमें पोषण आहार तैयार किया जाएगा।
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