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भारत की फ्रांस के साथ हुई राफेल फाइटर प्लेन की डील को देखते हुए भी चीन यह तैयारी कर रहा है

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भारतीय सीमा पर किसी भी खतरे से निपटने के लिए चीन अपने वेस्टर्न थियेटर कमांड के एयर डिफेंस को मजबूत बनाने में जुटा है। यह कमांड लाइन आफ एक्चुअल कंट्रोल की सिक्युरिटी का जिम्मा संभालती है। चीन के एक सरकारी अखबार की रिपोर्ट में मिलिट्री एक्सपर्ट के हवाले से यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में यह भी इशारा किया गया है कि भारत की फ्रांस के साथ हुई राफेल फाइटर प्लेन की डील को देखते हुए भी चीन यह तैयारी कर रहा है।

ग्लोबल टाइम्स ने प्लेन की फोटो जारी कीं

– सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि चीनी सेना ने एक J-10 और J-11 फाइटर प्लेन की फोटो जारी की है।

– ये प्लेन चीन में मनाए जा रहे न्यू ईयर और स्प्रिंग फेस्टिवल (वसंत उत्सव) के मौके पर ऊंचाई वाले पठारी इलाके में उड़ान भरते नजर आ रहे हैं।

J-10 की क्या है खासियत?
– J-10, लाइट वेट मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट है। यह खराब मौसम में भी उड़ान भर सकता है।
– इसका कंट्रोल फ्लाय-बाय-वायर से है। यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसमें एयरक्राफ्ट का कंट्रोल मैन्युअल की बजाय कंप्यूटर से जनरेट

होने वाले सिग्नल्स से होता है। इस टेक्नोलॉजी से इसका वजन कम और ऑपरेट करना आसान हो गया है। इसे चीन में ही तैयार किया गया है।

J-11 में की क्या है खासियत?
– J-11, सिंगल सीट और ट्विन इंजन लाइट फाइटर एयरक्राफ्ट है। 1970 में बने इस एयरक्राफ्ट में चीन ने कुछ औार सुधार किए हैं।
– चीन ने इसमें लेटेस्ट रडार और रॉल्स-रॉयस की जगह दूसरा इंजन लगाया है।
– यह एयरक्राफ्ट अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में उड़ान भरने के साथ ही सटीक निशाना साध सकता है।
– चीन ने हाल ही में J-20 को सेना में शामिल किया है। इस इलाके में तैनात किया गया यह अपनी तरह का पहला फाइटर प्लेन है।

J-20 की क्या है खासियत?
– पांचवीं जनरेशन का सिंगल सीट फाइटर प्लेन है। हर मौसम में उड़ान भर सकता है।
– दावा है कि रडार की पकड़ में नहीं आता। इसका इस्तेमाल जसूसी के लिए किया जा सकता है। वहीं हवा में यह अचूक निशाना साधता है।
– चीन का दावा है कि यह अपने तरीके का एशिया में पहला फाइटर प्लेन है। अधिकारिक रूप में इसे सितंबर 2017 में चीन की सेना में शामिल किया गया।

राफेल से ज्यादा अपडेट फाइटर प्लेन होने का दावा
– ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में चीनी डिफेंस एक्सपर्ट सोंग झोंगपिंग के हवाले से कहा गया है कि वेस्टर्न थियेटर कमांड में को मजबूत बनाना चीन के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

– उन्होंने कहा कि भारत पास तीसरी जनरेशन के फाइटर प्लेन हैं। ऐसे में चीन 3.5वीं जनरेशन के प्लेन तैनात कर रहा है। इसस वह भारत की ओर से संभावित खतरे से निपटने में मजबूत होगा।

राफेल डील की ओर इशारा
– भारत ने फ्रांस से राफेल फाइटर प्लेन का सौदा किया है। इसकी ओर इशारा करते हुए सोंग ने कहा, “भारत की ओर से नए फाइटर प्लेन के इम्पोर्ट को देखते हुए चीन पश्चिमी थिएटर कमान में अपने फाइटर प्लेन को मजबूत करना जारी रखेगा।”

क्यों बने हैं टकराव के हालात?
– भारत और चीन के बीच पिछले साल डोकलाम विवाद के बाद से तनातनी बरकरार है।
– सिक्किम के डोकलाम क्षेत्र में सीमा विवाद को लेकर 73 दिनों तक दोनों देश की सेनाओं में तनतनी रही थी।
– उसके बाद भी कई ऐसे मौके आए जब चीन की सेना ने सीमा पर भारतीय सेना को उकसाने की कोशिशें की हैं।

राफेल डील के बाद से चीन चौकस
– भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल फाइटर प्लेन का सौदा किया है। चीन को शक है कि भारत इन्हें एलएसी पर तैनात करेगा।
– राफेल सौदे को ध्यान में रखकर ही चीन लेटेस्ट फाइटर जेट तैनात कर रहा है।
– बता दें कि एलएसी 3488 किलोमीटर में फैली है। इसमें ऊंचाई पर स्थित तिब्बत का पठार भी शामिल है।

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