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भोपाल एनकाउंटर के बाद जेल मंत्री पर जब राजनीतिक और मीडिया का दबाव बढ़ा

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Bhopal encounter के बाद मचे राजनीतिक घमासान के बीच जेल मंत्री कुसुम मेहदेले ने विभिन्न विभागों से ऐसे प्रहरियों की लिस्ट मांगी है, जो मुख्य ड्यूटी को छोड़कर मिनिस्टरों या अफसरों के नौकरी-चाकरी कर रहे हैं।
आधे जेल प्रहरी दूसरी जगह ड्यूटी पर
उल्लेखीय है कि सेंट्रल जेल में कैदियों की निगरानी के लिए 160 प्रहरी हैं। इनमें से 80 प्रहरी मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, जेल मंत्री, पूर्व जेल मंत्री, प्रमुख सचिव और डीजी के बंगलों पर तैनात हैं। यानी 50 फीसदी सुरक्षा प्रहरी निजी सेवा में लगाए गए हैं। जेल के प्रहरी रजिस्टर में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि कौन किसकी सेवा में तैनात है। यह रिकॉर्ड मानवाधिकार आयोग ने मंगाया है। इसके मुताबिक सबसे ज्यादा 20 प्रहरियों को जेल मुख्यालय और 10 की ड्यूटी प्रमुख सचिव जेल विनोद सेमवाल के यहां लगी है।
सूत्रों के अनुसार, ये प्रहरी पिछले कई सालों से यह काम कर रहे हैं। एक अफसर ने बताया कि जेल की सुरक्षा के लिहाज से प्रहरियों की इस ड्यूटी पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। जेल की सुरक्षा की कीमत पर इस सेवा को अघोषित नियम माना गया। कभी प्रहरियों को वापस बुलाने की जुर्रत जेल प्रबंधन ने नहीं की।
भोपाल एनकाउंटर के बाद जेल मंत्री पर जब राजनीतिक और मीडिया का दबाव बढ़ा, तब उन्होंने ऐसे यहां-वहां तैनात प्रहरियों को वापस जेल सुरक्षा में लगाने की कवायद शुरू की है।
तीन साल से नहीं हुई जेल समिति की बैठक
जेल के इंतजामों पर नजर रखने के लिए जेल संदर्भ समिति को गठन किया जाता है। यह हैरानी की बात है कि इसका कार्यकाल खत्म हो गया, लेकिन पिछले 3 साल से इसकी बैठक तक नहीं हुई। एक सदस्य के मुताबिक, अगस्त 2016 में पुरानी जेल संदर्भ समिति का कार्यकाल खत्म हो चुका है। पुराने कार्यकाल में एक भी बैठक नहीं हुई। इस बारे में तत्कालीन जेल मंत्री बाबूलाल गौर से भी सदस्यों ने चर्चा की थी, लेकिन उन्होंने भी सिर्फ आश्वासन ही दिए।
कांग्रेस ने CM पर उठाए सवाल…
मप्र कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने जेल ब्रेक के बाद हुए एनकाउंटर पर सवालिया निशान लगाते हुए CM शिवराजसिंह चौहान से जानना चाहा है कि NIA जांच की घोषणा के बाद राज्य सरकार को बैकफुट पर आने की आवश्यकता महसूस क्यों हुई? कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा NIA से जांच नहीं कराना कई शंकाओं को जन्म दे रहा है। कांग्रेस ने आगे कहा कि जिस तरह से घटना वाले दिन पुलिस कंट्रोल रूम और पुलिस अधिकारियों के बीच हुए वार्तालापों की ऑडियो वायरल हो रहे हैं, उससे एनकाउंटर फर्जी होने की बात पुख्ता होती जा रही है।
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