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भाजपा और शिवसेना अगला लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगी- अमित शाह

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अमित शाह ने बुधवार को यहां भरोसा जताया कि भाजपा और शिवसेना अगला लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगी। इससे पहले शिवसेना की ओर से 2019 का चुनाव अकेले लड़ने की बात कही गई थी। शाह यहां पार्टी के ‘संपर्क फॉर समर्थन’ अभियान के तहत आए हैं। वे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिलने उनके निवास मातोश्री पहुंचे हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात भाजपा की तरफ से रिश्तों को बेहतर बनाने के तौर पर देखी जा रही है। हालांकि, शिवसेना इसके लिए राजी नहीं है। इससे पहले शाह ने माधुरी दीक्षित और रतन टाटा से मुलाकात की। उनका लता मंगेशकर से भी मिलने का प्लान था, लेकिन लता ने ऐन वक्त पर खराब सेहत का हवाला देते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया था।

– सूत्रों का कहना है कि अमित शाह ने बॉलीवुड की हस्तियों से मुलाकात का वक्त तय करते वक्त प्रोटोकॉल का ध्यान नहीं रखा। वे माधुरी दीक्षित से पहले मिले, इसके बाद भारत रत्न लता से मिलने वाले थे।

– कहा जा रहा है कि भाजपा ने माधुरी दीक्षित को राज्यसभा सदस्य बनाने का जो प्रस्ताव दिया वह भी शायद लता को रास नहीं आया। इसी वजह से उन्होंने शाह से मुलाकात ऐन मौके पर रद्द कर दी।

– लता ने भाजपा नेताओं से फोन करके कहा कि अमित शाह अगली बार जब मुंबई आएंगे तब निश्चित ही वह उनसे मिलेंगी।

किसी भी हाल में चुनाव जीतना चाहती है भाजपा

– सामना की बुधवार की संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हुए हैं, किसान सड़क पर हैं, इसके बावजूद भाजपा चुनाव जीतना चाहती है। जिस तरह भाजपा ने साम, दाम, दंड, भेद के जरिए पालघर का चुनाव जीता उसी तरह भाजपा किसानों की हड़ताल को खत्म करना चाहती है। चुनाव जीतने की शाह की जिद को हम सलाम करते हैं।

शिवसेना ने लिखा-अब बहुत देर हो गई है
– इस संपादकीय में कहा गया- ” एक ओर जहां मोदी पूरी दुनिया में घूम रहे हैं, वहीं शाह पूरे देश में घूम रहे हैं। भाजपा को उपचुनावों में हार मिली है, क्या इसलिए अब उसने सहयोगी पार्टियों से मिलना शुरू कर दिया है। भले ही अब वह करीब आने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। तेलेगु देशम पार्टी के चीफ चंद्रबाबू नायडू एनडीए छोड़ गए। उधर जदयू चीफ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अलग बयान दे रहे हैं। भाजपा का जनता से संपर्क लगातार टूटता जा रहा है।

– शिवसेना का कहना है कि अगर भाजपा राम मंदिर बनाती है तो 350 सीटें जीत सकती है।

2014 में क्या स्थिति थी
– महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं। 2014 में इनमें से भाजपा को 23 और शिवसेना को 18 सीटें मिली थीं। राकांपा को 4, कांग्रेस को 2 और अन्य के खाते में एक सीट गई थी।

शरद पवार ने कहा था- फिलहाल देश में 1977 जैसे हालात

– राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा मंगलवार को कहा था, “देश में 1977 जैसे हालात है, जब विपक्षी दलों के गठबंधन ने इंदिरा गांधी को सत्ता से बेदखल कर दिया था। पहले भी ऐसा होता रहा है, जब-जब उपचुनावों में मिली हार का नतीजा उस समय की मौजूदा सरकार की हार के रूप में निकला।”

– उन्होंने कहा कि राज्यों में मजबूत मौजूदगी रखने वाले दलों जैसे कि केरल में लेफ्ट, कर्नाटक में जेडीएस, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र में कांग्रेस, आंध्र प्रदेश में टीडीपी, तेलंगाना में टीआरएस, पश्चिम बंगाल में टीएमसी और महाराष्ट्र में एनसीपी को एक आम सहमति बनाने की जरूरत है।”

 – उन्होंने शिवसेना को साथ आने का ऑफर दिया है।
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